ट्रंप टैरिफ के बाद अमेरिका से बढ़ी तल्खी तो चीन बोला- हम भारत के साथ मिलकर काम करने को हैं तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद से दोनों देशों के बीच संबंध तख्ल हो चुके हैं। अमरिका के साथ भारत की बढ़ी टेंशन के बीच अब चीन ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देश अपने मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाकर सहयोग बढ़ाना चाहते हैं। यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब चीनी विदेश मंत्री वांग यी के जल्द ही भारत दौरे पर आने की संभावना है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में शामिल होने चीन जाएंगे।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने बताया कि चीन और भारत विभिन्न स्तरों पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमति पर अमल करने, उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान बनाए रखने, राजनीतिक विश्वास मजबूत करने, सहयोग बढ़ाने और मतभेदों को सुलझाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं, ताकि चीन-भारत संबंध स्थिर रूप से विकसित हो सकें।" जियान ने कहा कि वांग यी की यात्रा से संबंधित जानकारी समय आने पर जारी की जाएगी।
दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें अगले महीने से फिर से शुरू होने की उम्मीद है। अगस्त और सितंबर में होने वाले शंघाई सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान इसकी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। इस विषय पर चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, "हमने संबंधित रिपोर्टें देखी हैं। चीन और भारत की कुल आबादी 2.8 अरब से अधिक है। सीधी उड़ानें शुरू होने से सीमा पार यात्रा, आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।" मंत्रालय ने यह भी बताया कि चीन दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों को जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के लिए भारत के साथ संपर्क में है।
जब लिन जियान से चीन-भारत संबंधों में हालिया सकारात्मक गति और अमेरिका के साथ भारत के संबंधों में चुनौतियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "चीन और भारत दोनों प्रमुख विकासशील देश और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्य हैं।" उन्होंने आगे कहा, "ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) का एक-दूसरे की सफलता में सहयोगी बनकर सहयोग करना दोनों पक्षों के लिए सही विकल्प है।"
जियान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि चीन भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है ताकि नेताओं के बीच बनी आम सहमति पर अमल किया जा सके, राजनीतिक विश्वास बढ़ाया जा सके, सहयोग का विस्तार किया जा सके और मतभेदों को उचित रूप से सुलझाया जा सके। उन्होंने शंघाई सहयोग संगठन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय और सहयोग मजबूत करने की भी बात की, जिससे चीन-भारत संबंधों का स्थिर विकास सुनिश्चित हो सके।












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