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पाकिस्तान में फिर बालाकोट जैसा स्ट्राइक नहीं होने देगा तुर्की? भारत के दो दुश्मनों के नये प्रोजेक्ट को जानिए

Pakistan-Turkey News: कहते हैं, दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है और तुर्की और पाकिस्तान के नये प्रोजेक्ट को देखकर यही महसूस भी होता है।

अपनी वायुसेना का अत्याधुनिक बनाने के लिए भारत ने फ्रांस से राफेल फाइटर जेट खरीदा है, जबकि भारतीय वायुसेना स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस MK1A का भी अधिग्रहण कर चुकी है, जिसने पाकिस्तान की वायुसेना को खौफ में डाल दिया है, लिहाजा पाकिस्तान ने तुर्की से हाथ मिला लिए हैं।

Pakistan Air Force news

पाकिस्तान वायु सेना (Pakistan Air force) अपने अकेले बॉम्बार्डियर ग्लोबल 6000 को स्टैंड-ऑफ में बदलने के लिए कमर कस रही है। तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (टीएआई) की मदद से अब इस विमान को स्टैंड-ऑफ जैमिंग एयरक्राफ्ट (SOJ) में बदल जाएगा।

भारत के एयरपावर का विकल्प चाहता है पाकिस्तान

पाकिस्तान ने साल 2022 में बॉम्बार्डियर ग्लोबल 6000 को अपने बेड़े में VIP कामकाजों के लिए शामिल किया था, लेकिन अब ये एयरक्राफ्ट स्पेशल मिशनों को अंजाम देने के लिए काम करेगा। भारत ने साल 2019 में सीमा पार जाकर बालाकोट में घुसकर एयरस्ट्राइक किया था और भारत के 'ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट' के बाद से ही पाकिस्तान किसी स्पेशल एयरक्राफ्ट की तलाश में था।

Quwa की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी एयरफोर्स का मानना है, कि अगर वो भविष्य में भारत में घुसपैठ करने की कोशिश करता है, तो उसे भारतीय एस-400 मिसाइल का सामना करना होगा। दूसरी तरफ, इंडियन एयरफोर्स ने LCA Mk1A के लिए एक बड़ा ऑर्डर दिया है, और ये फाइटर जेट "एक सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्कैन किए गए एरे (AESA) और EW/ECM सुइट के साथ कॉन्फ़िगर किया गया एक फुर्तीला और अत्यधिक गतिशील हल्का लड़ाकू विमान है, जो अगले कुछ सालों में पुराने हो चुके मिग -21 बाइसन को पूरी तरह से बदल देगा।"

रिपोर्ट में कहा गया है, " LCA Mk1A, ना सिर्फ मिग-21 से कहीं बेहतर प्रदर्शन करेगा, बल्कि यह सीमा पार करने वाले किसी भी पीएएफ लड़ाकू विमान के लिए सबसे बड़ा खतरा भी होगा, जिसमें नए शामिल जे-10सीई या बेशकीमती एफ-16 ब्लॉक-52 भी शामिल हैं।"

Pakistan Air Force news

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है, कि "इसके अलावा, इंडियन एयरफोर्स के पास डसॉल्ट राफेल, एडवांस सुखोई Su-30MKI और एडवांस मध्यम दूरी और लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (SAM) की एक सीरिज भी है, लिहाजा पाकिस्तानी एयरफोर्स के पास भी ऐसे जेट्स चाहिए, जो भारत को अपना दम दिखा सके।

लिहाजा, पहला संकेत यह है, कि पाकिस्तानी एयरफोर्स का इरादा अपने लेटेस्ट ग्लोबल 6000 को एक विशेष मिशन विमान में बदल दे। पीएएफ के अनऑफिशियल पब्लिकेशन 'सेकेंड-टू-नॉन' ने इन योजनाओं की पुष्टि की है।

