US Capitol Siege: भारतीय-अमेरिकियों ने की हिंसा की निंदा, कहा- ये असली अमेरिका नहीं

US Capitol Siege Update: अमेरिकी की राजधानी वाशिंगटन में बुधवार को कैपिटल बिल्डिंग पर ट्रम्प समर्थकों द्वरा हिंसा की भारतीय-अमेरिकी समूहों ने भी निंदा की है। भारतीय-अमेरिकी समूहों ने इस हिंसा को लोकतंत्र पर हमला बताया है।

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    बाइडेन 2020 की राष्ट्रीय वित्त समिति के सदस्य और राष्ट्रपति की उद्घाटन समारोह समिति के उपाध्यक्ष अजय भुटौरिया ने कहा "संयुक्त राज्य अमेरिका कैपिटल पर हिंसक हमला घृणित था। डोनाल्ड ट्रम्प के उकसावे पर किया गया देशद्रोह का यह कार्य हमारे देश (अमेरिका) और हर अमेरिकी के अधिकारों और भलाई के लिए एक खतरा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा कि कैपिटल हिल पर जो कुछ हुआ वो असली अमेरिका को नहीं दिखाता है।

    सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड (SALDAF) ने एक बयान जारी कर कड़े शब्दों में कैपिटल हिल हिंसा की निंदा की है और इसे चरमपंथियों का काम बताया है। SALDAF ने इसे 2020 के चुनाव नतीजों को पलटने का एक गुमराह प्रयास बताया है।

    हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने भी की निंदा
    हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) ने भी घटना की निंदा की है। फाउंडेशन ने कहा "हिंदू अमेरिकी विशेष रूप से लोकतंत्र की नींव और इस पर आने वाले खतरों को समझते हैं। हम में से कई दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत गणराज्य में अपनी विरासत को पाते हैं। हिंदू मूल्य और आदर्श अमेरिकी मूल्य और आदर्श हैं और हमारे लोगों के बीच बंधन, स्वतंत्रता, समानता और प्रतिनिधि लोकतंत्र के लिए हमारी प्रतिबद्धता अपरिवर्तित है।"

    हिंसा में पुलिसकर्मी की भी मौत
    अमेरिका की कैपिटल बिल्डिंग में ट्रम्प समर्थकों द्वारा की गई हिंसा के दौरान घायल हुए एक पुलिसकर्मी की भी मौत हो गई है। रायटर्स की खबर के मुताबिक बुधवार को हुई हिंसा में पुलिसकर्मी घायल हो गया था जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन गम्भीर चोटों के चलते उन्हें बचाया नहीं जा सका।

    बुधवार को अमेरिकी कांग्रेस में जो बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने के लिए चर्चा हो रही थी। इसी दौरान कैपिटल बिल्डिंग के बाहर खड़े ट्रम्प समर्थक हिंसक हो गए और बिल्डिंग के अंदर घुस गए थे। इनमें से कुछ के पास हथियार भी थे। कुछ समय के लिए बिल्डिंग पर ट्रम्प समर्थकों का कब्जा हो गया था जिसके बाद नेशनल सिक्योरिटी गार्ड को भेजना पड़ा था। हिंसा के दौरान 4 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। इनमें एक महिला प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस की गोली लगने से हो गई थी। महिला को पूर्व सैनिक बताया जा रहा है जो ट्रम्प के समर्थन में वहां पहुंची थी। वहीं अन्य तीन लोगों की मौत मेडिकल इमरजेंसी के चलते हुई थी।

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