Defence News: चीन के खिलाफ 1000 6th-Gen रोबोट वारप्लेन्स तैनात करेगा US, भारत भी बना रहा ये खतरनाक प्लेटफॉर्म
US-China Conflict: ऐसा लगता है, कि चीन को काउंटर करने के लिए अमेरिका आर-पार की लड़ाई के मूड में आ रहा है और अमेरिकी वायु सेना (US Air Force- USAF) ने चौंकाने वाला कदम उठाया है।
हाल ही में कोलेबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (CCA) कार्यक्रम के तहत प्रोटोटाइप टेस्ट प्लेटफार्मों के डिजाइन, निर्माण और टेस्ट के लिए एंडुरिल और जनरल एटॉमिक्स को वित्त पोषण जारी रखने के अपने फैसले की घोषणा की है। इस कार्यक्रम के तहत यूएस एयरफोर्स के लिए नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर जेट्स बनाए जाएंगे।

अमेरिका के पास इस वक्त पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स हैं, ऐसे में अमेरिका अब 6th जेनरेशन फाइटर जेट बनाकर चीन को चुनौती देने के लिए मैदान में उतर चुका है। CCA, यूएस एयरफोर्स की अगली पीढ़ी के एयर डोमिनेंस (NGAD) सिस्टम फैमिली का हिस्सा है। एयर पावर में अपना वर्चस्व बनाए रखना अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है और नये प्रोजेक्ट्स का मकसद कम से कम मानवीय जोखिम के साथ हवा में विनाशक क्षमता हासिल करना है।
आपको बता दें, कि CCA अमेरिकी वायुसेना को काफी कम लागत और लचीलेपन पर विस्तारित लड़ाकू क्षमता प्रदान करता है।
Collaborative Combat Aircraft (CCA) क्या है?
CCA, मानव रहित लड़ाकू वायु वाहनों (UCAVs) के लिए एक अमेरिका का एक कार्यक्रम है, जिसे मोटे तौर पर एक वफादार विंगमैन के बराबर माना जाता है। सीसीए का मकसद, अगली पीढ़ी के मानवयुक्त लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए अलग अलग सहयोगी टीमों के साथ काम करना है, जिसमें नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन बी-21 रेडर जैसे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान और बमवर्षक फाइटर जेट भी शामिल हैं।
पारंपरिक UCAVs के विपरीत, सीसीए में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को "ऑटोनॉमी पैकेज" के रूप में शामिल किया गया है, जिससे युद्ध के मैदान में इसकी लाइफलाइन बढ़ जाती है। ऐसी उम्मीद है, कि इसकी लागत समान क्षमताओं वाले मानवयुक्त विमान की तुलना में काफी कम होगी।
यूएस एयरफोर्स ने 2023 से 2028 तक अपने सीसीए कार्यक्रमों पर 6 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च करने की योजना बनाई है। CCA कार्यक्रम की सफलता से अतिरिक्त मानवयुक्त स्क्वाड्रन की आवश्यकता कम हो सकती है। यह सामर्थ्य और क्षमता को संतुलित करेगा।
अमेरिका के इस प्रयोग का मकसद पायलटों को मिशन कमांडर की भूमिका पर ले जाना है और जेट को उड़ाने का काम रोबोट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के हवाले कर दिया जाएगा, ताकि युद्ध में पायलटों को नुकसान ना पहुंचे।
यह एक मल्टी-रोल विमान होगा, जो अलग-अलग दिनों में अलग-अलग कार्य करने के लिए मॉड्यूलर हो सकता है। सीसीए में ईडब्ल्यू और एसईएडी सहित मिशनों को पूरा करने की क्षमता होगी और यह संभावित रूप से डिकॉय के रूप में भी काम करेगा।
Air Combat Evolution (ACE)
यूएसए की डिफेंस एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी (DARPA) का एयर कॉम्बैट इवोल्यूशन (ACE) कार्यक्रम CCA पहल में एक प्रमुख योगदानकर्ता रहा है। DARPA के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल रयान हेफ्रॉन द्वारा किए गए एक आकलन के मुताबिक, ACE कार्यक्रम मानव-मशीन सहयोगी एरियल फाइट का उपयोग करके युद्ध ऑटोनोमी में विश्वास बढ़ाने का प्रयास करता है।
ACE यथार्थवादी डॉगफाइट में मौजूदा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को लागू करेगा। समानांतर में, ACE युद्ध ऑटोनोमी प्रदर्शन में मानव विश्वास को मापने, जांचने, बढ़ाने और भविष्यवाणी करने के तरीकों को लागू करेगा।
