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भारतीय मूल की ये तीन महिला वैज्ञानिक ऑस्ट्रेलिया की "Superstars Of STEM" में हुईं शामिल, जानें इनके बारे में

आस्‍ट्रेलिया के STEM सुपरस्‍टार वैज्ञानिकों ने भारतीय मूल की तीन महिलाओं ने अपनी जगह बनाते हुए देश का परचम लहराया है। इनमें नीलिमा कडियाला, डॉ एना बाबूरामनी और डॉ इंद्राणी मुखर्जी के नाम शामिल हैं।

Superstars Of STEM: भारत की महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया है। वहीं भारतीय मूल की तीन महिलाओं ने ऐसा कुछ कर दिखाया है जिससे देश का नाम और गौरान्वित हो रहा है। टेक्‍टनालॉजी , इंजीनियरों और गणितज्ञों के 60 वैज्ञानिकों में तीन भारतीय मूल की महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया के एसटीईएम के सुपरस्टार (Superstars of STEM) के रूप में चुना गया है।

Superstars Of STEM क्‍या है

Superstars Of STEM क्‍या है

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के एसटीईएम के सुपरस्टार चुनने की पहल करने का उद्देश्य वैज्ञानिकों के बारे में समाज की जेंडर धारणाओं को तोड़ना और महिला प्रतिभा को सामने लाना है।

एसटीईएम के सुपरस्टार में इन तीन भारतीय मूल की महिलाओं ने बनाया स्‍थान

एसटीईएम के सुपरस्टार में इन तीन भारतीय मूल की महिलाओं ने बनाया स्‍थान

एसटीईएम के सुपरस्टार में इन तीन भारतीय मूल की महिलाओं ने बनाया स्‍थान 2022 में एसटीईएम के सुपरस्टार के रूप में जिन भारतीय मूल की महिलाओं ने अपनी पहचान बनाई है उनमें नीलिमा कडियाला, डॉ एना बाबूरामनी और डॉ इंद्राणी मुखर्जी के नाम शामिल हैं।

नीलिमा कडियाला

नीलिमा कडियाला

नीलिमा कडियाला चैलेंजर लिमिटेड में एक आईटी प्रोग्राम मैनेजर हैं और उनके पास वित्तीय सेवाओं, सरकार, टेल्को और एफएमसीजी सहित कई उद्योगों में व्यापक परिवर्तन कार्यक्रम देने का 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वह सूचना प्रणाली में मास्टर ऑफ बिजनेस करने के लिए 2003 में एक अंतरराष्ट्रीय छात्र के रूप में ऑस्ट्रेलिया चली गईं।

 बाबूरामनी

बाबूरामनी

रक्षा विभाग - विज्ञान और प्रौद्योगिकी समूह में एक वैज्ञानिक सलाहकार हैं और मस्तिष्क कैसे बढ़ता है और कैसे काम करता है, इस बात से हमेशा आकर्षित रही हैं। बाबूरामनी ने एक बायोमेडिकल शोधकर्ता के रूप में कार्य कर रही है और वह ब्रेन के डेवलेपमेंट की जटिल प्रक्रिया और ब्रेन की चोट में योगदान देने वाले तंत्र को एक साथ जोड़ना चाहती है। बाबूरामनी ने मोनाश विश्वविद्यालय में पीएचडी पूरी की है और यूरोप में पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता के रूप में 10 साल बिताए हैं।

डॉ इंद्राणी मुखर्जी

डॉ इंद्राणी मुखर्जी

डॉ इंद्राणी मुखर्जी तस्मानिया विश्वविद्यालय में लंबे समय से भूविज्ञानी हैं और तस्मानिया में एक पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता हैं। वो इस पर काम कर रही हैं कि जैविक संक्रमण को किसने प्रेरित किया। साथ ही सार्वजनिक आउटरीच, भूविज्ञान संचार और विविधता की पहल के क्षेत्र में भी काम कर रही हैं।

ऑस्ट्रेलिया (STA) क्‍या है

ऑस्ट्रेलिया (STA) क्‍या है

बता दें 'साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑस्ट्रेलिया' (एसटीए) विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) में काम करने वाले त 60 ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों को मीडिया की सुर्खियों में आने और सार्वजनिक आदर्श बनने के लिए समर्थन करता है। वर्ष 2022 में साइंस एंड टेक्‍नालॉजी के क्षेत्र में काम करने वाली ऑस्ट्रेलिया 'साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑस्ट्रेलिया' (STA) में 105,000 से अधिक वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों काम करते हैं। द ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार साइंस, टेक्‍नालॉजी इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में काम करने वाले 60 ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों को अत्यधिक विजिबल मीडिया बनने में मदद करता है और पब्लिक रोल मॉडल चुनता है।

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