Tulsi Gabbard Resigns: खूफिया चीफ तुलसी गबार्ड ने छोड़ा ट्रंप का साथ, ईरान युद्ध या पति की बीमारी? वजह क्या?
Tulsi Gabbard Resigns: ईरान युद्ध के बीच Donald Trump के लिए एक बुरी खबर आई है। उनकी केबिनेट का अहम पद संभाल रही Tulsi Gabbard ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। तुलसी Director of National Intelligence (DNI) के पद पर ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही काम कर रहीं थी। उनके इस फैसले ने अमेरिकी राजनीति और सुरक्षा एजेंसियों के बीच हलचल पैदा कर दी है।
क्या ट्रंप से अनबन की वजह से दिया इस्तीफा?
तुलसी के इस्तीफा के बाद एक थ्योरी चल रही है कि उनकी राष्ट्रपति ट्रंप से अनबन थी। हालांकि इस मामले पर दोनों ही तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया। इसके अलावा, तुलसी गबार्ड ने अपने औपचारिक इस्तीफे में बताया कि उन्होंने यह फैसला अपने पति का साथ देने के लिए लिया है। उनके पति Abraham Williams को हाल ही में हड्डी के कैंसर के एक बेहद दुर्लभ प्रकार का पता चला है।

सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी
गबार्ड ने अपना इस्तीफा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया। इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने गबार्ड की सेवाओं की तारीफ की और उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि तुलसी गबार्ड ने शानदार काम किया और अब वह अपने पति के साथ रहना चाहती हैं क्योंकि वह कठिन स्वास्थ्य लड़ाई लड़ रहे हैं।
किसे मिला तुलसी गबार्ड का पद?
ट्रंप प्रशासन ने गबार्ड के इस्तीफे के बाद Aaron Lukas को अंतरिम DNI नियुक्त कर दिया है। अब वे अस्थायी रूप से अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी संभालेंगे।
Reuters की रिपोर्ट ने बढ़ाई सियासी चर्चा
इस बीच अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि व्हाइट हाउस ने गबार्ड को पद छोड़ने के लिए मजबूर किया था। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे अमेरिकी राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
ईरान मुद्दे पर बढ़े थे मतभेद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप के ईरान पर हमला करने के फैसले के बाद से ही गबार्ड और ट्रंप प्रशासन के बीच मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। बताया जा रहा है कि प्रशासन के भीतर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग राय थीं।
मार्च में भी हुआ था बड़ा इस्तीफा
इससे पहले मार्च महीने में राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी केंद्र के निदेशक Joe Kent ने भी इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि वह अच्छे विश्वास के साथ युद्ध का समर्थन नहीं कर पा रहे थे।इसके अलावा, इसी साल मार्च में हुई एक कांग्रेस सुनवाई के दौरान तुलसी गबार्ड ने ईरान पर अमेरिकी हमले को लेकर बेहद सावधानी से बयान दिया था। उन्होंने ट्रंप के फैसले का खुलकर समर्थन करने से बचते हुए संतुलित प्रतिक्रिया दी थी।
Hormuz Strait को लेकर सवालों से बचीं
गबार्ड से बार-बार यह सवाल पूछा गया कि क्या व्हाइट हाउस को ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने के संभावित खतरे की चेतावनी दी गई थी। लेकिन उन्होंने इन सवालों का सीधा जवाब देने से परहेज किया।
ईरानी न्यूक्लियर प्रोग्राम पर दिया अलग बयान
सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी को दिए अपने लिखित बयान में गबार्ड ने कहा था कि अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को दोबारा शुरू करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों ने ईरानी न्यूक्लियर प्रोग्राम को मिटा दिया था। गबार्ड का यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप की उस दलील से अलग माना गया जिसमें ट्रंप लगातार कहते रहे कि ईरान से बड़ा खतरा था और हमले जरूरी थे। इसी वजह से अमेरिकी मीडिया में यह चर्चा तेज हो गई कि ट्रंप प्रशासन के भीतर ईरान नीति को लेकर गहरे मतभेद मौजूद थे।
अब आगे क्या होगा?
तुलसी गबार्ड के इस्तीफे के बाद अब अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और ईरान नीति को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ट्रंप प्रशासन आने वाले समय में अपनी विदेश और सुरक्षा रणनीति को किस दिशा में लेकर जाता है।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।














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