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हर देश अफगानिस्तान को लालची निगाहों से क्यों देखते हैं? दुर्लभ खजाने से बदलेगी देश की किस्मत?

आखिर अफगानिस्तान को हर देश ललचाई निगाह से क्यों देखते हैं और क्या अफगानिस्तान को उन्नति के रास्ते पर ले जाने में तालिबान कामयाब हो पाएगा?

काबुल, दिसंबर 24: अलग अलग वक्त में अफगानिस्तान की पहचान अलग अलग वजहों से रही है और पिछले 40 सालों से अफगानिस्तान की पहचान सिर्फ एक शब्द में सिमट कर रह गई है, 'युद्धग्रस्त' देश। लेकिन, अफगानिस्तान की पहचान सिर्फ एक युद्धग्रस्त देश की ही नहीं है, बल्कि तालिबान, ड्रग्स, अफीम से होते हुए अफगानिस्तान की पहचान उन दुर्लभ खजानों से भी है, जिसकी तरफ आज दुनियाभर के देश ललचाई निगाहों से देखते हैं।

लालच बढ़ाता अफगानिस्तान

लालच बढ़ाता अफगानिस्तान

अफगानिस्तान का जिक्र आमतौर पर तालिबान, युद्ध से तबाह शहरों और गरीबी को ध्यान में रख कर कर दिया जाता है। हालांकि, भारत के इस पड़ोसी देश के पास वास्तव में ऐसा छिपा हुआ खजाना है, जो पूरी दुनिया को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। दरअसल, जब भारतीय उपमहाद्वीप एशिया से टकराया था, तब धरती पर मौजूद दुर्लभ खनिजों का विशाल भंडार अफगानिस्तान के गर्भ में जमा हो गया था। इन खनिजों के खनन से इस देश का भाग्य पूरी तरह से बदल सकता है, लेकिन आवश्यकता है, कि उन खनीजों को सही तरह से निकाला जाए और व्यवस्थित तरीके से देश हित में उनका इस्तेमाल किया जाए।

कितना अमीर बन सकता है अफगानिस्तान?

कितना अमीर बन सकता है अफगानिस्तान?

अफगानिस्तान के खान एवं पेट्रोलियन मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए दावा किया था कि, अफगानिस्तान में करीब एक ट्रिलियन डॉलर यानि 75.55 लाख करोड़ रुपये के प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं। ये दावा अमेरिका की एक रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। आपको जानकर काफी हैरानी होगी, कि महज 3 करोड़ और 80 लाख की आबादी वाले इस देश के पास 2.22 लाख करोड़ किलोग्राम लौह अयस्क हैं, जबकि 1.30 लाख किलोग्राम मार्बल हैं, वहीं, अफगानिस्तान के पास 1.40 लाख किलोग्राम दुर्लभ धातु मौजूद हैं। यानि, ये मात्रा इतनी ज्यादा है, कि अफगानिस्तान का बच्चा- बच्चा लखपति हो सकता है। बावजूद अफगानिस्तान के लोगों की जिंदगी नर्क बनी हुई है।

बदल सकती है देश की तकदीर

बदल सकती है देश की तकदीर

साल 2000 में अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में स्थापित तालिबान की सत्ता को उखाड़ फेंका था और साल 2006 में अमेरिकन जियोलॉजिकल सोसायटी के सर्वेक्षण ने देश में सर्वेक्षण किया था। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने चुंबकीय गुरुत्वाकर्षण और हाइपरस्पेक्ट्रल सर्वेक्षणों के लिए हवाई मिशन भी किए थे। जिसमें पता चला था कि अफगानिस्तान में अकूत मात्रा में लोहा, तांबा, कोबाल्ट, सोना के अलावा औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण लिथियम और नाइओबियम के विशालकाय खनिज मौजूद है। ये ऐसे खनिज हैं, जो रातों रात किसी भी देश की तकदीर को हमेशा के लिए बदल सकते हैं।

10 साल में सुधर सकती है स्थिति

10 साल में सुधर सकती है स्थिति

अफगानिस्तान में खनिजों की स्थिति पर जियोलॉजिस्ट मॉन्टगोमेरी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि, अगर अफगानिस्तान के अंदर अगले सात साल से 10 साल तक व्यापक पैमाने पर खनन का काम हो जाए, तो देश की तकदीर पूरी तरह से बदल सकती है। लेकिन, दिक्कत ये है कि, अफगानिस्तान में सुरक्षा संकट को देखते हुए कोई भी कंपनी निवेश के लिए आना नहीं चाह रही हैं। यहां तक कि, चीन की कंपनियां भी अफगानिस्तान में घुसने से डर रही हैं, वो भी तालिबान से सुरक्षा आश्वासन मिलने के बाद भी। लिहाजा, देश का विकास पूरी तरह से ठप पड़ा है।

