पूरी दुनिया में भेजा जाता है भारतीय टमाटर, फिर दूसरे सबसे बड़े उत्पादक को नेपाल से खरीदने की क्यों आई नौबत?
भारत में लगभग 3 महीने से टमाटर की किल्लत चल रही है। आसमान छूती टमाटर की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार ने नेपाल से इसे आयात करना शुरू किया है। इस बीच नेपाल ने बाजार तक आसान पहुंच बनाने के लिए जरूरी सुविधाएं मांगी हैं।
हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि भारत ने रिकॉर्ड ऊंची कीमतों के कारण नेपाल से टमाटर का आयात शुरू कर दिया है। देश पहली बार टमाटर का आयात कर रहा है। आपको बता दें कि भारत दुनिया में टमाटर पैदा करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।

टमाटर पैदा करने वाले 5 सबसे बड़े देश
एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में दुनियाभर में 189 टन टमाटर पैदा हुआ था। 67,538,340 टन के साथ चीन दुनिया में सबसे अधिक टमाटर पैदा करने वाला देश रहा। 21,181,000 टन की पैदावार के साथ भारत इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है।
तीसरे नंबर पर इस लिस्ट में तुर्की है जहां 13,095,258 टन टमाटर की पैदावार हुई। अमेरिका में 10,475,265 टन टमाटर पैदा हुआ। वह इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है। वहीं, इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर इटली है जहां एक साल में लगभग 6,644,790 टन टमाटर पैदा हुआ।
भारत मुख्य रूप से अमेरिका, सिंगापुर, भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, सऊदी अरब, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और कतर को टमाटर निर्यात करता है। वर्ष 2017 में भारत ने कुल 267.52 हजार मिट्रिन टन टमाटर का निर्यात किया था। इसके बाद इसमें लगातार उतार चढ़ाव जारी है।

भारत में टमाटर की दो फसलें उगाई जाती हैं। रबी सीजन (दिसंबर से जनवरी में बुआई) और दूसरी खरीफ (अप्रैल-मई में बुआई) के सीजन में। टमाटर की फसल को तैयार होने में लगभग तीन महीने में लगते हैं। लगभग 45 दिनों तक टमाटर का पौधा फल देता है।
रबी के मौसम में उपजाए जाने वाले टमाटर मुख्य रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात आदि राज्यों में उगाए जाते हैं। दुर्भाग्य से भारी बारिश की वजह से रबी मौसम में पैदा होने वाले टमाटर को भारी नुकसान हुआ।
टमाटर की सेल्फ लाइफ बेहद कम होती है। ऐसे में इसकी निरंतर सप्लाई जरूरी है। कर्नाटक, तेलंगाना समेत दक्षिणी राज्यों के साथ कुछ पहाड़ी राज्यों में भारी बारिश होने की वजह से इन फसलों को भारी नुकसान हुआ।
टमाटर की पैदावार में कमी की एक वजह बारिश ही नहीं बल्कि भारी गर्मी भी रही। मार्च-अप्रैल में अत्यधिक गर्मी की वजह से ककड़ी वायरस के हमले देखे गए। इस वजह से टमाटर के काफी पौधे सूख गए।
इसके अलावा टमाटर की कीमतों में ऐसी वृद्धि की वजह बीते कुछ सालों में इसका भारी मात्रा में उपज होना भी है। जानकारों के मुताबिक 2021-2022 में टमाटर की बंपर पैदावार हुई। भारी मात्रा में सप्लाई होने से इसकी कीमतें काफी कम हो गईं।
थोक मंडियों में कई जगहों पर दो से 3 रुपये प्रतिकिलो टमाटर बेचे गए। ऐसे में किसानों को काफी नुकसान हुआ। पिछले दो साल से नुकसान झेल रहे किसानों ने इस बार टमाटर की बुआई कम की।
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