बगदादी के सामने पाकिस्तानी आतंकियों की प्रतिज्ञा, अफगानिस्तान छोड़ते अमेरिका को भीषण जख्म देने की तैयारी!
अमेरिका से बदला लेने के लिए पाकिस्तानी संगठन आईएसआईएस-के का खतरनाक प्लान।
काबुल/वॉशिंगटन, अगस्त 28: अफगानिस्तान से ऐसी रिपोर्ट आ रही है कि अफगिस्तान से वापसी के आखिरी हफ्ते में आईएसआईएस अमेरिका से भीषण बदला लेना चाह रहा है और आईएसआईएस के आतंकी अमेरिका से बदला लेने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक चुके हैं। हालांकि, अमेरिका की तरफ से भी जोरदार जवाब देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अमेरिका ने ज्यादा शक्ति अफगानिस्तान से लोगों को निकालने में रखी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआईएस-खोरासन, इस्लामिक स्टेट की अफगानिस्तान और पाकिस्तान शाखा, बाइडेन प्रशासन को काबुल में खूनी तमाशा दिखाना चाहता है। रिपोर्ट के मुताबिक, आईएसआईएस को पाकिस्तानी आतंकी संगठन आईएसआईएलस-के ने ऐसा खतरनाक वचन दे रखा है, जिसे पूरा करने के लिए वो खूनी खेल खेल रहा है।

कर दिया अमेरिका की नाक में दम
द वाशिंगटन पोस्ट में लिखते हुए हन्ना आलम और सौद मेखेनेट ने कहा कि पिछले कई महीनों से आतंकवादियों पर नजर रखने वाले विश्लेषकों ने बार-बार चेतावनी दी थी, कि अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट से जुड़े आतंकवादी बाइडेन प्रशासन के बाहर निकलने को एक खूनी तमाशा में बदलने की कोशिश करेंगे। गुरुवार को काबुल हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक आत्मघाती हमलावर और कई ISIS-K के आतंकियों और बंदूकधारियों ने 13 अमेरिकी जवानों के साथ साथ करीब 200 लोगों की हत्या कर दी थी और अभी कई खुफिया रिपोर्ट्स हैं, जिनमें कहा गया है कि काबुल एयरपोर्ट पर अभी कई बम धमाके और हो सकते हैं।

आतंकियों की अमेरिका को चेतावनी
द वॉशिंगटन पोस्ट में लिखए आर्टिकिल में अल्लाम और मेखेनेट ने कहा कि ये आतंकी संगठन काफी ज्यादा क्रूर और जटिल हैं और ये एक तरह से अमेरिका को चेतावनी देने में लगे हुए हैं और अमेरिका को ऐसा जख्म देना चाहते हैं, जो 9/11 जैसा हो। आतंकवादियों का मानना है कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि अमेरिका में राष्ट्रपति भवन में कौन बैठा हुआ है, उनका मकसद सिर्फ और सिर्फ अमेरिका को घायल करना है। अमेरिकी मिलिट्री एकेडमी में सहायक प्रोफेसर अमीरा जादून ने आईएसआईएस-के के बारे में विस्तार से लिखा है, जिसमें उन्होंने तर्क दिया गया है, कि बिना शर्त अमेरिका की वापसी और तालिबान का अफगानिस्तान पर कब्जा आईएसआईएस-के के आतंकियों के लिए एक ऐसा वातावरण बना रहा है, जो काफी खतरनाक होगा।

दुनिया को अस्थिर करने की कोशिश
अमेरिकी मिलिट्री एकेडमी में सहायक प्रोफेसर अमीरा जादून ने कहा कि, हम देख रहे हैं कि अमेरिका की वापसी के क्या नतीजे निकल रहे हैं। जादून ने कहा कि इस आतंकी संगठन का मकसद अफगानिस्तान को राजनीतिक तौर पर अस्थिर करते हुए तालिबान की विश्वसनीयता को और खत्म करना भी है। हमले से कुछ घंटे पहले अमेरिका और पश्चिमी देशों की सरकारों ने ISIS-K से संबंधित एक खतरनाक खतरे की चेतावनी दी थी। और लोगों से हवाई अड्डे से दूर रहने की अपील की थी। लेकिन इसके बाद भी इस आतंकी संगठन ने आत्मघाती बम धमाका किया था और करीब 200 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