देश में छिपा है दुर्लभ खजाना

देश में छिपा है दुर्लभ खजाना

अफगानिस्तान में आज से नहीं, बल्कि सोवियत संघ के आक्रमण से पहले ही जंग चल रहा है। दर्जनों कबीले में बंटे अफगानिस्तान के लोग पहले आपस में लड़ते रहे, फिर देश पर सोवियत संघ का आक्रमण हुआ और जब सोवियत संघ की सेना वापस गई, तो अमेरिकन सैनिकों का देश पर कब्जा हो गया और जब देश से अमेरिकन सैनिक भी जा चुके हैं, तो तालिबान के हाथ में देश का शासन है, लेकिन, देश की जनता के हाथ में शासन व्यवस्था अब तक नहीं आ पाई है और तालिबान के लिए भी देश चलाना काफी मुश्किल साबित हो रहा है, क्योंकि, ज्यादातर कबीलों का समर्थन उन्हें हासिल नहीं है, लिहाजा अफगानिस्तान का दुर्लभ खजाना अभी भी जमीन के अंदर ही दफ्न है।

24 जगहों पर प्राकृतिक संसाधनों का भंडार

24 जगहों पर प्राकृतिक संसाधनों का भंडार

अमेरिकी एजेंसी ने जब सर्वे किया था, उस वक्त पता चला था कि, अफगानिस्तान में मौजूद 34 प्रांतों में से 24 जगहों पर प्राकृतिक संसाधनों का अकूत भंडार है और इतनी विशालकाय प्राकृतिक संपदा पूरे देश की तकदीर बदलने के लिए काफी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में 15.39 करोड़ किलोग्राम लेड जिंक, 10 करोड़ किलोग्राम सेलेसटाइट और 2 हजार 698 किलोग्राम सोना धरती के गर्भ में मौजूद है। वहीं, इस वक्त विश्व में सबसे ज्यादा लौह अयस्क अफगानिस्तान के पास ही मौजूद है। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में 2.22 लाख करोड़ किलोग्राम लौह अयस्क मौजूद है और इतने लोहे में दो लाख एफिल टॉवर का निर्माण किया जा सकता है। आपको बता दें कि, फ्रांस में एफिल टॉवर के निर्माण में करीब 73 लाख किलोग्राम लोहा लगा था।

देश में है एल्यूमिनियम का भंडार

देश में है एल्यूमिनियम का भंडार

इन खनिजों के अलावा अफगानिस्तान के कंधार प्रांत और बडकशान में भारी मात्रा में एल्यूमिनियम का भंडार भी मौजूद है। रिपोर्ट में मुताबिक, देश के अंदर 18 हजार 300 किलोग्राम एल्यूमिनियम का भंडार है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाना वाला मेटल है। एल्यूमिनियम की ये मात्रा कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, इससे 50 हजार करोड़ मैकबुक कम्यूटर केस बनाए जा सकते हैं।

देश में छिपा है सोने का भंडार

देश में छिपा है सोने का भंडार

इन खनिजों के अलावा अफगानिस्तान में प्रचूर मात्रा में सोने का भंडार भी है। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में 2698 किलोग्राम सोने का भंडार पड़ा है। ये सोने का भंडार बडकशान से ताखर होते हुए गजनी और जाबुल क्षेत्र तक फैला हुआ है। इतने सोने से 8-8 ग्राम के 3 लाख सोने के सिक्कों का निर्माण हो सकता है। वहीं, सोना के अलावा अफगानिस्तान में करीब 12 हजार 400 किलो तांबा भी मौजूद है, जिससे धरती से चांद तक की दूरी को 14 बार इतने तार को बांधा जा सकता है।

पहाड़ों के देश की बदहाल किस्मत

पहाड़ों के देश की बदहाल किस्मत

खनिजों के अलावा अफगानिस्तान विश्व में सबसे ज्यादा पहाड़ों वाले देशों में आठवें नंबर पर है और हिमालय के हिंदूकुश की रेंज यहां तक पहुंची हुई है। लेकिन, इन पहाड़ों की वजह से देश के कई दूसरे हिस्सों में जाना काफी मुश्किल भरा काम होता है। लेकिन, इन पहाड़ों में भारी मात्रा में मार्बल, लाइमस्टोन और सैंडस्टोन मौजूद है। एक अनुमान के मुताबिक, अफगानिस्तान में करीब 1 करोड़ 30 लाख किलोग्राम मार्बल मौजूद है। वहीं, लाइमस्टोन और सैंडस्टोन भी प्रचूर मात्रा में मौजूद है। आपको बता दें कि, लाइमस्टोन का इस्तेमाल सीमेंट बनाने के लिए किया जाता है। वहीं, टूथपेस्ट और पेंट बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।

