पैसिव रिवाइल्डिंग से विलुप्त हो रहे जीवों को बचाने का तरीका
तिराना, 15 अक्टूबर। हेनरिक मिगुएल परेरा, पुर्तगाल के उत्तरी पहाड़ों में एक ऐसी दादी की कहानी सुनाना पसंद करते हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी जंगली सूअर नहीं देखा था. उस दादी ने अपना पूरा जीवन कास्त्रो लेबोरिरो गांव में बिताया था. यह गांव पेनेडा-गेरेस नेशनल पार्क की चोटी पर बसा हुआ है.

यूं तो इस जगह पर सूअरों का बसेरा होना चाहिए था, लेकिन सदियों तक खेती और इंसानी हस्तक्षेप की वजह से, बड़े स्तनधारी जानवर इस क्षेत्र से गायब हो गए थे.
यह 20वीं सदी की सामाजिक और आर्थिक उथल-पुथल वाली एक घटना थी जिसने गलती से उस क्षेत्र को 'पालने' के तौर पर बदल दिया. इस प्रक्रिया को पैसिव रिवाइल्डिंग के रूप में जाना जाता है. परिस्थितिकी से जुड़े विशेषज्ञ विशेष तौर पर इसकी समीक्षा कर रहे हैं.
अब इस क्षेत्र में जंगली सूअर दिखने आम बात हो गए हैं. यहां तक कि करीब 90 वर्षों से विलुप्त हो चुका औबेक्स भी वापस आ गया है.
क्या है पैसिव रिवाइल्डिंग
पैसिव रिवाइल्डिंग एक दृष्टिकोण है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं को खुद को बहाल करने की अनुमति देता है. इसमें एक खास स्तर तक की उथल-पुथल को स्वीकार किया जाता है ताकि वन क्षेत्र को फिर से पहले जैसा किया जा सके और वहां रहने वाली प्रजातियां वापस आ सकें. हालांकि, इस दौरान प्राकृतिक गड़बड़ियां जैसे कि आग, बाढ़ और कीटों की संख्या में वृद्धि हो सकती है.
इस सप्ताह संयुक्त राष्ट्र COP15 में वैश्विक जैव विविधता पर चर्चा की जा रही है. इसमें यह भी चर्चा हो रही है कि पैसिव रिवाइल्डिंग एक ऐसा दृष्टिकोण है जिसकी मदद से विलुप्त हो रही प्रजातियों को वापस लाया जा सकता है.
लाइपजिग विश्वविद्यालय में जर्मन सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव बायोडायवर्सिटी रिसर्च में जैव विविधता संरक्षण के प्रोफेसर परेरा के अनुसार, पैसिव रिवाइल्डिंग के तीन प्रमुख घटक हैं.
इसमें पहला है वन्यजीवों को वापस आने की अनुमति देकर जैव विविधता को बहाल करना. इसमें आमतौर पर जानवरों के शिकार पर रोक लगाई जाती है. वहीं, कुछ मामलों में जानवरों को दूसरी जगहों पर भी भेजा जाता है.
दूसरा घटक है सभी परिदृश्यों को साथ जोड़ने की अनुमति देना ताकि इलाके में पौधों का विकास हो और जानवर भी प्रकृतिक आवास पा सकें. तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण घटक है आग, कीटों के विकास और बाढ़ जैसी आप्रत्याशित घटनाओं की अनुमति देना.
हालांकि सभी चीजों को बेतरतीब तरीके से होने देना बहाली के पारंपरिक तरीकों के लिए अभिशाप के समान है. यूरोपीय लोगों के लिए इसे स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है. परेरा कहते हैं, "अगर आप प्रकृति को प्यार करते हैं, तो इसे इसके हाल पर छोड़ दें."
समस्या क्या है
पैसिव रिवाइल्डिंग के पक्ष में सबसे मजबूत तर्कों में से एक है बड़े पैमाने पर अधिक व्यावहारिक दृष्टिकोणों की तुलना में कम लागत. हालांकि, इससे एक ही तरह के पौधे पूरे जंगल में फैल सकते हैं और जैव विविधता के लिए यह सही नहीं है.
परेरा जैसे वैज्ञानिक यह मानते हैं कि अगर लंबे समय तक प्रकृति के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाती है, तो इससे जरूरी विविधताएं पैदा होंगी.
बाइसन जैसे बड़े चरवाहे जीव चरागाह भूमि के क्षेत्रों को साफ कर सकते हैं और खुले पैच बना सकते हैं. इससे जैव विविधता पनप सकती है जबकि जंगली सूअर भोजन के लिए मिट्टी खोदते हैं जिससे पेड़ों की जड़ें चारों ओर फैलती हैं.
हालांकि तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन में इसे बढ़ावा देना बहुत कठिन है. एक और प्राकृतिक गड़बड़ी जो परिवर्तन और अधिक प्रजातियों की विविधता का कारण बन सकती है, वह है जंगल की आग.
परेरा ने कहा, "हमें अप्रत्याशित घटनाओं को स्वीकार करना होगा. हम यह भी नहीं जानते कि ये परिदृश्य कैसे समाप्त हो सकते हैं. हम इन पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करना चाहते हैं और प्रकृति को अपनी भूमिका निभाने देना चाहते हैं, लेकिन यह कई लोगों के लिए कठिन है."
बाकी यूरोप के लिए मॉडल
कास्त्रो लेबोरिरो के आसपास के क्षेत्र में देखे गए पैटर्न कोई खास पैटर्न नहीं हैं. यूरोप में कई जगहों पर कृषि भूमि को खाली छोड़ा जा रहा है ताकि प्रकृति वहां अपना काम कर सके.
