Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

अलकायदा के लिए ‘जन्नत’ बना तालिबान राज, UN की चेतावनी, लंबी दूरी की मिसाइल से कर सकता है हमला

यूनाइटेड नेशंस में सौंपी गई खुफिया रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि, न तो आईएस और न ही अल-कायदा '2023 से पहले अंतरराष्ट्रीय हमलों को अंजाम देने के लिए सक्षम हो पाएगा।

काबुल, जून 05: संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि तालिबान राज में अल-कायदा अफगानिस्तान में 'सुरक्षित पनाहगाह' का आनंद ले रहा है। द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को दी गई खुफिया रिपोर्ट में कहा है कि, अफगानिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हमलों का अड्डा बन सकता है।

अलकायदा पर चेतावनी

अलकायदा पर चेतावनी

हालांकि, यूनाइटेड नेशंस में सौंपी गई खुफिया रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि, न तो आईएस और न ही अल-कायदा '2023 से पहले अंतरराष्ट्रीय हमलों को अंजाम देने के लिए सक्षम हो पाएगा, चाहे उनका इरादा कुछ भी हो या तालिबान उन्हें रोकने के लिए काम करता है या नहीं।' बहरहाल, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, आईएस, अल-कायदा और 'अफगान धरती पर कई अन्य आतंकवादी समूहों और लड़ाकों' की मौजूदगी पड़ोसी देशों और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा रही है। पिछले अगस्त में अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद से यू.एस. और नाटो सेना 20 वर्षों के बाद देश से वापसी कर ली थी, जिसके बाद तालिबान ने अफगानिस्तान में पनपने वाले या विस्तार करने वाले इन संगठनों की मदद की है।

तालिबान राज बना ‘सुरक्षित स्वर्ग’

तालिबान राज बना ‘सुरक्षित स्वर्ग’

गुरुवार को प्राप्त रिपोर्ट में, तालिबान के खिलाफ प्रतिबंधों की निगरानी करने वाले पैनल ने कहा कि, तालिबान ने अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ पदों पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की ब्लैक लिस्ट में शामिल 41 लोगों को नियुक्त किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, तालिबान ने देश के प्रमुख पश्तून जातीय समूह का समर्थन किया है, लेकिन, दूसरी जातियों, जैसे ताजिक और उज्बेक्स सहित अल्पसंख्यक समुदायों को अलग-थलग कर दिया गया है।

क्या कोशिश कर रहा है तालिबान?

क्या कोशिश कर रहा है तालिबान?

विशेषज्ञों ने कहा कि तालिबान की प्राथमिक चिंता अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में अफगानिस्तान को फिर से जोड़ने की है, ताकि अफगानिस्तान में बढ़ते आर्थिक और मानवीय संकट से निपटने के लिए विदेशी मदद प्राप्त की जा सके और देश पर अपना नियंत्रण और मजबूत किया जा सके। रिपोर्ट में कहा गया है कि, 'सत्ता हासिल करने के बाद से, तालिबान के भीतर आंतरिक तनाव पैदा करने वाले कई कारक रहे हैं, जिससे यह धारणा बन गई है कि तालिबान का शासन अराजक, असंबद्ध और नीतियों को उलटने और वादों से पीछे हटने में कुख्यात है।'

तालिबान के अंदर भी कई धड़े

तालिबान के अंदर भी कई धड़े

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, तालिबान संगठन के अंदर भी कई धड़े बन चुके हैं और कुछ लोगों का मानना है कि, व्यावहारिक तरीके से परिस्थितियों को संभाला जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि, तालिबानी नेता व्यावहारिक और कट्टरपंथियों के बीच विभाजित हो गए हैं, लेकिन संगठन में कट्टरपंथी ग्रुप के पासा ज्यादा समर्थन और ज्यादा शक्ति है। इसीलिए तालिबान अभी तक एक संगठित सरकार बनाने में नाकाम रहा है और इसीलिए ना तो तालिबान को मान्यता मिली है और ना ही तालिबान को विदेशी सहायता मिली है। तालिबान के कट्टरपंथी धरे की जिद की वजह से ही लड़कियों की पढ़ाई पर प्रतिबंध लगा दिया गया और महिलाओं के पुरूषों के साथ काम करने पर रोक लगा दी गई।

‘शासन करने में सक्षम होता तालिबान’

‘शासन करने में सक्षम होता तालिबान’

विशेषज्ञों ने कहा कि, 'केंद्रीय दुविधा यह है कि एक कट्टरपंथी विचारधारा वाला आंदोलन पिछले 20 वर्षों के दौरान विकसित हुए समाज के साथ कैसे जुड़ सकता है, जिसमें तना फैला हुआ है और जो समाज अलग अलग कबीलों और क्षेत्रीय हिस्सों में बंटा हुआ है। हालांकि, इन गंभीर मुद्दों के बावजूद, पैनल ने कहा कि, तालिबान 'देश को नियंत्रित करने की अपनी क्षमता में आश्वस्त दिखाई देते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपनी सरकार की अंतिम मान्यता प्राप्त करने के लिए "प्रतीक्षा" करते दिखाई दे रहे हैं।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+