तिब्बतियों के खिलाफ अब कौन सी साजिश रच रहा है चीन ? बड़े पैमाने पर DNA जांच से उठे सवाल
ल्हासा (तिब्बत), 19 सितंबर: तिब्बत की राजधानी ल्हासा की करीब 9 लाख आबादी पहले से ही कोविड के नाम पर सख्त लॉकडाउन झेल रही है। इनमें से लगभग 70% लोग तिब्बती हैं, जो पिछले एक महीने से इन पाबंदियों को झेल कर ऊब रहे हैं। मजबूरी में इस समस्या को झेल ही रहे थे कि अब कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन की सरकार ने तिब्बतियों को पकड़-पकड़ कर उनका डीएनए सैंपल लेना शुरू कर दिया है। शी जिनपिंग की सरकार दरअसल उनका बायोलॉजिकल डेटाबेस तैयार कर रही है, जिसका मकसद काफी खौफनाक भी हो सकता है।

तिब्बतियों से जबरन डीएनए सैंपल ले रहा है चीन- रिपोर्ट
दो दिन पहले ही न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट छापी थी कि कोविड इंफेक्शन के नाम पर चीन के कम्युनिस्ट शासकों ने तिब्बत की राजधानी ल्हासा में पिछले महीने भर से लोगों को घरों में बंद कर रखा है। जब पूरी दुनिया कोविड वायरस के साथ जीना सीख रही है, तो चीनी शासक, तिब्बत के साथ-साथ शिंजिआंग प्रांत के लोगों पर इतना सख्त क्यों हैं, जिनकी स्थिति ऐसी है, जो अपनी बात रखने की भी हिम्मत नहीं जुटा पाते। लेकिन, इसी समय में एक और रिपोर्ट आई है, जिसके मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन की सरकार ने तिब्बती आबादी का जबरन डीएनए टेस्ट करवाना शुरू कर दिया है। चीन कुछ भी करता है, इस तरीके से करता है जिसमें संदेह ही संदेह की गुंजाइश रहती है।
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बायोलॉजिकल डेटाबेस बनाने की तैयारी
तिब्बत पर चीनी अत्याचार की बात दुनिया से छिपी हुई नहीं है। लेकिन, अब चीन के शासक तिब्बती आबादी पर नियंत्रण करने के लिए उनका बायोलॉजिकल डेटाबेस तैयार करना चाहते हैं, जिसके लिए बहुत बड़े पैमाने पर तिब्बतियों के डीएनए सैंपल जुटाए जा रहे हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक तिब्बत प्रेस ने जानकारी दी है कि ह्यूमैन राइट वॉच की एक हालिया रिपोर्ट में पूरे तिब्बत के कई कस्बों और गांवों में जबरिया डीएनए सैंपल लिए जाने की बात कही गई है। यह वो इलाके हैं, जिन्हें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चीन की सत्ता ने कथित रूप से तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र का नाम दे रखा है।

बायो-सिक्योरिटी पॉलिसी के नाम पर मनमानी-रिपोर्ट
चीन की इस हरकत से लगता है कि उसे अब अपनी टेक्नोलॉजी पर इतना भरोसा है कि वह इसके जरिए तिब्बतियों पर वैज्ञानिक तरीके से कंट्रोल करना चाहता है और बायो-सिक्योरिटी पॉलिसी के तहत दमनकारी और तानाशाही नीति के अगले चरण में प्रवेश करना चाह रहा है। तिब्बत प्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 20वें नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की तैयारी है, इससे लगता है कि बीजिंग, खासकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग चाहते हैं कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से निर्बाध रहे, जिसके माध्यम से वह अप्रत्याशित रूप से राष्ट्रपति के तौर पर अपना तीसरा कार्यकाल शुरू करने वाले हैं।

तिब्बतियों के अब खिलाफ कौन सी साजिश रच रहा है चीन ?
माना जा रहा है कि तिब्बितियों की इच्छा के बगैर यह मुहिम जिनपिंग ने इसलिए इस समय शुरू करवाई है, ताकि लोगों के मन में जीरो-कोविड पॉलिसी और कोविड से निपटने को लेकर हो रही मनमानी पर सवाल उठाने का मौका ना मिले और ना ही इसका विरोध कर रहे लोगों के साथ एकजुट होने का अवसर ही उन्हें मिल पाए। वैसे, कोविड के बहाने जो सख्तियां की गई हैं, वह तो तात्कालिक हो सकती हैं, डीएनए-प्रोफाइल तैयार करने के पीछे कोई बहुत बड़ा 'शातिर एजेंडा' हो सकता है, जिसके बारे में अभी कुछ भी अंदाजा लगाना मुश्किल है।

तिब्बतियों पर भी उइगर मुसलमानों वाला कंट्रोल ?
एचआरडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन की ओर से तिब्बत के कम से कम 14 इलाकों में मूल निवासियों के डीएनए सैंपल लिए जाने की पुष्टि हुई है। तिब्बती मीडिया की आशंका है कि इन हथकंडों के जरिए चीन स्थानीय आबादी की जिंदगी पर पूरी तरह से कंट्रोल कर लेना चाहता है, ताकि सीपीसी के खिलाफ भविष्य में भी कोई आवाज बुलंद करने की हिम्मत ना कर सके। इससे पहले चीन शिंजिआंग प्रांत में भी मुस्लिम आबादी के खिलाफ ऐसे कई हथकंडे अपना चुका है, जिनपर हो रहे अत्याचार की रिपोर्ट तो काफी भयानक हैं। वैसे जिस तरह से चीन इस समय तिब्बत पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है, उससे आशंका पैदा हो रही है कि कहीं तिब्बतियों का हाल भी वह उइगर मुसलमानों की तरह ना कर दे ?(कुछ तस्वीरें यूट्यूब वीडियो से)












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