'गोल्ड' मिलते ही पाकिस्तान में भी छाए नीरज चोपड़ा, जानिए क्यों
नई दिल्ली, अगस्त 07: नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में शनिवार को भाला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय खेलों में नया इतिहास रचा। 121 साल के इतिहास में भारत ने एथिलेटिक्स में पहला गोल्ड जीता है। नीरज चोपड़ा ने फाइनल में 87.58 मीटर का थ्रो किया और सीधे गोल्ड पर निशाना साधा। नीरज पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहे। नीरज अपने ग्रुप में भी टॉप रहे और दोनों ग्रुप मिलाकर भी। इस टूर्नामेंट में नीरज के साथ एक नाम और जुड़ा रहा। पाकिस्तान के जैवलीन थ्रो एथलीट और फाइनल में नीरज के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी पाकिस्तान के अरशद नदीम। यही नहीं नीरज भारत के अलावा पाकिस्तान की मीडिया में भी छाए हुए हैं।

नदीम ग्रुप बी में टॉप पर रहते हुए खिताबी मुकाबजे में पहुंचे थे
टोक्यो ओलंपिक में नदीम के भाले ने 85.16 मीटर की दूर तय कर फाइनल में जगह बनाई है। नदीम ग्रुप बी में टॉप पर रहते हुए खिताबी मुकाबजे में पहुंचे थे। हालाँकि वे कुल मिलाकर तीसरे नंबर पर रहे। फाइनल में नीरज चोपड़ा को पाकिस्तान के अरशद नदीम भी चुनौती दे रहे थे। अरशद के आइडल नीरज चोपड़ा रहे हैं। अरशद ने 2016 साउथ एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था जबकि नीरज ने गोल्ड पर कब्जा जमाया था।

अरशद ने एशियन गेम्स में सिल्वर जबकि चोपड़ा ने स्वर्ण पदक जीता था
इसके अलावा अरशद ने एशियन गेम्स में सिल्वर जबकि चोपड़ा ने स्वर्ण पदक जीता था। नदीम 2019 एशियन गेम्स में गोल्ड जीत चुके हैं। जब से दोनों खिलाड़ियों के टोक्यो ओलंपिक के फाइनल में पहुँचने की खबर आई, सोशल मीडिया पर दोनों की एक तस्वीर वायरल होनी शुरू हो गई थी। ये तस्वीर है 2018 के एशियाई खेलों की है। जिसमें नीरज चोपड़ा ने गोल्ड जीता था, जबकि अरशद नदीम ने कांस्य पदक अपने नाम किया था।

हाल ही में ये तस्वीर हुई थी वायरल
आज हुई फाइनल में अरशद नदीम पांचवे स्थान पर रहे। नदीम ने फाइनल राउंड के अपने शुरुआती प्रयास में 82.91 मीटर फेंका और दूसरे दौर में 81.98 मीटर फेंका। अरशद का फाइनल में बेस्ट थ्रो 84.62 रहा। नदीम उन 12 थ्रोअर में से एक है, जो अपने देशों के लिए ओलंपिक स्वर्ण हासिल करने की उम्मीद कर रहे थे। नदीम जैवलिन थ्रो से पहले शॉट पुट और डिस्कस थ्रो में भी कोशिश की थी। लेकिन अंत में जैवलिन को चुना। दिसंबर 2019 में साउथ एशियन गेम्स में नया रिकॉर्ड बनाकर अरशद ने सीधे टोक्यो ओलंपिक में जगह बनाई थी। ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाले वे पाकिस्तान के पहले एथलीट हैं।












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