UK Election: लोकसभा चुनाव से पहले ऋषि सुनक की पार्टी में भगदड़, क्या बुरी तरह से हार जाएगी कंजर्वेटिव पार्टी?

UK Election Rishi Sunak: ब्रिटेन में 4 जुलाई को होने वाले आम चुनाव से पहले, प्रधान मंत्री ऋषि सुनक के लिए चुनावी रास्ता लगातार मुश्किल होता जा रहा है और चुनाव से पहले उनकी पार्टी के सांसदों में भगदड़ मच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लोकसभा चुनाव से पहले ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी के कई वरिष्ठ सांसदों ने पार्टी छोड़ना शुरू कर दिया है, जिससे पिछले कई दशकों में कंजर्वेटिव पार्टी के लिए ये सबसे खराब स्थिति बन गई है और विपक्षी लेबर पार्टी से हार का खतरा काफी ज्यादा मंडराने लगा है।

UK Election Rishi Sunak

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक ऋषि सुनक की पार्टी के 78 सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं और उन्होंने फिर से चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। माना जा रहा है, कि इन सांसदों को 4 जुलाई को होने वाले इलेक्शन में बुरी तरह से हार का डर सता रहा है, इसीलिए उन्होंने चुनाव से दूरी बना ली है। लिहाजा, ऋषि सुनक की पार्टी की सत्ता में वापसी की संभावना अब काफी कम हो गई है।

ऋषि सुनक के सांसदों में क्यों फैला डर?

कैबिनेट मंत्री माइकल गोव और एंड्रिया लेडसम, वो सबसे नये सांसद हैं, जिन्होंने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। 14 साल तक सत्ता में रहने के बाद कंजर्वेटिव सांसदों के लिए मजबूत सत्ता विरोधी लहर की आशंका के बीच गोव की घोषणा आई है।

वहीं एंड्रिया लेडसम ने एक बयान जारी कर जानकारी दी है, कि उन्होंने प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को अपने चुनाव नहीं लड़ने के बारे में बता दिया है।

उन्होंने कहा, "राजनीति में कोई भी सिपाही नहीं है। हम स्वयंसेवक हैं जो स्वेच्छा से अपना भाग्य चुनते हैं। और सेवा करने का मौका अद्भुत है। लेकिन एक वक्त आता है, जब आप जानते हैं, कि अब यह जाने का समय है। नई पीढ़ी को नेतृत्व करना चाहिए।"

गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, एंड्रिया लेडसम के चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा के बाद अब चुनाव से दूरी बनाने वाले सांसदों की संख्या 78 हो गई है, जिसने 1997 के पिछले 72 के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है।

बड़े-बड़े नेता चुनावी मैदान से भागे

पूर्व प्रधानमंत्री थेरेसा मे और पूर्व रक्षा मंत्री बेन वालेस जैसे दिग्गज भी चुनावी मैदान से पलायन कर चुके हैं। वहीं, सांसदों के बीच मची भगदड़ के बीच ऋषि सुनक ने चुनाव प्रचार छोड़कर 'एक दिन की छुट्टी' ली और अपने निर्वाचन क्षेत्र को छोड़कर लंदन स्थित घर जाकर अपने करीबी सलाहकारों के साथ चर्चा करने के लिए भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, एक दिन की छुट्टी लेकर ऋषि सुनक अपने चुनाव प्रचार अभियान को रीसेट करना चाह रहे थे, जिसे ब्रिटिश पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स ने हास्यास्पद बताया है। जबकि, चुनाव अभियान से जुड़े एक संचालक ने कहा है, कि "प्रधानमंत्री आम तौर पर चुनावी घोषणा होने के पहले वीकेंड में सलाहकारों से बात करने के लिए घर पर वक्त नहीं बिताते।"

दूसरी तरफ ऐसी रिपोर्ट है, कि ऋषि सुनक के मुख्य प्रतिद्वंदी और लेबर पार्टी के नेता कीर स्टार्मर अपने चुनावी अभियान में इस मुद्दे को तूल देने वाले हैं। वहीं, उनका चुनावी अभियान इस बात पर केन्द्रित है, कि कंजर्वेटिव पार्टी ने कैसे देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है।

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कंजर्वेटिव पार्टी में ऋषि सुनक को किससे चुनौती?

ब्रिटेन की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों में एक ऋषि सुनक की कंजर्वेटिव पार्टी है और दूसरी कीर स्टार्मर की लेबर पार्टी। कंजर्वेटिव पार्टी लगातार 14 सालों से सत्ता में है, और पिछले 2 सालों से पार्टी राजनीतिक तूफानों से जूझ रही है और 2 सांसदों को इस्तीफा तक देना पड़ा है, जिससे देश के अंदर काफी नाराजगी देखी जा रही है।

हालांकि, अपने करीब एक साल के कार्यकाल में ऋषि सुनक ने देश की अर्थव्यवस्था को बहुत हद तक पटरी पर ला दिया है, लेकिन वो पार्टी के अंदर मचे भूचाल को संभालने में नाकाम रहे हैं।

जब प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बुधवार को मध्यावधि आम चुनाव की घोषणा की, को उससे पहले YouGov जनमत सर्वेक्षण में लेबर पार्टी की बढ़त तीन अंक कम हो गई थी। हालांकि, लेबर अभी भी काफी मजबूत स्थिति में है और कंजर्वेटिव पार्टी से 20 से ज्यादा अंकों से आगे है। अर्थव्यवस्था, आप्रवासन और स्वास्थ्य देखभाल के मुद्दों ने कंजर्वेटिव पार्टी को काफी नुकसान पहुंचाया है।

ऋषि सुनक ने जब प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली थी, तो देश आर्थिक संकट में फंसा हुआ था और उन्होंने ब्रिटेन को आर्थिक मंदी से बाहर निकाला, जिससे पार्टी थोड़ी बहुत संभली है, लेकिन वो जनता की नाराजगी दूर करने के लिए काफी नहीं है।

ब्रिटिश पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अकर कंजर्वेटिव पार्टी आम चुनाव हार जाती है, तो बहुत ज्यादा संभावना इस बात को लेकर है, कि ऋषि सुनक पार्टी की अध्यक्षता छोड़ देंगे और उनकी जगह कोई और नेता, पार्टी की बागडोर संभालेगा। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि बहुत ज्यादा संभावना इस बात को लेकर है, कि कंजर्वेटिव पार्टी दिशाहीन हो सकती है और उसमें टूट का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाएगा। पार्टी पहले ही कई बड़े नेताओं की वजह से अलग अलग खेमों में बंट चुकी है।

माना जा रहा है, कि पेनी मोर्डौंट, सुएला ब्रेवरमैन, केमी बेडनोच, जेम्स क्लीवर्ली, प्रीति पटेल जैसे नेता पार्टी की अध्यक्षता संभालने के लिए रेस में हैं, हालांकि इन सभी नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर ऋषि सुन का स्थान लेने की बात से इनकार कर दिया है।

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