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Turkiye की संसद में जमकर चले लात-घूंसे, सांसदों ने एक-दूजे पर नहीं खाया रहम, सीढ़ियों पर फैला खून- Video

Turkiye की संसद में सांसदों के बीच में जमकर लात-घूंसे चले। दरअसल ये तब हुआ जब कैबिनेट फेरबदल के तहत विवादास्पद न्यायिक मंत्री की नियुक्ति की गई। सत्ताधारी दल और विपक्षी दलों के सांसद आमने-सामने आ गए। विपक्षी सांसदों ने इस्तांबुल के मुख्य अभियोजक अकिन गुरलेक को पद की शपथ लेने से रोकने की कोशिश की। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सांसद एक-दूसरे को धक्का देते और मुक्के मारते नजर आए। संसद का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। आखिरकार अकिन गुरलेक ने सत्ताधारी दल के सांसदों से घिरे हुए शपथ ली।

एर्दोगन के फैसले से मचा बवाल

इसी कैबिनेट फेरबदल में राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने पूर्वी एरज़ुरम प्रांत के गवर्नर मुस्तफा सिफ्टसी को नया आंतरिक मंत्री नियुक्त किया। इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में और हलचल बढ़ा दी। हालांकि सरकार की ओर से फेरबदल की वजह पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया।

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अकिन गुरलेक क्यों हैं विवादों में?

अकिन गुरलेक पहले इस्तांबुल के मुख्य अभियोजक (Prime Prosecutor) रह चुके हैं। उन्होंने मुख्य विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (CHP) के कई बड़े नेताओं और सदस्यों के खिलाफ हाई-प्रोफाइल मुकदमों की अध्यक्षता की थी। विपक्ष का आरोप है कि ये मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित थे और सरकार विरोधी नेताओं को दबाने के लिए चलाए गए। यही कारण है कि उनकी नियुक्ति को लेकर संसद में इतना विरोध देखने को मिला।

अधिकारियों की गिरफ्तारी और राजनीति

सीएचपी द्वारा शासित नगरपालिकाओं के सैकड़ों अधिकारियों को भ्रष्टाचार जांच के तहत गिरफ्तार किया गया है। इन गिरफ्तारियों को लेकर भी विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साधता रहा है। विपक्ष का कहना है कि ये कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है।

इमामोग्लू की गिरफ्तारी और सियासी असर

इस्तांबुल के मेयर एकरेम इमामोग्लू, जिन्हें राष्ट्रपति एर्दोगन का प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना जाता है, को पिछले साल गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी ने तुर्की की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश बताया था।

फेरबदल की आधिकारिक वजह क्या है?

सरकार ने कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक कारण नहीं बताया है। हालांकि आधिकारिक गजट में कहा गया कि निवर्तमान मंत्रियों ने 'अपने कर्तव्यों से मुक्त होने का अनुरोध किया' था। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मौजूदा हालात से जोड़कर देख रहे हैं।

संवैधानिक सुधार और PKK से शांति पहल

यह नियुक्तियां ऐसे समय में हुई हैं जब तुर्की सरकार संवैधानिक सुधारों पर विचार कर रही है। साथ ही, सरकार दशकों पुराने तनाव को खत्म करने के लिए आतंकवादी संगठन PKK के साथ शांति पहल पर भी काम कर रही है। इन सुधारों को संसद से पारित कराए जाने की उम्मीद है। ऐसे में संसद के भीतर बढ़ता टकराव आने वाले दिनों में तुर्की की राजनीति को और गर्म कर सकता है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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