यह इंसानों की भूमिका को सिंगल प्लेटफ़ॉर्म ऑपरेटर से मिशन कमांडर में बदल देगा। खासकर ACE का लक्ष्य एक ऐसी क्षमता प्रदान करना है, जो पायलट को एक व्यापक, अधिक वैश्विक वायु कमान मिशन में भाग लेने में सक्षम बनाता है, जबकि उनके विमान और टीम के मानव रहित सिस्टम दृश्य सीमा से परे, एक गतिशील वातावरण में और हाई स्पीड पर व्यक्तिगत रणनीति में लगे हुए हैं।
अमेरिका को क्यों चाहिए ऐसे फाइटर जेट
लंबे समय से, अमेरिकी यूसीएवी ने इराक और अफगानिस्तान में युद्ध के मैदानों में काम किया है। उन्हें यूक्रेन और यमन के चल रहे संघर्षों में काला सागर और लाल सागर में प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है। और अब अमेरिकी एयरफोर्स "ऑपरेशनल इम्पेरेटिव्स" के लिए चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो रही है।
और सीसीए कार्यक्रम का मकसद एडवांस सेंसर या हथियारों से लैस कम लागत वाला, मॉड्यूलर, मानव रहित विमान विकसित करता है। सीसीए निर्बाध और प्रभावी सहयोग को सक्षम करेगा और व्यापक स्थितिजन्य जागरूकता, ज्यादा घातक और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी वातावरण में बेहतर उत्तरजीविता प्रदान करके मानवयुक्त लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन को बढ़ाएगा।
आमतौर पर, एक आधुनिक सीसीए एक मध्यम आकार का प्लेटफ़ॉर्म होगा, और इसकी लागत लगभग 30 मिलियन डॉलर हो सकती है, जो MQ-9 रीपर ड्रोन के समान है, जबकि अमेरिका का फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट F-35 की कीमत 85 मिलियन डॉलर है। GA-ASI के MQ-20 एवेंजर, क्रेटोस XQ-58 वाल्कीरी और बोइंग MQ-28 घोस्ट बैट तीन उच्च प्रदर्शन वाले UCAV हैं, जिन्हें बड़े पैकेज में भी एकीकृत किया जा सकता है। AI-सक्षम स्व-उड़ान वाले F-16 वाइपर फाइटर जेट भी इसमें शामिल किए जा सकते हैं।
USAF ने वित्तीय वर्ष 2028 तक CCA कार्यक्रम के तहत रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए कुल 6 अरब डलर खर्च करने की योजना बनाई है।
भारत के लिए क्या है आगे का रास्ता
भारत भी इसी तरह का कार्यक्रम चला रहा है और HAL कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (CATS) क्रूड-अनक्रूड टीमिंग में भारत का प्रमुख प्रयास है। CATS, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं (NAL) और न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (NRT) के सहयोग से काम करता है, जो भारत की सबसे तेजी से बढ़ती एयरोस्पेस और रक्षा अनुसंधान एवं विकास निजी कंपनियों में से एक है।
डीआरडीओ लैब CAIR एक कृत्रिम रूप से बुद्धिमान, स्वायत्त लक्ष्य अधिग्रहण प्रणाली के लिए एक उन्नत लड़ाकू एल्गोरिदम विकसित करने वाला मुख्य उपठेकेदार है।
इस सिस्टम में एक मानवयुक्त लड़ाकू विमान शामिल होगा, जो "मदर शिप" के रूप में कार्य करेगा। भारत जो निर्माण कर रहा है, वो एक, दो सीटों वाला एचएएल तेजस प्रारंभिक मदर-शिप विमान होने की संभावना है।
इसमें कई एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित हवाई प्लेटफॉर्म शामिल होंगे, जो उच्च ऊंचाई की निगरानी के लिए वायुमंडलीय ड्रोन के रूप में काम कर सकते हैं। इसके साथ ही भारत जिस प्लेटफॉर्म का निर्माण कर रहा है, वो स्टैंडऑफ दूरी से निशाने पर सटीक हमले कर सकता है और लंबी दूरी से दुश्मन के लक्ष्यों को नष्ट करने की इसमें क्षमता होगी। भारतीय प्लेटफॉर्म में भी पायलट्स की जरूरत नहीं होगी।
CATS परियोजना के सभी घटकों के 2024 के अंत या 2025 की शुरुआत तक पूरा होने की उम्मीद है। भविष्य में, CATS में एक मानव रहित कार्गो परिवहन और रोटरी मानव रहित हवाई वाहन (RUAV) भी शामिल होगा, जो 25-30 किलोग्राम का पेलोड ले जा सकता है और इसे समुद्र तल से लगभग 18,000 फीट ऊपर से गिरा सकता है। HAL ने पहले ही 100 किलोमीटर की रेंज वाले 200 किलोग्राम के RUAV पर काम करना शुरू कर दिया है।
यह देखा जा सकता है, कि भारत धीरे-धीरे और स्थिर रूप से आगे बढ़ रहा है। इंडियन एयरफोर्स और भारतीय उद्योग क्रू-अनक्रू टीमिंग के ऑपरेशन महत्व और 'आत्मनिर्भरता' की आवश्यकता को पूरी तरह से समझते हैं।












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