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चीन से टूटा मशहूर कंपनी Apple का दिल, समेटेगी कारोबार, भारत आने की तैयारी शुरू

बीजिंग, 22 मईः चीन में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट कहर बरपा रहा है। संघाई के बाद बीजिंग में यह बेहद तबाही मचा रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए चीन ने काफी कड़े नियम बना रखा है और इन नियमों का पालन हो इसके लिए सरकार बेहद सख्त नीति अपना रही है। कोरोना को नियंत्रित करने की चीन इस जीरो कोविड पॉलिसी को लेकर पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन तक इस नीति की आलोचना कर चुका है। इसके साथ ही चीन में व्यापार करने वाली कई विदेशी कंपनियों को भी इस नीति से नुकसान हो रहा है।

सप्लाई चेन हो रही प्रभावित

सप्लाई चेन हो रही प्रभावित

दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी एपल चीन में अपने स्मार्टफोन का प्रॉडक्शन करती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर्स आईफोन, आईपैड और मैकबुक लैपटॉप सहित एपल के 90 फीसदी से अधिक उत्पाद बनाते हैं। लेकिन चीन की जीरो कोविड पॉलिसी के कारण एपल के प्रोडक्ट के उत्पादन में बाधा आ रही है। इस कारण एपल की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में अब एपल चीन का दामन छोड़कर दक्षिण पूर्व एशिया और भारत में प्रॉडक्शन बढ़ाने की तैयारी में है।

कई जगहों पर उत्पादन हुआ ठप

कई जगहों पर उत्पादन हुआ ठप

निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक शंघाई और कुशान में लगे लॉकडाउन के कारण एपल के तीन तीन सप्लायर्स को प्रोडक्शन रोकने के लिए बाध्य किया जा चुका है। इसके कारण पेगाट्रॉन जो कि लगभग 30 फीसदी आईफोन का प्रोडक्शन करता है वह ठप हो चुका है। इसके साथ ही शंघाई और कुशान स्थित पेगाट्रॉन के दो उत्पादन स्थल को सरकारी नियमों का पालन न करने की एवज में बंद करा दिया गया है। इसके अलावा मैकबुक का निर्माण करने वाले क्वांटा और आईपैड एसेंबल करने वाले कॉम्पल को भी कोविड दिशा-निर्देशों का पालन न करने के लिए बंद कराया जा चुका है।

एपल को 8 बिलियन का घाटा

एपल को 8 बिलियन का घाटा

इस कारण एपल ने चीन की एंटी कोविड पॉलिसी सहित कई दूसरे फैक्टर्स की आलोचना की है। शंघाई में लगे कड़े लॉकडॉउन के कारण एपल को अप्रैल-जून की तिमाही में भारी घाटा होने जा रहा है। कंपनी का अनुमान है यह घाटा लगभग 8 बिलियन डॉलर तक का हो सकता है। एपल के सीएफओ लुका मेस्त्री ने कहा है कि कोविड नियमों के कारण हो रहे व्यवधानों की वजह से ग्राहकों की मांग पर भी कुछ प्रभाव पड़ा है। हालांकि चीन में एपल के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता फॉक्सकॉन ने चीनी शहर झेग्झौ मे अपना उत्पादन जारी रखा है।

एपल की पहली पसंद भारत

एपल की पहली पसंद भारत

एपल ने अपने कई कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चर्स से कहा है कि वह भारत और वियतनाम में अपना उत्पादन बढ़ाना चाहता है। एपल चीन के कड़े कोविड प्रतिबंधों से परेशान हो गया है और अब चीन के बाहर अपना उत्पादन बढ़ाना चाहता है। चीन के बाहर एपल की पहली पसंद भारत है। एपल के मैन्युफैक्चरिंग योजना से जुड़े लोगों के अनुसार, कंपनी बड़ी जनसंख्या और कम लागत के चलते भारत को अगले चीन के रूप में देखता है।

भारत में बढ़ रहा उत्पादन

भारत में बढ़ रहा उत्पादन

चीन के अलावा भारत ही एक ऐसा देश है जहां बड़ी संख्या में योग्य श्रमिक मौजूद हैं। वॉल स्ट्रीट की खबर के मुताबिक एपल, भारत को चीन के सबसे नजदीकी प्रतिद्वंदी के रूप में देखता है क्योंकि दोनों ही देशों की आबादी लगभग समान है। इसके साथ ही दोनों ही देशों में कम लागत में निर्माण कार्य पूरे हो जाते हैं। ऐसे में एपल कुछ मौजूदा सप्लायर्स से भारत में प्रोडक्शन के विस्तार के बारे में बातचीत कर रही है। बता दें कि भारत ने बीते साल एपल का कुल 3.1 फीसदी आईफोन तैयार किया है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस साल यह आंकड़ा 6 से 7 फीसदी तक जा सकता है।

चीन में लगती है कम लागत

चीन में लगती है कम लागत

एपल जैसी बड़ी कंपनियों का चीन में प्रोडक्शन करने की बड़ी वजह योग्य श्रमिकों की एक बड़ी तादाद का होना है। एक जगह पर इतनी बड़ी श्रमिकों की संख्या कई देशों की आबादी से अधिक है। एपल ने चीन में स्थानीय सरकारों के साथ मिलकर काम किया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसके ठेकेदारों के पास प्लांट्स में आईफोन और दूसरी उपकरणों के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि, लोग और अन्य सामानों की सप्लाई हो।

पहले भी जगह बदलना चाहती थी कंपनी

पहले भी जगह बदलना चाहती थी कंपनी

एपल लंबे समय से चीन से बाहर अपना ठिकाना तलाश रहा है। हालांकि उसकी कोशिशों को सबसे बड़ा झटका कोरोना महामारी ने दिया। कोरोना के कारण लगभग पूरी दुनिया में लगे लॉकडाउन की वजह से एपल को अपने प्लान को कुछ समय के लिए स्थगित करने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन अब जब बाकी दुनिया में कोरोना के मामले बेहद कम हो चुके हैं और चीन में इसका प्रकोप बढ़ता जा रहा है तो एपल चाहता है कि वह अपनी पुरानी योजना पर काम करना शुरू करे। एपल से जुड़े लोगों के अनुसार, कंपनी फिर से अपने कॉन्ट्रैक्टर्स पर दबाव बना रही है और उन्हें निर्देश दे रही है कि वे नई विनिर्माण क्षमता की तलाश करें।

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