UNSC में भारत का चक्रव्यूह और बुरी तरह फंसा चीन, अमेरिका-फ्रांस-ब्रिटेन आक्रामक, सावधान दिखे पुतिन
यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक के दौरान जब अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों के बीच जमकर बहसबाजी हो रही थी तो अमेरिका को पूरी तरह से फ्रांस और ब्रिटेन का साथ मिल गया।
नई दिल्ली, अगस्त 10: यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल के अध्यक्ष भारत ने सोमवार को हाई लेवल मीटिंग में चीन को जमकर धोया है और भारत को फ्रांस और अमेरिका का पूरा समर्थन मिला है। समुद्री कानून के मुद्दे पर पीएम मोदी ने चीन को साफ तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि कोई भी देश अपनी ताकत के बल पर किसी दूसरे देश का दमन नहीं कर सकता है और हर देश को समुद्री कानून को मानना ही होगा। हालांकि, इस बैठक के दौरान अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों के बीच जमकर बहसबाजी भी हो गई, लेकिन बैठक के अंत में भारतीय प्रधानमंत्री ने जो बयान दिया है, उसे चीन को एक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

चीन को पीएम मोदी ने घेरा
यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक के दौरान जब अमेरिका और चीन के प्रतिनिधियों के बीच जमकर बहसबाजी हो रही थी तो अमेरिका को पूरी तरह से फ्रांस और ब्रिटेन का साथ मिल गया। वहीं, भारत ने भी समुद्री सुरक्षा को लेकर अमेरिका की बातों का समर्थन किया है। बैठक के दौरान यूएनएसी अध्यक्ष नरेन्द्र मोदी ने साफ तौर पर कहा कि ''समुद्री सुरक्षा को लेकर यूनाइटेड नेशंस के प्रस्तावों का पालन हर देश को करना चाहिए और समुद्री कानून को मानना चाहिए।'' पीएम मोदी ने बैठक में बतौर अध्यक्ष अपना बयान देते हुए पांच सिद्धातों का जिक्र किया और कहा कि ''आपसी समझ औ सहयोग की रूपरेखा तैयार हो, समुद्री व्यापार हस्तक्षेप मुक्त होना चाहिए, संयुक्त तौर पर प्राकृतिक आपदाओं और समुद्री लुटेरों से संयुक्त रूप से लड़ाई होना चाहिए, समुद्री पर्यावरण का संरक्षण होना चाहिए और जिम्मेदारी के साथ समुद्री संपर्क को बढ़ाना चाहिए''।

चीन के खिलाफ आक्रामक रवैया
यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक के दौरान अमेरिका ने साफ तौर पर साउथ चायना सी में चीन की आक्रमकता का मुद्दा उठाया और कहा कि अगर चीन ने साउथ चायना सी में छोटे देशों को धमकाना बंद नहीं किया तो अमेरिका दखल देता रहेगा। वहीं, अमेरिका की इस चेतावनी के बाद चीन को उस वक्त बहुत बड़ा झटका लग गया जब फ्रांस ने भी साउथ चायना सी का मुद्दा उठा दिया, जबकि यूनाइटेड किंगडम ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र का मुद्दा उठाकर चीन को चारों तरफ से घेर लिया। हालांकि, इस बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन भी 15 सालों के बाद शामिल हुए थे। रूसी मीडिया के मुताबिक, पीएम मोदी पहली बार अध्यक्ष बने थे, इसीलिए पुतिन इस बैठक में शामिल में हुए थे, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक बैठक के दौरान व्लादिमिर पुतिन सभी देशों की बात को सावधानी के साथ सुन रहे थे।