अमेरिका कर पाएगा पलटवार ?
गुरुवार शाम व्हाइट हाउस के भाषण के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इस्लामिक स्टेट को जिम्मेदार ठहराते हुए हमलावरों को सीधा संबोधित हुए कहा कि ''हम माफ नहीं करेंगे, हम नहीं भूलेंगे, हम तुम्हारा शिकार करेंगे और तुमको इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी"। 17 अगस्त की अमेरिकी रक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है, "ISIS-खोरासन ने अप्रैल से जून तक" राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा में वृद्धि का फायदा उठाया। रिपोर्ट में कहा गया है कि "ये आतंकी संगठन अल्पसंख्यकों पर हमले करेगा और देश के बुनियादी ढांचे पर हमला कर डर फैलाने और अफगानिस्तान सरकार की अक्षमता को उजागर करने की कोशिश करेगा''। इस बीच अमेरिका ने पलटवार करते हुए उन आतंकियों को उड़ा दिया है, जिन्होंने काबुल एयरपोर्ट पर धमाका किया था, लेकिन सवाल ये उठता है कि अमेरिका आखिर सही मायनों में पलटवार कब करेगा?

अफगानिस्तान के आगे खूनी भविष्य?
अरब देशों के एक खुफिया अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि ''हवाई अड्डे पर बम धमाका कर आतंकी संगठन ने दिखा दिया है कि अफगानिस्तान का आने वाला भविष्य खूनी है और इन आतंकियों को रोकने वाला कोई नहीं है।'' सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISIS-K ने 2015 में अफगानिस्तान में काम करना शुरू किया था। 2014 में पाकिस्तानी नागरिक हाफिज सईद खान ने इस संगठन को शुरू किया था। जिसने इस्लामिक स्टेट के पूर्व नेता अबू बक्र अल-बगदादी के प्रति निष्ठा वान होने का वचन दिया था और पूर्वी अफगानिस्तान नंगरहार प्रांत में सक्रिय आतंकी संगठन की स्थापना की थी, जिसमें ज्यादातर पाकिस्तानी आतंकी और आतंकी संगठन एक साथ शामिल हैं। वहीं, सीएसआईएस की रिपोर्ट के अनुसार, इस संगठन में कई आतंकी तालिबान से भी शामिल हुए थे और दूसरे आतंकी संगठनों के गुर्गे भी खोरासान समूह में शामिल हो गए थे।

बेहद खतरनाक है पाकिस्तानी आतंकी संगठन
इस्लामिक स्टेट के अन्य सहयोगियों की तरह आईएसआईएस-के काफी खतरनाक और एक्टिव बना हुआ है और अमेरिका के अफगानिस्तान से निकलने के बाद ये आतंकी संगठन आने वाले वक्त में अपनी ताकत में और इजाफा करेगा, इस बात की पूरी आशंका है। सीएसआईएस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में अमेरिकी हवाई हमले में संस्थापक की मृत्यु हो गई और अब ये संगठन अमेरिका से खूनी बदला लेने में जुटा हुआ है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि आईएसआईएस-के पास अफगानिस्तान के कोनार और नंगरहार प्रांतों में करीब 1,500 से 2,200 लड़ाकों का एक कोर ग्रुप है।
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2021 में 47 धमाके
अल्लाम और मेखेनेट ने कहा है कि इस आतंकी संगठन के स्लीपर सेल देश के अलग अलग हिस्सों में फैले हुए हैं और सिर्फ 2021 में इस आतंकी संगठन ने अफगानिस्तान में 47 बम धमाकों की जिम्मेदारी ली है। तालिबान और अल-कायदा से संबंध रखने वाले एक अफगान आतंकवादी ने कहा कि, हवाईअड्डे पर हुए हमलों की वजह से सशस्त्र समूह तेज लड़ाई की प्लानिंग कर रहा है। उस आतंकी ने कहा कि ''काबुल एयरपोर्ट पर बम धमाका उन लोगों के लिए एक सजा है, जो अफगानिस्तान छोड़कर पश्चिमी देश भागकर जाना चाहते हैं''। ऐसे में सवाल ये है कि क्या अमेरिका इन आतंकियों को रोकने में कामयाब हो पाएगा या फिर मार खाकर जो बाइडेन ऐसे ही काबुल से निकल जाएंगे?












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