भारी मात्रा में मौजूद है दुर्लभ खनिज

भारी मात्रा में मौजूद है दुर्लभ खनिज

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान की धरती के अंदर बडकशान, हेरात और बाघलान प्रांतों में करीब 50 हजार किलो लाइमस्टोन मौजूद है। वहीं देश के अंदर 65 हजार करोड सैंडस्टोन मौजूद है। इनके अलावा भी अफगानिस्तान में मिनरल का खजाना मौजूद है। बात अगर दुर्लभ खनिज और धातुओं की करें, तो अफगानिस्तान के अंदर 1.40 लाख करोड़ किलो दुर्लभ धातु मौजूद है। इम धातुओं में लैपिस लाजुली, पन्ना और माणिक भी शामिल हैं। वहीं, अफगानिस्तान के अंदर दुर्लभ धातुओं में सबसे ज्यादा 15 हजार 200 किलोग्राम बैराइट मौजूद है, जिसका इस्तेमाल तेल और गैस इंडस्ट्री में की जाती है।

कहां एक्सपोर्ट होते हैं अफगानिस्तान के सामान?

कहां एक्सपोर्ट होते हैं अफगानिस्तान के सामान?

अफगानिस्तान से 90 फीसदी से ज्यादा सामान सिर्फ तीन ही देशों के अंदर एक्सपोर्ट किया जाता था और ये देश थे संयुक्त अरब अमीरात, भारत और पाकिस्तान। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान से करीब 45 फीसदी खनिजों का निर्यात संयुक्त अरब अमीरात को किया जाता था, जबकि पाकिस्तान को 24 फीसदी और भारत को 22 फीसदी एक्सपोर्ट किया जाता था। लेकिन 15 अगस्त को तालिबान का देश पर कब्जा होने के बाद अफगानिस्तान में एक्सपोर्ट एंड इम्पोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। वहीं, 2 सितंबर 2021 को तालिबान ने चीन की मदद से अफगानिस्तान में खनिज उद्योग को बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन चीन की कंपनियां इतनी आसानी से अफगानिस्तान के अंदर आने को तैयार नहीं है।

लालच के बाद भी चीन को दिक्कत

लालच के बाद भी चीन को दिक्कत

16 दिसंबर को चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि, कई साल पहले ही जिस चीनी कंपनी ने अफगानिस्तान के अंदर तांबा निकालने के लिए मशीन लगाए थे, उस कंपनी ने अभी तक काम शुरू नहीं किया है। ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि, अफगानिस्तान के अंदर अनिश्चित हालात हैं और सुरक्षा का संकट मौजूद है, इसीलिए काम शुरू नहीं हुआ है। हालांकि, ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, चीन और तालिबान के अधिकारी काम शुरू करने के लिए बात कर रहे हैं। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने मंगलवार को कहा कि, तालिबान ने चीन के साथ अयनक कॉपर माइन प्रोजेक्ट पर काम फिर से शुरू कर दिया है, जो रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक के अनुसार, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तांबे की खदान है।

चीन ने रखी है स्थिति सुधारने की शर्त

चीन ने रखी है स्थिति सुधारने की शर्त

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि, हालांकि, प्रमुख सहयोग परियोजनाओं को फिर से शुरू करने की उम्मीद के बावजूद, देश में चीनी कंपनियों और व्यवसायों ने कहा है कि तांबे की खदान पर काम शुरू करने से पहले अभी भी बहुत सारे काम किए जाने की जरूरत है, जिसमें तालिबान के लिए स्थितियों में सुधार करना सबसे बड़ी शर्त है। अयनक कॉपर माइन प्रोजेक्ट में शामिल चाइना मेटलर्जिकल ग्रुप के एक कर्मचारी ने गुरुवार को कहा कि, प्रोजेक्ट पर कोई प्रगति नहीं हुई है। कंपनी के निवेशक हॉटलाइन के माध्यम से कर्मचारी ने कहा, "अयनक कॉपर माइन का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ और स्थानीय अस्थिर स्थिति निर्माण के लिए मुख्य बाधा है।''

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