संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत की स्थायी सदस्यता का रास्ता साफ, सुधार के दस्तावेज मंजूर
न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सुरक्षा परिषद के सुधार से संबंधित दस्तावेजों को मंजूर कर लिया है। इसके साथ ही अब संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत की स्थायी सदस्यता की एक बड़ी रुकावट दूर हो गई। भारत ने इस दस्तावेज को मंजूर किए जाने का स्वागत किया है।

विदेश मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी एक बयान में कहा गया, दो दशक से भी अधिक समय के विचार विमर्श के बाद यह एक महत्वपूर्ण प्रगति है। हम अब पाठ आधारित वार्ता शुरू कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों की सर्वसम्मति इस मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के व्यापक समर्थन को दर्शाती है।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा का 70वां सत्र मंगलवार से शुरू हो रहा है। इससे पहले यह उपलब्धि भारत के लिए काफी खास है। भारत ने दस्तावेज की मंजूरी को 'ऐतिहासिक' और 'अग्रणी' करार दिया।
भारत ने कहा, यह फैसला अंतर सरकारी प्रक्रिया को औपचारिक रूप से एक 'अपरिवर्तनीय पाठ आधारित समझौते की राह' पर आगे बढ़ाता है। इसने सुरक्षा परिषद में सुधारों को हासिल करने संबंधी वार्ता की 'गति' को बदल दिया है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष सैम कुटेसा ने सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़े मामलों पर मसौदा फैसले के लिए एक पूर्ण अधिवेशन बुलाया था। इसमें सुरक्षा परिषद की सदस्यता में बढ़ोतरी और इसमें बराबरी पर आधारित प्रतिनिधित्व देने के मुद्दों पर चर्चा होनी थी।
अधिवेशन के दौरान उन्होंने रूस, अमेरिका और चीन सहित प्रमुख देशों की स्थिति पेश करते हुए पत्र भी वितरित किए जिन्होंने विचार दस्तावेज में योगदान करने से इंकार कर दिया।
महासभा के 70वें सत्र में पाठ आधारित सुरक्षा परिषद सुधार जारी रखने पर मतविभाजन नहीं हुआ और पाठ को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। पाठ में सुरक्षा परिषद सुधारों पर संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की स्थिति पेश की गई है।
इसमें सुझाव पेश किया गया है कि स्थायी और अस्थायी श्रेणियों में 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद का किस तरह विस्तार किया जाए।
अंतर सरकारी वार्ता प्रक्रिया के सिलसिले में सात साल में यह पहला मौका है जब कोई पाठ तैयार हुआ है। अभी तक बिना किसी पाठ के वार्ता होती रही है। महासभा का 69वां सत्र मंगलवार को समाप्त हो रहा है।
कुटेसा द्वारा प्रस्तुत पाठ 70वें सत्र में चर्चा के लिए अग्रसारित किया जाएगा। यह सुरक्षा परिषद के सुधार पर अंतर सरकारी वार्ताओं का आधार होगा।












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