विवेक रामास्वामी की लोकप्रियता से पादरियों की लगी मिर्ची, हिन्दू देवी-देवता पर की भद्दी टिप्पणी
अमेरिका में विवेक रामास्वामी पिछले कुछ हफ्तों में एक प्रमुख रिपब्लिकन उम्मीदवार के रूप में उभरे हैं। खासकर वे उन लोगों की पसंद बन रहे हैं जो पार्टी में डोनाल्ड ट्रंप का विकल्प तलाश रहे हैं।
हालांकि, विवेक रामास्वामी के पक्ष में जो चीज नहीं जाती है वो ये है कि वे भारतीय मूल के अमेरिकी हिंदू हैं। ऐसे में ईसान बहुल देश में उनके आलोचक अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में उनकी उम्मीदवारी की दावेदारी के खिलाफ उनके धर्म को मुद्दा बना सकते हैं।

इस बीच ट्रंप समर्थक पादरी हैंक कुन्नेमन ने रामास्वामी की आस्था को लेकर उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है जो कि खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। द रोलिंग स्टोन्स के लेख के मुताबिक कुन्नमैन ने हालिया उपदेश कार्यक्रम में कहा कि उन्हें विवेक रामास्वामी से खतरा महसूस होता है।
कुन्नेमन ने कहा कि यदि रामास्वामी जीतते हैं तो अमेरिकी राष्ट्रपति भवन में अजीब तरह के हिंदू देवताओं की तस्वीरें लगेंगी। ट्रंप समर्थक इस पादरी ने कहा, 'अगर वो इंसान प्रभु यीशु मसीह की सेवा नहीं करता है तो फिर आपके अपने ईश्वर से नहीं बनेगी। आपके देवाता आपसे नाराज हो जाएंगे।'
रामास्वामी की मान्यताओं पर हमला करते हुए, कुन्नेमन ने कहा- "हम क्या कर रहे हैं? क्या आप किसी व्यक्ति को बाइबल के अलावा किसी अन्य चीज पर अपना हाथ रखने देंगे? क्या आप उसे अपने सभी अजीब देवताओं को व्हाइट हाउस में रखने देंगे?
कुन्नेमन ने कहा कि उन्हें परवाह नहीं है कि शासन चलाने के लिए किस की नीतियां कितनी अच्छी हैं, यदि वो वो इंसान प्रभु यीशु को नहीं मानता।
संयोग से, रामास्वामी ने कभी भी अपने हिंदू विश्वास से इनकार नहीं किया है। उन्होंने यहां तक कहा है कि वह 'पादरी-इन-चीफ के लिए नहीं' बल्कि 'कमांडर-इन-चीफ' के लिए दौड़ रहे हैं।
रामास्वामी ने दावा किया कि, 'समाज में असली विभाजन हिंदू, ईसाई या यहूदी धर्म के लोगों के बीच नहीं है। धर्म को मानने वाले लोग अपने सच्चे ईश्वर में यकीन करते हैं। समस्या उन लोगों के बीच है जिन्होंने वैक्यूम को वोकिज्म, ट्रांसजेंडरिज्म, क्लाईमेंटिज्म और कोविडिज्म' जैसे नए धर्मों से बदल रहे हैं।
रामास्वामी मानते हैं कि उनका धर्म उनके लिए बाधा नहीं बल्कि एक अद्वितीय लाभ है। वो कहते हैं, 'मैं धर्म के पुनरुद्धार के लिए बिना बिना किसी हिचक के हमेशा खड़ा हूं। मैं इसे और अधिक स्वतंत्रता के साथ इसलिए कर सकता हूं क्योंकि कोई मुझ पर ईसाई राष्ट्रवादी होने का आरोप भी नहीं लगा सकता।'
हालांकि, रामास्वामी पर कटुवचन कहने वाले सिर्फ कुन्नेमन अकेले नहीं हैं। कई अन्य ईसाई राष्ट्रवादियों ने भी भारतीय मूल के इस बिजनेसमैन पर हमला किया है। ट्रंप के एक और नजदीकी शख्स जैक्सन लैहमेयर ने भी उनकी आलोचना की है। लैहमेयर ने कहा कि एक 35 साल के व्यक्ति ने रॉन डिसैंटिस की जगह लगभग छीन ली है।
ओक्लाहोमा के पादरी जॉन बेनेट ने भी रामास्वामी को उनके धर्म के कारण निशाने पर लिया है। बेनेट ने उन्हें एक 'इंडोनेशियाई व्यक्ति' बताया है। उन्होंने कहा कि रामास्वामी ईसाई वोट हासिल करने के लिए ईसाई होने का दावा कर रहे थे।
हालांकि यहां वह तथ्य से अलग बात कर रहे थे। बेशक रामास्वामी ने कभी भी ईसाई होने का दावा नहीं किया। भले ही उन्होंने यीशु को ईश्वर का पुत्र कहा है। हालाँकि, उनका धार्मिक विश्वास एक बाधा बन सकता है और विरोधियों द्वारा भी इसका इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के एक आलेख में दावा किया गया है कि रिपब्लिकन उम्मीदवारी के दावेदार डी सैंटिस उनके धर्म और पृष्ठभूमि को निशाना बनाकर ईसाई रूढ़िवादी वोटिंग का फायदा उठा सकते हैं।












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