20वीं सदी की शुरुआत के 50 सालों में यूरोप में तेजी से शहरीकरण हुए. वजह ये थी कि कृषि और वैश्वीकरण में बदलाव ने ग्रामीण जीवन शैली को अस्थिर बना दिया था. दूर स्थित पहाड़ी क्षेत्र इससे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए लेकिन इसने कृषि उत्पादन के लिए प्राकृतिक और भौतिक सीमाओं वाले क्षेत्र को प्रभावित किया.
कुछ अनुमानों में बताया गया है कि 2030 तक हंगरी के आकार के दोगुने कृषि भूमि को खाली छोड़ दिया जाएगा. साथ ही, अध्ययन से पता चलता है कि यूरोपीय संघ की कुल कृषि भूमि के कम से कम 30 प्रतिशत हिस्से को खाली छोड़ देना चाहिए. जलवायु परिवर्तन और वैश्वीकरण से यह हिस्सा और बढ़ सकता है.
क्या कृषि भूमि को खाली छोड़ देना समस्या का हल है?
रिवाइल्डिंग को लेकर ज्यादा अध्ययन नहीं किए गए हैं. इसे लेकर दुनिया के अन्य हिस्सों में परिस्थितिकीविदों का अलग दृष्टिकोण है.
इंस्टीट्यूट ऑफ जूऑलॉजी ऐंड इंपीरियल कॉलेज लंदन से पीएचडी कर रहीं बिहनो ने हेनरिक शुल्ते से कहा कि उत्तरी अमेरिका में वैज्ञानिक बड़े शाकाहारी और बड़े मांसाहारी जानवर को वापस लाने पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.
वह कहती हैं, "यूरोप ने पैसिव रिवाइल्डिंग पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है. और फिर ऑस्ट्रेलिया में इस तरह की स्थिति है जहां कई सारे मूल पेड़-पौधे और जीव बचे हुए हैं. हालांकि आपके पास आक्रामक प्रजातियां भी हैं, इसलिए कई जगहों पर पैसिव दृष्टिकोण काफी खतरनाक होगा."
ब्रिटेन में एलेस्टेयर ड्राइवर पुर्तगाल की तुलना में रिवाइल्डिंग के लिए अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाते हैं. वह यूके सरकार की एनवायरनमेंट एजेंसी फॉर इंग्लैंड और वेल्स के संरक्षण के पूर्व प्रमुख हैं.
उन्होंने कई दशकों तक पर्यावरण के संरक्षण को लेकर काम किया है. अब वह रिवाइल्डिंग ब्रिटेन के निदेशक हैं. यह एक छोटी चैरिटी है जो ब्रिटिश भूमि के 5% हिस्से को ऐसे इलाके में बदलना चाहती है जहां इंसानों का हस्तक्षेप न हो.
वह कहते हैं, "आप अचानक किसी इलाके को यूं ही पूरी तरह प्रकृति के हवाले नहीं छोड़ सकते. खासकर ब्रिटेन में जहां आपको बड़े मांसाहारी और बड़े शाकाहारी जीव नहीं हैं."
वह आगे कहते हैं, "हमारे पास भेड़िये और भालू नहीं हैं. हमारे पास बाइसन और एल्क नहीं हैं. हमारे पास बहुत कम जंगली सूअर और बीवर हैं. इसलिए हम पारिस्थितिकी तंत्र के शीर्ष के स्तर पर काफी कुछ खो रहे हैं.
प्रजातियों की इस कमी का मतलब है कि कम से कम ब्रिटेन में उन्हें फिर से पाने के लिए शुरुआती धक्के की जरूरत है. इससे तेजी से काम होता है. एलेस्टेयर कहते हैं, "हमारे पास 100 साल इंतजार करने का समय नहीं है कि चीजें धीरे-धीरे वापस आएं और प्रकृति अपना रंग दिखाए. मैं इसे तेजी से पूरा होने वाले मैराथन के रूप में देखता हूं."
रास्ते अलग, लक्ष्य एक
एलेस्टेयर के संगठन में रिवाइल्डिंग के पहले चरणों में से भेड़ को हटाना शामिल है. उनका मानना है कि भेड़ जंगली फूल और अन्य महत्वपूर्ण प्रजातियों को मिटा सकती हैं.
वहीं, दूसरी ओर बाइसन के न रहने पर, एलेस्टेयर के संगठन के लोग जमीन मालिकों को दुर्लभ मवेशियों की नस्लों को बड़े क्षेत्रों में घूमने देने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. इसी तरह, वह सूअरों की पुरानी नस्लों का इस्तेमाल जंगली सूअर की जगह पर करते हैं. साथ ही, विलुप्त हो चुके तर्पण की जगह पर टट्टू का इस्तेमाल करते हैं. तर्पण को यूरेशियन जंगली घोड़ा भी कहा जाता है.
और अगर स्थानीय पेड़ों और झाड़ियों की कमी है तो उनका समूह उनके फैलाव के लिए उन्हें फिर से लगाता है. अन्यथा, वे बाड़ हटा देते हैं, नदियों को स्वच्छंद रूप से बहने देते हैं, आर्द्रभूमि बनाते हैं और विदेशी प्रजातियों को हटाते हैं.
एलेस्टेयर और परेरा के तरीके अलग-अलग हैं लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य एक ही है. एलेस्टेयर कहते हैं, "रिवाइल्डिंग पहले से तय विचार के बारे में नहीं है जिससे आप यह तय कर सकें कि आगे क्या होने वाला है और आपके पास कौन सी प्रजातियां हैं. यह भी हो सकता है कि आप कुछ प्रजातियों को खो दें, लेकिन आप कई चीजों को फिर से पा लेंगे."
रिपोर्ट: एलिस्टेयर वॉल्श
Source: DW
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