UN हाई कमिश्नर ने भारत में बढ़ती हिंसा की आलोचना की
यूएन मानवाधिकार के कमिश्नर ने भारत की आलोचना की, गौरी लंकेश की हत्या और रोहिंग्या मुद्दे पर भारत की आलोचना की
जेनेवा। भारत में जिस तरह से पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की गई और म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के मुद्दे को पूरी तरह से नजरअंदाज करते हुए जिस तरह भारत सरकार ने उन्हें शरण देने से इनकार किया है, उसकी यूएन मानवाधिकार हाई कमिश्नर ने आलोचना की है। उन्होंने भारत में धार्मिक असहिष्णुता, अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला, रोहिंग्या शर्णार्थियों के मुद्दे पर भारत की आलोचना की है।

आवाज उठाने वालों को नहीं मिल रही सुरक्षा
जेनेवा में मानवाधिकार परिषद की 36वीं सेशन को संबोधित करते हुए जीद राद अल हुसैन ने कहा कि मानवाधिकारों के लिए भारत में काम कर रहे भारत में काफी असुरित है, उन्हें परेशान किया जा रहा है, उन्हें सरकार सुरक्षा नहीं दे रही है। अल हुसैन ने ना सिर्फ भारत बल्कि पाकिस्तान की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा जम्मू कश्मीर में एलओसी पर दोनों देशों की ओर से किसी भी तरह का सहयोग नहीं किया जा रहा है। हालांकि भारत की ओर से अल हुसैन के इस बयान पर किसी भी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
गोरक्षा के नाम पर हो रहा है हमला
अल हुसैन ने कहा कि भारत में जिस तरह से धर्म और अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता फैली है उससे मैं काफी निराश हूं। जिस तरह से मौजूदा समय में हिंसा फैली हुई है, और गोरक्षा के लिए लोगों पर भीड़ हमला कर रही है वह काफी चिंताजनक है। हुसैन ने कहा कि जो लोग अपने मौलिक मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, उनपर हमला किया जा रहा है, उन्होंने बेंगलुरू में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि वह हमेशा से संप्रदायवाद और नफरत के खिलाफ आवाज उठाती रही थीं।
विरोध प्रदर्शन पर जताया संतोष
जिस तरह से गौरी लंकेश की हत्या के बाद लोग सड़कों पर उतरे और इसका विरोध किया उसपर अल हुसैन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जिस तरह से गौरी लंकेश की हत्या और अन्य घटनाओं के बाद लोगों ने प्रदर्शन किया है वह संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि जो लोग मानवीय हितों के लिए काम कर रहे हैं, जिसमे सरदार सरोवर डैम भी शामिल है, उन्हें शोषित किया गया, उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई।












Click it and Unblock the Notifications