कौन हैं चेचेन? इसके 10,000 से ज्यादा खूंखार लड़ाकों को पुतिन ने भेजा है यूक्रेन
कीव, 28 फरवरी: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने यूं ही नहीं कहा है कि रूस में उनके समकक्ष व्लादिमीर पुतिन इस जंग के बहाने उन्हें ही निशाना बनाना चाहते हैं। क्योंकि, कम से 10,000 खूंखार चेचेन लड़ाके रूसी सेना की मदद करने के लिए यूक्रेन में दाखिल हुए हैं। इसकी पुष्टि खुद चेचन्या के प्रधानमंत्री रमजान कादिरोव ही कर चुके हैं। जिनके सैनिक अपनी क्रूरता और बर्बरता के लिए दुनियाभर में कुख्यात हैं। चेचन्या और रूस के बीच अपनी ऐतिहासिक अदावत भी रही है, लेकिन इस समय चेचन्या की सरकार एक तरह से पुतिन के हुक्म की तामील करने के लिए तैयार बैठी है।

पुतिन के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं चेचन्या के पीएम कादिरोव
चेचन्या के प्रधानमंत्री रमजान कादिरोव ने पिछले शुक्रवार को ही इस खबर की पुष्टि की थी कि यूक्रेन में रूसी आक्रमण के समर्थन के लिए चेचेन लड़ाकों को भी भेजा जाएगा। कादिरोव ने एक वीडियो संदेश के जरिए यूक्रेन में रूसी हमले को सही 'फैसला' बताते हुए कहा था कि उसके लड़ाके 'किसी भी परिस्थिति' में पुतिन के आदेशों की तामील के लिए तैयार होंगे। कादिरोव रूसी सरकार के बहुत बड़े समर्थक माने जाते हैं और खुद को रूस का 'पैदल सैनिक' कहते हैं। कादिरोव दूसरे चेचेन युद्ध के बाद चेचन्या रिपब्लिक के पहले राष्ट्रपति बने अखमद कादिरोव के बेटे हैं। 2007 में बम हमले में पिता की मौत के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उनके बेटे रमजान को उनका उत्तराधिकारी चुना था और तब से वह चेचन्या पर शासन कर रहे हैं। इसलिए पुतिन के कहने पर किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहते हैं।

कौन हैं चेचेन?
चेचेन कई जातीय समूहों में से एक हैं, जो हजारों साल से उत्तरी काकेशस के ऊंचे इलाकों में रहते आए हैं। इनके आधुनिक इतिहास का ज्यादातर हिस्सा उनकी स्वतंत्रता और स्वायत्तता की इच्छा से जुड़ा रहा है। 1917 की रूसी क्रांति के दौरान विभिन्न जातीय समूहों ने रूस से स्वतंत्रता की घोषणा की, जिनमें अधिकतर मुसलमान थे। दुनिया के कई देशों ने उन्हें उत्तरी काकेशस के संयुक्त पर्वतीय निवासी के तौर पर मान्यता भी दे दी। लेकिन, सोवियत संघ ने उसपर आक्रमण कर दिया और चेचेनो-इंगुश ऑटोनोमस सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक की स्थापना हुई। इससे जोसेफ स्टालिन को यह घोषणा करने का मौका मिला कि सभी चेचेन लोगों को यह इलाका छोड़ना होगा और उन्हें 'पुनर्वास' के नाम पर साइबेरिया भेज दिया गया। कुछ इतिहासकारों का अनुमान है कि इस तानाशाही फरमान की तामील के दौरान इनकी आधी आबादी नष्ट हो गई। वर्षों बाद चेचेन लोगों को उनकी अपनी मातृभूमि पर लौटने की फिर से अनुमति दी गई। यूरोपीय संघ ने हाल ही में उनके निर्वासन को नरसंहार की संज्ञा दी है।

चेचन्या कब आजाद हुआ ?
1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तब चेचेन गणराज्य की स्थापना हुई। इसकी आजादी के लिए लोगों ने लंबा संघर्ष किया है। इसकी वजह से चेचन्या के नागरिकों और रूस में एक दरार पैदा हो गई और इसपर 1994 में फिर से हमला कर दिया गया। इसकी वजह से पहला चेचन्या युद्ध शुरू हुआ और चेचेन गणराज्य ने रूसी सेना को हराकर 1995 में फिर से आजाद हासिल कर ली। कुछ सालों बाद रूस ने फिर से हमला किया और इसे अपने नियंत्रण में ले लिया और इसकी सीमाएं अपने साथ मिला लीं। रूस की दलील थी कि चेचन्या के आतंकी उसके रिहायशी इलाकों पर कई बम धमाका कर चुके हैं। 2009 के बाद रूस को लगा कि घरेलू आतंकवाद का खतरा खत्म हो चुका है। हालांकि, इलाके में विद्रोह की घटनाएं बरकरार रहीं। कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठनों का अनुमान है कि दूसरे चेचन्या युद्ध में 15,000 से 25,000 के बीच में नागरिक मारे गए थे।

खूंखार चेचेन लड़ाकों यूक्रेन भेजने के मायने क्या हैं ?
चेचन्या के प्रधानमंत्री ने खुद ही करीब 10,000 जवानों को रूसी सेना की मदद के लिए यूक्रेन भेजने की घोषणा की है। फॉरन पॉलिसी के मुताबिक रूस की सरकारी टीवी ने इनके बारे में कहा है कि 'इसके पीछे मकसद ये है कि चेचेन विशेष रूप से उग्र और निर्दयी होते हैं।' जानकारों का दावा है कि यह सब कहना क्रेमलिन के प्रोपेगेंडा का हिस्सा है ताकि यूक्रेन के सैनिकों को दबाव में लाकर सरेंडर करने को मजबूर किया जा सके, जिसके बारे में पुतिन का दांव अभी तक उलटा पड़ा है।

यूक्रेन में चेचेन लड़ाकों के साथ क्या हो रहा ?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने दावा किया है कि उसका साथ देने के लिए 10,000 और 70,000 के बीच चेचेन सैनिक पहुंच चुके हैं, लेकिन इस मामले के जानकारों का कहना है कि यह दावा 'अनुमान से ज्यादा है।' यही नहीं चेचन्या के पीएम कादिरोव ने दावा किया है कि इस जंग में एक भी चेचेन लड़ाका नहीं मारा गया है, लेकिन डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की हत्या के मकसद से भेजे गए खूंखार चेचेन स्पेशल फोर्स की एक बड़ी टुकड़ी को यूक्रेन की सेना ने मार गिराया है। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस फोर्स को मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए कुख्यात ठहरा चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की मिसाइल ने चेचेन लड़ाकों के 56 टैंकों के दस्ते को कीव के नजदीक ही होस्टोमेल के नजदीक तबाह कर दिया। (पहली चारों तस्वीरें- फाइल)












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