भूकंप से भूकंप तक: एक कयामत के बाद राष्ट्रपति बने अर्दोगान की सत्ता भी क्या कयामत ही छीन लेगी?
तुर्की में पहले कोर्ट समेत जितनी भी स्वतंत्र संस्थाएं थीं, अब वो राष्ट्रपति अर्दोआन के कंट्रोल में है और उनके ऊपर अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इन हथियारों का इस्तेमाल करने के आरोप लगते रहते हैं।

Turkey News: तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन आज से करीब 20 साल पहले सत्ता में आए थे और सत्ता में उनकी एंट्री उस भीषण भूकंप के बाद हुई थी, जिसने पिछली सरकार की नाकामी को सतह पर ला दिया था। 1999 में आए भीषण भूकंप ने तुर्की की जनता में आक्रोश की लहर भर दी थी और उस आक्रोश की सवारी पर सवार होकर रेचेप तैयर अर्दोआन देश के प्रमुख पद पर तैनात हो गये। लेकिन, वक्त का पहिया आगे बढ़ता गया और अर्दोआन का विजयी रथ घूमते हुए फिर से भूकंप के बर्बाद हुए शहरों के किनारे आ गये हैं, जहां के कराहते लोग अब अर्दोआन से पूछ रहे हैं, कि क्या आपका इंतजाम यही था?

भूकंप से भूकंप तक...
तुर्की में ये विनाशकारी भूकंप उस वक्त आया है, जब देश आज से करीब 3 महीने बाद आम चुनाव के लिए वोट डालने वाला है। अर्दोआन एक बार फिर से राष्ट्रपति चुनाव की रेस में सबसे आगे जरूर हैं, लेकिन इस बार उनके आगे पांच विपक्षी पार्टियों का एक मजबूत गठबंधन मुकाबले के लिए खड़ा है। अर्दोआन 20 सालों से सत्ता में जमें हैं, लिहाजा पब्लिक का मिजाज भी उनके कामों को टटोल रहा है, लिहाजा अर्दोआन का राजनीतिक भविष्य इस बात पर टिका हो सकता है, कि जनता की विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के प्रति अर्दोआन सरकार को लेकर कैसा प्रतिक्रिया दिखाती है? वाशिंगटन इंस्टीट्यूट में तुर्की के विशेषज्ञ और कई किताबों के लेखक सोनर कैगप्टे ने कहा, कि "अर्दोआन के लिए यह एक बड़ी चुनौती होने जा रही है, जिन्होंने खुद के लिए एक निरंकुश नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई है, लेकिन वो एक कुशल व्यक्ति के तौर पर भी अपनी पहचान रखते हैं, जो काम करने वाले व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है।"

2002 में सत्ता में आए थे अर्दोआन
तुर्की में ऐसा ही विनाशकारी भूकंप 1999 में आया था और उसके तीन सालों के बाद देश में आम चुनाव करवाए गये थे। लेकिन, उस समय तुर्की एक वित्तीय संकट के बीच में घिरा था, जो उसकी अर्थव्यवस्था को दंडित कर रहा था और उसका जबरदस्त फायदा अर्दोआन को मिला था। आज, आसमान छूती महंगाई से तुर्की की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो रहा है, और अर्दोआन को समस्या से निपटने के लिए व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, जिसने लाखों गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को गुज़ारा करने के लिए संघर्ष करना छोड़ दिया है।
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अब विपक्ष हो रहा है हावी
भूकंप की भीषण तबाही के बीच तुर्की में राजनीति भी तेज हो गई है और अर्दोआन के विरोधियों ने भूकंप को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया की तेज आलोचना करनी शुरू कर दी है। विपक्षी पार्टियों का कहना है, कि पिछले दो दशक से अर्दोआन देश की सत्ता के केन्द्र में हैं, लेकिन उनकी सरकार ने भूकंप आने के बाद कैसे मेक्सिमम राहत पहुंचाई जाए, इसको लेकर काम नहीं किया और यही वजह से है, कि सरकार की प्रतिक्रिया में काफी देर हुई, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। भूकंप विशेषज्ञ इस हफ्ते के भूकंप के इतने घातक होने का एक प्रमुख कारण बिल्डिंग निर्माण में सही मानदंडों का पालन नहीं करने की तरफ इशारा करते हैं।

