Trump Tariff War: ट्रंप ने भारत-चीन पर 100% टैरिफ लगाने की दी सलाह, यूरोपीय यूनियन ने दिया दो टूक जवाब
Trump Tariff War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ के अधिकारियों से मंगलवार को चीन पर 100% तक टैरिफ लगाने का आग्रह किया। ट्रंप ने यूएन से कहा अगर युक्रेन युद्ध को रोकना है तो भारत और चाइन पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाए। हालांकि इस सुझाव को यूरोपीय यूनियन (EU) ने सिरे से खारिज कर दिया है। यूरोपीय यूनियन ने साफ किया है कि वह टैरिफ युद्ध को किसी भी देश पर प्रतिबंध लगाने का जरिया नहीं मानता।
टैस समाचार एजेंसी ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह प्रस्ताव मंगलवार को वाशिंगटन में अमेरिका और यूरोपीय संघ के अधिकारियों की बैठक में युद्ध राेकने के लिए चीन और भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का सुझाव दिया था। ऐसे करके अमेरिका रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर दबाव बनाना चाहते थे।

बता दें भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने और चीन द्वारा रूसी अर्थव्यवस्था को समर्थन देने से रूस मजबूत बना रहता है।ट्रंप इन देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर रूस को कमजोर करना चाहते थे। अमेरिका का मानना था कि अगर ये अनुरोध मान लिया गया तो यूरोपीय संघ की रणनीति में बदलाव आएगा। हालांकि यूरोपीय संघ ने अब तक टैरिफ के बजाय प्रतिबंधों के माध्यम से रूस को अलग-थलग करने को प्राथमिकता दी है।
UN ने अमेरिका को दिया दो टूक जवाब
हालांकि, यूरोपीय संघ ने उनके प्रस्ताव को ये कहते हुए सिरे से नकार दिया है कि, टैरिफ लगाना उनके लिए दंडात्मक उपाय नहीं है। यूरोपीय यूनियन का मानना है कि व्यापार नीति को राजनीतिक विवादों का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
यूएन नई पाबंदियों पर काम कर रहा
फिलहाल, यूरोपीय यूनियन रूस पर 19वें चरण की नई पाबंदियों पर काम कर रहा है। इस चरण में रूस की मदद कर रही कुछ विदेशी कंपनियों को निशाना बनाने की तैयारी है। इसके बावजूद, यूरोपीय यूनियन के भीतर राजनीतिक मतभेदों के कारण तेल और गैस की खरीद पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगने की संभावना कम है।
इससे पहले, फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में बताया गया था कि EU रूस से तेल और गैस खरीदने वाले चीन और अन्य तीसरे देशों पर पाबंदियों पर चर्चा कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 7 सितंबर से यूरोपीय अधिकारियों और राजनयिकों के बीच बातचीत शुरू हुई है, जिसमें इन प्रतिबंधों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। बातचीत के दौरान चीन के खिलाफ सेकेंडरी सैंक्शन का मुद्दा कई बार उठाया गया।
ट्रंप ने भारत पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ को बनाया हथियार
ध्यान रहे, ट्रंप अक्सर रूस से तेल खरीदने के लिए भारत और चीन पर टैरिफ लगाने की धमकी देते रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर टैरिफ में 25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ जुर्माने के तौर पर लगाने का ऐलान किया था। भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दें, इसके लिए ट्रंप टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
ट्रंप ने कई बार शिकायत की है कि यूरोप ने खुद को रूस से पूरी तरह अलग नहीं किया है। पिछले साल यूरोपीय संघ के गैस आयात का लगभग 19% रूस से आया था, हालांकि यूरोपीय संघ रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि, इस Trump Tariff War के बीच मंगलवार शाम को, ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में संकेत दिया कि अमेरिका वास्तव में भारत के साथ व्यापार बढ़ा सकता है। उन्होंने लिखा कि अमेरिका और भारत दोनों देशों के बीच व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने की भी उम्मीद जताई।












Click it and Unblock the Notifications