तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में 72 निर्दोषों की हत्याः यूएन
वॉशिंगटन, 15 दिसंबर। संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने और अफगानिस्तान में सत्ता संभालने के बाद से उसे अफगानिस्तान में निर्दोषों की हत्याओं की विश्वसनीय रिपोर्ट मिली है. यूएन ने खुलासा किया है कि इनमें से ज्यादातर हत्याएं तालिबान ने खुद की थीं.
संयुक्त राष्ट्र की उप अधिकार प्रमुख नादा अल-नाशिफ ने कहा कि 15 अगस्त को तालिबान के देश पर कब्जे के बाद आम माफी की घोषणा के बावजूद इस तरह की हत्याओं की लगातार रिपोर्टों से वह बहुत चिंतित हैं. उन्होंने कहा, "अगस्त और नवंबर के बीच हमें विश्वसनीय रिपोर्ट मिली है कि पूर्व अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों और पूर्व सरकारी अधिकारियों समेत 100 से अधिक लोगों की हत्याएं हुईं." उन्होंने इन हत्याओं में से कम से कम 72 के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया है.

तालिबान के कब्जे के बाद हालात
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने इस साल अगस्त में तालिबान के कब्जे के बाद से स्थिति की समीक्षा की है. उसके मुताबिक काबुल के पतन के तुरंत बाद कट्टरपंथी चरमपंथी तालिबान ने हत्याओं और नरसंहारों का दौर शुरू कर दिया. राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों समेत अन्य क्षेत्रों में पिछले शासन में शामिल 100 से अधिक अफगान मारे गए. यूएन का कहना है कि तालिबान युवा लड़कों को सैनिकों के रूप में भर्ती कर रहा है और महिलाओं के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन कर रहा है.
नादा अल-नाशिफ के मुताबिक हत्याओं के अलावा इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान के कम से कम 50 संदिग्ध सदस्यों को तालिबान द्वारा फांसी दी गई या सिर कलम कर दिया गया है. तालिबान इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान को अपना वैचारिक दुश्मन मानता है.
तालिबान की वापसी के बाद से देश में कम से कम आठ मानवाधिकार कार्यकर्ता और दो पत्रकार मारे जा चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र ने भी अवैध हिरासत और डराने-धमकाने के 55 मामलों का दस्तावेजीकरण किया है.
नादा अल-नाशिफ ने जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया, "अफगान न्यायाधीशों, अभियोजकों, वकीलों और विशेष रूप से महिला कानूनी पेशेवरों के लिए खतरे की घंटी बज रही है." तालिबान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल कहर बल्खी ने मंगलवार को कहा कि सरकार आम माफी के लिए "पूरी तरह से प्रतिबद्ध" है और उन आरोपों से इनकार किया कि पिछली सरकार के कर्मचारियों को सताया जा रहा है.
जेनेवा में मंगलवार को अल-नाशिफ ने युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में मानवीय संकट की एक गंभीर तस्वीर पेश की. उन्होंने बताया कि "बहुत से लोग निराश हैं और वे अपने अस्तित्व के लिए खतरनाक कदम उठाने के लिए मजबूर हैं. इनमें बाल श्रम और यहां तक की बच्चे की बिक्री की जैसे मामले भी शामिल हैं."
एए/वीके (डीपीए, एएफपी)
Source: DW
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