Trump Deportation Policy: कानून की बलि चढ़ी इंसानियत! 50 साल अमेरिका में रहने के बाद अब ईरान भेजी जाएगी महिला
Donald Trump Deportation Policy: ट्रंप प्रशासन की नई निर्वासन नीति ने अमेरिका में रहने वाले हजारों लोगों की नींद उड़ा दी है, लेकिन एक मामला बेहद हैरान करने वाला है। 1970 के दशक में एक अमेरिकी सैनिक द्वारा ईरान के अनाथालय से गोद ली गई एक बच्ची, जो आज 50 साल की महिला है, उसे 52 साल बाद निर्वासन (Deportation) का नोटिस मिला है।
पूरी जिंदगी अमेरिका में एक ईसाई की तरह बिताने और हर नियम का पालन करने के बावजूद, उसे अब उस देश वापस भेजे जाने का डर है जहां उसकी जान को खतरा हो सकता है।

अनाथालय से अमेरिका तक का 52 साल का सफर
यह कहानी 4 साल की एक मासूम बच्ची की है, जिसे एक अमेरिकी वेटरन ने बड़े चाव से ईरान से गोद लिया था। वह अमेरिका आई, यहां की संस्कृति में रची-बसी और आज कैलिफोर्निया में उसका अपना घर और करियर है। उसने हमेशा खुद को अमेरिकी नागरिक समझा, समय पर टैक्स भरा और कभी कोई जुर्म नहीं किया। लेकिन आज उसके सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा है क्योंकि उसके पिता ने गोद लेने के समय नागरिकता की कानूनी कागजी कार्रवाई पूरी नहीं की थी।
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अचानक मिला निर्वासन का नोटिस और बढ़ा तनाव
महिला को अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) से एक पत्र मिला जिसने उसकी दुनिया उजाड़ दी। पत्र में कहा गया कि मार्च 1974 में उसका वीजा खत्म हो गया था और वह तब से अवैध रूप से रह रही है। वह 2008 से अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन के बड़े पैमाने पर चल रहे निर्वासन अभियान की चपेट में वह भी आ गई है। बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड के भी अब उसे अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान वापसी का डर और जान का खतरा
महिला के लिए सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि उसे उस देश (ईरान) भेजा जा रहा है, जिसे वह जानती तक नहीं। एक ईसाई होने और एक अमेरिकी सैनिक की बेटी होने के नाते, ईरान के कट्टरपंथी शासन में उसकी जान को सीधा खतरा है। उसने भावुक होकर कहा कि उसे कभी नहीं लगा था कि अमेरिका उसे उस अनाथालय के हवाले कर देगा जहां से उसे नई जिंदगी मिली थी। उसकी पहचान और धर्म ही अब उसके लिए ईरान में मौत का वारंट बन सकते हैं।
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युद्ध की आहट और ट्रंप प्रशासन की सख्त नीति
यह मामला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती और ट्रंप की ईरान विरोधी कड़ी नीतियों ने इस महिला के डर को कई गुना बढ़ा दिया है। हजारों अंतरराष्ट्रीय गोद लिए गए बच्चे इसी कानूनी पेच में फंसे हैं क्योंकि उनके माता-पिता ने 'सिटिजनशिप एक्ट' के तहत जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। अब यह महिला युद्ध और निर्वासन की दोहरी आग के बीच खड़ी है।
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