ब्रिटेन में PM सुनक पर मंडरा रहा इस्तीफे का खतरा, रवाडां बिल को लेकर पार्टी में फूट, क्यों नाराज हुए साथी?

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनके सामने कई तरह की मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। एक तरफ उन्हें कोरोना नियमों के उल्लंघन के मामले में पेश होना है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें रवांडा बिल को लेकर अपने पार्टी के सासंदों को एकजुट रखना है।

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री बनने के ठीक एक साल बाद, ऋषि सुनक अपने अधिकार को बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि उनकी कंजर्वेटिव पार्टी के नेता उनकी प्रमुख शरण नीति के खिलाफ मतदान करने की धमकी दे रहे हैं।

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ब्रिटिश संसद में शरणार्थी मुद्दे पर मंगलवार को पहला मतदान होने जा रहा है। सुनक ने दावा किया है कि ये अवैध प्रवासियों को लेकर अब तक का सबसे कठोर कानून है। इस कानून के तहत अवैध अप्रवासियों को लेकर कानूनी चुनौतियों को समाप्त कर न्यायधीशों की शक्तियों को कमजोर कर दिया गया है जबकि अधिकांश शक्तियां संसद को दे दी गई हैं।

हालांकि सुनक की पार्टी कंजरवेटिव पार्टी के बड़े नेता जो हैं सुएला ब्रेवरमैन, लिज ट्रस इसे बेहद कमजोर कानून बता रहे हैं। अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर नरम रुख अपनाने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, कंजरवेटिव पार्टी के कुछ नेता इसे शरणार्थियों के प्रति अत्याचार करार दे रहे हैं।

ब्रिटेन की कमजोर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए संघर्ष कर रहे और जनमत सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी से काफी पीछे चल रहे सुनक के लिए, रवांडा नीति उनकी सरकार के लिए निर्णायक मुद्दा बन गई है।

भले ही तमाम विशेषज्ञ सुनक सरकार को आगाह कर रहे हैं कि यह काम नहीं करेगा, सुनक इसे अगले साल होने वाले चुनाव से पहले अमल में लाना चाहते हैं। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में राजनीति के प्रोफेसर टोनी ट्रैवर्स ने कहा, "रवांडा नीति ने एक संघर्ष का रूप ले लिया है और इसने कंजर्वेटिव पार्टी के गुटों को अपना सर्वव्यापी युद्ध जारी रखने के लिए स्वतंत्र कर दिया है।"

इससे पहले जून में, अपील अदालत ने अप्रावासियों को रवांडा भेजने की यूके सरकार की योजना को गैरकानूनी बताया था। अदालत का मानना था कि रवांडा एक सुरक्षित देश नहीं है और वहां पर शरणार्थियों को खतरे का सामना करना पड़ सकता है जो ब्रिटिश और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा।

सरकार ने इस योजना पर लगभग सवा अरब पाउंड खर्च किए हैं। ब्रिटिश सरकार को उम्मीद है कि उनकी रवांडा नीति अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान, इराक आदि देशों से आने वाले हजारों लोगों को अवैध तरीके से ब्रिटेन आने से रोक देगा।

रवांडा प्लान फेल हुआ तो क्या करेंगे सुनक?

मंगलवार को सुनक यदि रवांडा प्लान को पास नहीं करा पाते हैं तो उन्हें पार्टी में ही विरोध का सामना करना पड़ेगा। हालांकि सुनक ने रवांडा बिल को सदन में रखने से पहले पार्टी के चेयरमैन रिचर्ड होल्डन को अपने पक्ष में कर लिया है। होल्डन का कहना है कि साल भर बाद होने वाले चुनाव से पहले सुनक को हटाना, पार्टी के लिए आत्मघाती कदम साबित होगा।

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