चीन के खिलाफ आया वियतनाम
वियतनाम के प्रधान मंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने भी दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता के खिलाफ आवाज उठाकर साफ कर दिया कि दक्षिण चीन सागर में अब चीन की मनमानी को नहीं चलने दिया जाएगा। वियतनाम के प्रधानमंत्री ने कहा कि ''समुद्री विवादों को अंतरराष्ट्रीय कानून, राजनयिक और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए और "स्वतंत्रता सुरक्षा, सुरक्षा, नेविगेशन की स्वतंत्रता और ओवरफ्लाइट सुनिश्चित करना चाहिए।'' इसके साथ ही उन्होंने चीन की आक्रामकता की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ''ऐसे कृत्यों का सहारा लेने से बचना चाहिए, जो स्थिति को काफी खराब कर सकते हैं''। आपको बता दें कि वियतनाम के समुद्री हिस्से पर चीन अपना हक जताता है और अकसर वियतनाम के समुद्री क्षेत्र में अपने विध्वंसक विमानों को भेजता रहता है।

चीन ने की पलटवार की कोशिश
भारत को संबोधित करते हुए यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में चीन के उपस्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि, यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल वो जगह ही नहीं है, जहां साउथ चायना सी को लेकर बात हो या मुद्दा उठे और जिन देशों ने दक्षिण चीन सागर का मुद्दा उठाया है, चीन उन देशों का कड़ा विरोध करता है।'' भारत और अमेरिका की तरफ निशाना साधते हुए चीन के प्रतिनिधि ने कहा कि ''कुछ देश, एशिया प्रशांत क्षेत्र में विशेष क्षेत्रीय रणनीतियों के तहत काम कर रहे हैं और उन देशों ने समुद्री संघर्षों को बनाने और उन्हें तेज करने का प्रयास किया है, संबंधित देशों की संप्रभुता और सुरक्षा हितों को कमजोर कर रहे हैं, इसके साथ ही ऐसे देश क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर कर रहे हैं, जो अधिकांश देशों की शांति, सहयोग और विकास की आकांक्षाओं के विपरीत है।"

फ्रांस और ब्रिटेन ने बैठक में क्या कहा ?
संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के मंत्री ले ड्रियन ने कहा कि "हम दक्षिण चीन सागर में अत्यधिक तनाव में इन सभी स्थितियों के प्रति बेहद सतर्क रहना चाहेंगे।" उन्होंने कहा कि फ्रांस विभिन्न क्षेत्रीय मंचों पर काम कर रहा है ताकि समुद्री ठिकानों पर नियंत्रण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने भागीदारों की क्षमता को मजबूत किया जा सके। वहीं, यूके के रक्षा सचिव वालेस ने चीन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि ''UNCLOS (संयुक्त राष्ट्र समुद्री सुरक्षा कानून) सभी महासागरों और सभी समुद्रों पर लागू होता है और यह कुछ राज्यों के लिए अपनी इच्छानुसार चुनने और चुनने के लिए एक तरफा विकल्प नहीं है। भारत की तरह ही यूनाइटेड किंगडम के पास भी एक स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक के लिए एक विजन है''

व्लादिमिर पुतिन रहे खामोश
यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में करीब करीब सभी देशों ने चीन की आक्रामकता के खिलाफ बात की। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने दक्षिण चीन सागर या इंडो-पैसिफिक का उल्लेख नहीं किया, और बहुत बारीकी से पूरी स्थिति को देखने की कोशिश की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने इस दौरान कहा कि ''रूस, संयुक्त राष्ट्र चार्टर में दर्ज अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रमुख मानदंडों और सिद्धांतों के सख्त पालन को बढ़ावा देता है और मानता है कि देशों की संप्रभुता के लिए सम्मान, आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप और बातचीत के जरिए ही विवादों को निपटाना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि ''मुझे उम्मीद है कि इस बैठक में हिस्सा लेने वाले सदस्य मेरे इस विचार से सहमत होंगे कि समुद्री जगहों के शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी से उपयोग में संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए''। माना जा रहा है कि रूसी राष्ट्रपति का ये बयान अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति को निशाना बनाने के लिए था।












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