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अफगानिस्तान में भारत ने किया है तकरीबन 22 हजार करोड़ का निवेश, ये हैं 5 सबसे बड़े प्रोजेक्ट

काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान ने पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है। कंधार से लेकर काबुल तक अब तालिबान के नियंत्रण में हैं। लंबे अरसे तक चली हिंसा के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण हासिल करने में सफलता हासिल की है। लेकिन जिस तरह से तालिबान ने अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया है उसके बाद दुनिया के कई देशों के सामने कूटनीतिक संकट खड़ा हो गया है। भारत भी इन देशों की सूचि में शामिल है। भारत ने अफगानिस्तान में करोड़ो-अरबो रुपए का निवेश किया था।

दो दशक का द्वीपक्षीय संबंध खतरे में

दो दशक का द्वीपक्षीय संबंध खतरे में

अफगानिस्तान के साथ रिश्तों को नया आयाम देने के लिए भारत ने पिछले 20 सालों में कई अहम कदम उठाए। भारत के लिए अफगानिस्तान रणनीतिक तौर पर काफी अहम है, यही वजह है कि भारत ने अफगानिस्तान के साथ संबंधों को बेहतर करने के लिए हर संभव कदम उठाए। 1996 से 2001 के बीच जब भारत ने दुनिया के देशों के साथ अफगानिस्तान में तालिबान के राज को खत्म करने के लिए हाथ मिलाया तो भारत के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक कदम था। सिर्फ पाकिस्तान, यूएई और सऊदी अरब ने उस वक्त तालिबान का साथ दिया था। 9/11 के बाद भारत ने एक नए सिरे से अफगानिस्तान के साथ संबंध को आगे बढ़ाया।

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     कुल 3 बिलियन डॉलर का निवेश

    कुल 3 बिलियन डॉलर का निवेश

    भारत ने अफगानिस्तान में सड़क, डैम, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, सबस्टेशन, स्कूल, अस्पताल आदि के निर्माण में अहम योगदान दिया। भारत ने अमेरिका में तकरीबन 3 बिलियन डॉलर यानि तकरीबन 22 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया था। यही नहीं भारत में अपने देश में के बाजार में अफगानिस्तान के लिए ड्यूटी फ्री बिजनेस की राह खोली। दोनों देशों के बीच द्वीपक्षीय व्यापार 1 बिलियन डॉलर तक का था। 2020 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जेनेवा कॉन्फ्रेंस में कहा था कि आज अफगानिस्तान का कोई ऐसा हिस्सा नहीं जहां भारत के प्रोजेक्ट ना हो, भारत के अफगानिस्तान में 400 से अधिक प्रोजेक्ट हैं, जिसे सभी 34 अफगानिस्तान के प्रांत में चलाया जा रहा है। लेकिन अब इन प्रोजेक्ट का भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है। आइए डालते हैं अफगानिस्तान में भारत के 5 बड़े प्रोजेक्ट पर नजर

    सलमा डैम

    सलमा डैम

    अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में सलमा डैम को भारत ने तैयार किया था, जिसका उद्घाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में किया था। इस डैम को फ्रैंडशिप डैम के रूप में भी जाना जाता है जहां पर बड़े पैमाने परर तकरीबन 42 मेगावाॉट बिजली का उत्पादन होता है। यहां से तकरीबन 75 हजार हेक्टेयर जमीन को पानी मुहैया कराया जाता था।

    जारंज हाईवे

    जारंज हाईवे

    अफगानिस्तान के निमरुज प्रांत की राजधानी जारंज में भारत ने हाईवे के निर्माण में काफी निवेश किया था। भारत ने यहां हाईवे का निर्माण इस उद्देश्य से किया था ताकि वह ईरान के चाबहार बंदराग के रास्ते जारंज शहर पहुंच सके और यहां से ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान के साथ जुड़ से।

    संसद

    संसद

    काबुल स्थित अफगानिस्तान की संसद का निर्माण भारत ने कराया था। इसके लिए भारत ने कुल 90 मिलियन डॉलर का निवेश किया था। इसे 2015 में खोला गया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। उद्घाटन के दौरान भाषण देते हुए पीएम मोदी ने रूमी का जिक्र किया था और यारी है इमान मेरा यार मेरी जिंदगी गाने का जिक्र किया था। पीएम मोदी ने इस बिल्डिंग को अफगानिस्तान के लोकतंत्र के लिए भारत का सम्मान बताया था। बिल्डिंग में एक ब्लॉक का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर भी रखा गया है।

    स्टोर पैलेस

    स्टोर पैलेस

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने 2016 में इसका उद्घाटन किया था। इसे मूल रूप से 19वीं शताब्दी में बनाया गया था लेकिन। 2009 में भारत और अफगानिस्तान के बीच इस बिल्डिंग के जीर्णोद्धार के लिए करार किया गया था। आगा खान ट्रस्ट फॉर कल्चर ने इस प्रोजेक्ट को 2013 से 2016 के बीच पूरा कर लिया था।

     ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश

    ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश

    भारत ने ऊर्जा के क्षेत्र में भी अफगानिस्तान में बड़ा निवेश किया था। पूर्वी काबुल की स्थित बघलान में 220 केवी डीसी ट्रांसमिशन लाइन को तैयार किया गया था। जिससे राजधानी पुल ए खुमारी में बिजली मुहैया कराई जा सके। भारतीय कॉन्ट्रैक्टर और वर्कर्स ने कई प्रांतों में टेलीकम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी फिर से स्थापित किया था।

    इंदिरा गांधी इस्टिट्यूट

    इंदिरा गांधी इस्टिट्यूट

    काबुल में भारत ने काबुल में इंदिरा गांधी इंस्टिट्यूट फॉर चाइल्ड हेल्थ की पुन: निर्माण कराया था। यह सेंर युद्ध के समय जर्जर हो गया था जिसे भारत ने 1985 में फिर से खड़ा करने में मदद की थी। इसके अलावा भारत ने बल्ख, कंधार, खोश्त,कुनार, निमरुज, पाकतिया, नूरिस्तान में भी क्लीनिक बनवाए थे।

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