अर्दोआन के खिलाफ विपक्ष की दिक्कतें
विपक्ष के पास दिक्कत ये है, कि अब जब चुनाव के 100 दिन भी नहीं बचे हैं, तब भी अर्दोआन के खिलाफ विपक्षी गठबंधन की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार कौन होगा, इसका फैसला नहीं हो पाया है। पांच पार्टियों का विपक्षी गठबंधन किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो पाया है, जो विपक्ष की कमजोरी को दर्शाता है। तुर्की की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है, कि 1999 में आए भूकंप के बाद दिवंगत प्रधानमंत्री बुलेंट एसेविट का जिस तरह से विरोध किया गया था, उसे अब अर्दोआन को याद करना चाहिए, उन्हें उस बात को दिमाग में रखनी चाहिए, क्योंकि उस वक्त प्रधानमंत्री बुलेंट एसेविट भी उन्हीं दिक्कतों का सामना कर रहे थे, जो आज अर्दोआन कर रहे हैं और विपक्ष आज अर्दोआन पर उसी तरह से हमलावर है, जिस तरह से अर्दोआन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री बुलेंट एसेविट की आलोचना की थी। 6 फरवरी को आए 7.8 तीव्रता के भूकंप के नौ घंटे बाद एक और शक्तिशाली भूकंप आया था और दोनों भूकंप को मिलाकर तुर्की और सीरिया 24,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

तुर्की के कई हिस्से हो चुके हैं तबाह
दक्षिण-पूर्व में 10 प्रांतों को प्रभावित करते हुए भूकंप के बाद की तबाही, तुर्की के एक व्यापक क्षेत्र में फैल गई है, और भूकंप के बाद फौरन राहत और बचाव कार्य को शुरू किया जाना था। लेकिन, तुर्की सरकार तत्काल प्रतिक्रिया देने में नाकाम रही है। हालांकि, बाद में घरेलू और विदेशी राहत बचाव कर्मियों की कई टीमें पहुंच गईं, जो लगातार लोगों को बचाने का काम कर रहे हैं। भूकंप के बाद पहले कुछ दिनों में, तुर्की टेलीविजन और सोशल मीडिया ने लोगों को ठंड की स्थिति में मलबे के ढेर के पास असहाय रूप से इंतजार करते हुए देखा और कड़ाके की ठंड में बचावकर्मियों को भी लाचार होते हुए देखा। वहीं, सोनर कैगप्टे ने कहा, "हमें अभी भी राहत प्रयासों के परिणाम देखना होगा, क्या तापमान शून्य से नीचे रहता है, तो फिर हताहतों की संख्या में और वृद्धि होती रहेगी और क्या चलकर अंतर्राष्ट्रीय मदद पर कोई असर पड़ेगा? इस हफ्ते भूकंप प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए अर्दोआन ने शुरूआती चरणों में कुछ कमियों को स्वीकार भी किया, लेकिन उन्होंने ये भी कहा, कि स्थिति पर पूरी तरह से नियंत्रण में है। लेकिन, लोगों का गुस्सा हर बीतते वक्त के साथ बढ़ता जा रहा है और इस गुस्से का अंजाम अर्दोआन को भुगतना पड़ सकता है।

तो क्या भूकंप छीन लेगी अर्दोआन की सत्ता?
हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में लंदन में ब्लूबे एसेट मैनेजमेंट के एक विश्लेषक टिमोथी ऐश ने एक ईमेल में लिखा है, कि "यदि आपदा प्रतिक्रिया मजबूत है, तो सत्तारूढ़ प्रशासन को पुरस्कृत किया जाएगा, इसका असर चुनाव में निश्चित तौर पर दिखेगा और अगर भूकंप को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया लोगों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही, तो फिर अर्दोआन शासन के खिलाफ लोगों की प्रतिक्रिया होगी।" सोनर कैगप्टे ने 1999 के भूकंप के बाद तत्कालीन सरकार के पतन के लिए सरकार की खराब प्रतिक्रिया को दोषी ठहराया। उस वक्त 18 हजार लोगों की मौत की पुष्टि की गई थी। अर्दोआन ने इस भूकंप को इतिहास के सबसे खतरनाक भूकंपों में से एक कहा है, जिसकी वजह से हवाई अड्डों में दरारें आ गईं, लिहाजा अंतर्राष्ट्रीय मदद पहुंचने में भी काफी परेशानी हो रही है। लिहाजा, अर्दोआन ने यह कहते हुए अपना बचाव किया है, कि "इस तरह की आपदा के लिए तैयार रहना संभव नहीं है।" हालांकि, उन्होंने वादा भी किया है, कि "हम अपने किसी भी नागरिक को उपेक्षित नहीं छोड़ेंगे।"












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