चीन से मात्र 50 किमी दूर लद्दाख में बन रहा नया एयरबेस, भारतीय वायुसेना की ताकत में होगा जबरदस्त इजाफा
लद्दाख में LAC पर निगरानी और सुरक्षा के लिए भारत ने एक और एयरबेस का काम शुरू कर दिया है। पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन तनाव के तीन साल बाद, भारत ने न्योमा में 10,000 फीट का रनवे तैयार करना शुरू कर दिया है।
इस रनवे के तैयार होने के बाद कम समय में ही भारतीय वायु सेना अपने मिग-29 या Su-30 MKI लड़ाकू विमान को लांच कर सकेगी। यह क्षेत्र वास्तविक नियंत्रण रेखा से महज 50 किमी दूर है।

IAF द्वारा कुछ वर्षों की लंबी प्रक्रिया के माध्यम से पर्यावरण मंजूरी लेने के बाद पिछले हफ्ते ही इसका काम शुरू किया जा चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक जल्द ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह न्योमा का दौरा करने जा सकते है।
13,000 फीट से अधिक ऊंचा ये नया एयरबेस, लद्दाख में निगरानी बढ़ाने के लिए लड़ाकू विमान, नए रडार और उन्नत ड्रोन संचालित कर सकता है। लद्दाख में लड़ाकू अभियानों के लिए ये तीसरा एयरबेस होगा। इससे पहले लेह और थोइस में ऐसे एयरबेस बन चुके हैं।
इसके अलावा स्पेशल ऑपरेशन ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर ऑपरेशन के लिए 3 एडवांस लैंडिंग ग्राउंड है जिसमें न्योमा, दौलत बेग ओल्डी, फुक्चे शामिल हैं।
न्योमा ALG पहली बार साल 1962 में अस्तित्व में आया था. लेकिन उसके बाद कभी इस्तेमाल ही नहीं किया गया। न्योमा लेह से लगभग 1.2 किमी ऊंचा है जहां भारतीय वायुसेना का सक्रिय बेस है।
न्योमा को फाइटर बेस में बदलने का प्रस्ताव भारतीय वायुसेना ने 2010 में एएन-32 की सफल लैंडिंग के बाद रखा था, लेकिन पूर्वी लद्दाख में हुए सीमा पर तनाव के बाद इस विचार ने जोर पकड़ा।
एक उन्नत लैंडिंग ग्राउंड होने के नाते, न्योमा में मौजूदा रनवे पट्टी कठोर मिट्टी की है जो सी-130जे सुपर हरक्यूलिस और हेलिकॉप्टर जैसे विशेष विमानों को उतरने की अनुमति देती है।
न्योमा का ये नया रनवे एक ठोस रनवे होगा जिसका उपयोग सैनिकों और उपकरणों को एलएसी के करीब लाने के लिए भारी परिवहन विमान उतारने के लिए किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक नई दिल्ली सीमा सड़क संगठन द्वारा शुरू की गई इस परियोजना को पूरा करने के में 20 से 22 महीने लग सकते हैं। खास बात ये है कि इस न्योमा एयरबेस पर लैंडिंग और टेकऑफ दोनों तरफ से हो सकती है।
यह भारतीय वायुसेना के लिए बहुत बडा एडवांटेज है। क्योंकि हाई एल्टीट्यूड क्षेत्रों में ऐसे इलाके कम ही मिलते हैं। इस अपग्रेडेशन में 214 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च आएगा।
पूर्वी लद्दाख में ऑपरेशन के लिए, भारतीय वायुसेना मिग-29 और Su-30MKI के इंजनों को भी संशोधित कर रही है ताकि वे दुर्लभ वातावरण के बावजूद अपने पूर्ण हथियारों के साथ उड़ान भर सकें।
एक बार तैयार होने के बाद, भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू विमानों को न्योमा, थोइस, लेह और श्रीनगर से संचालित कर सकती है, जबकि डीबीओ और कारगिल उन्नत लैंडिंग ग्राउंड के रूप में कार्य कर सकते हैं। युद्ध की स्थिति में, पंजाब में लड़ाकू अड्डों का उपयोग आक्रामक अभियानों के लिए भी किया जाएगा।












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