पाकिस्तान ने बॉम्बार्डियर ग्लोबल 6000 को स्टैंड-ऑफ जैमिंग एयरक्राफ्ट (SOJ) में बदलने का फैसला, पाकिस्तानी एयरफोर्स को ये अहसास होने के बाद लिया गया है, कि भारत ने ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया था।

बालाकोट से पाकिस्तान से सीखा सबक

भारत ने जिस रफ्तार से बालाकोट में एयरस्ट्राइक किया था, उसने पाकिस्तान की कमियों को जगजाहिर कर दिया था। 2019 से पहले पाकिस्तान लगातार दावे करता था, कि परमाणु युद्ध की स्थिति में वो भारत के हमले को रोक देगा, लेकिन बालाकोट ने पाकिस्तान के उस भ्रम को भी साफ कर दिया।

बालाकोट के बाद पाकिस्तान को अहसास हुआ, कि सिर्फ परमाणु बम ही भारत को रोकने के लिए काफी नहीं हैं और फिर उसने समुद्री क्षमता बढ़ाने, एयर पावर बढ़ाने के साथ साथ पारंपरिक हथियारों में निवेश करना शुरू किया है और आर्थिक संकट के बावजूद पाकिस्तान ऐसा कर रहा है।

पाकिस्तान एयरफोर्स ने तीन फैक्टर्स से सबक सीखा है और अपने बेड़े को एडवांस करने का फैसला किया है। ये तीन फैक्टर्स हैं, 1- बालाकोट एयरस्ट्राइक, 2- रूस-यूक्रेन युद्ध और 3- चीन और पारिस्तान के पास लगातार बढ़ती एडवांस टेक्नोलॉजी।

चीन और तुर्की, जो पाकिस्तान के दोस्त हैं, पाकिस्तान एयरफोर्स इसका फायदा उठाना चाहती है।

ग्लोबल 6000 को ट्रांसफॉर्म करने से क्या होगा?

इसी को देखते हुए तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (टीएआई) को ग्लोबल 6000 को ट्रांसफॉर्म करने के लिए शामिल किया गया है। माना जा रहा है, कि पाकिस्तानी एयरफोर्स, HAVSOJ suite का अधिग्रहण करेगी, जिसका इस्तेमाल तुर्की, तुर्की वायु सेना के लिए अपने चार ग्लोबल 6000 को कॉन्फ़िगर करने के लिए करता है। Aselsan HAVASOJ तीन मुख्य इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर मिशनों के लिए सुसज्जित है: रडार जैमिंग, कम्युनिकेशन जैमिंग, और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT)।

रडार जैमिंग के लिए, HAVASOJ ट्रांससीवर्स का इस्तेमाल दुश्मन के राडार को जाम करने के लिए उनकी ट्रांसमिशन फ्रीक्वेंसी को रिकॉर्ड करके और उसी सिग्नल का इस्तेमाल करके उन्हें फिर से प्रसारित करके करता है। इस क्षमता को हासिल करने में मदद के लिए HAVASOJ डिजिटल रडार फ़्रीक्वेंसी मेमोरी (DRFM) सिस्टम से लैस है।

वहीं, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस (ELINT) की भूमिका में, HAVASOJ सभी दुश्मन रडार और कम्युनिकेश ट्रांसमिशन के लिए एक क्षेत्र की निगरानी करेगा। यह उस जानकारी को 'खतरे की लाइब्रेरी' में रिकॉर्ड करेगा, जो बाद में इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेशर्स (ईसीएम) कार्यों, अर्थात् रडार और संचार जैमिंग को फीड करेगा।

हालांकि, पाकिस्तानी एयरफोर्स ने अभी तक Aselsan HAVASOJ को अंतिम तौर पर फाइनल नहीं किया है, जिससे संभावना है, कि कुछ और विक्रेता भी मैदान में उतर सकते हैं, लेकिन पाकिस्तानी वायुसेना को लगता है, तुर्की के साथ काम करना उसके लिए अनुकूल होगा।

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