आतंकी संगठन तालिबान को ट्विटर चलाने की पूरी आजादी, डोनाल्ड ट्रंप पर पाबंदी क्यों? अमेरिका में बड़ी बहस
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने ट्विटर से पूछा है कि अगर वो आतंकी संगठन को इजाजत दे सकता है, तो ट्रंप पर पाबंदी क्यों है? ट्विटर किसकी तरफ है, स्पष्ट करे।
वॉशिंगटन, सितंबर 14: तालिबान अफगानिस्तान में कितने इलाकों में बंदूक के दम पर जीत हासिल कर चुका है, वो महिलाओं के अधिकारों का दमन कैसे कर रहा है, वो लोगों की आजादी पर कितने तरहों से प्रहार कर रहा है, वो इन तमाम बातों की जानकारी ट्विटर के जरिए दे रहा है। आतंकी संगठन तालिबान के दर्जनों आतंकी लगातार अपनी छवि को उदार बनाने के लिए ट्विटर और फेसबुक का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं, आखिर क्यों? अमेरिका में इन दिनों ये बहस काफी जोर पकड़ चुका है।

ट्विटर पर तालिबान का प्रोपेगेंडा
ट्विटर पर अलकायदा समर्थक एक आतंकी समूह ने लिखा कि, "अफगानिस्तान जीत गया और इस्लाम जीत गया।" आतंकवादी समूह हमास ने "अफगानिस्तान की जमीन पर अमेरिकी कब्जे की हार" का जश्न मनाया। इन तमाम संदेशों में अमेरिका का अपमान किया जा रहा है और अलग अलग इस्लामिक आतंकी संगठन जीत का जश्न मना रहे हैं। कई डेमोक्रेट और उनके मीडिया सहयोगियों के लिए भी बाइडेन प्रशासन की अक्षमता चिंताजनक है। और अब अमेरिका में काफी तेजी से सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर अमेरिका से संचालित होने वाले इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर देश का अपमान किया जा रहा है और ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आखिर कैसे इन आतंकी संगठनों को ऐसा करने की इजाजत दे रहे हैं?

अमेरिका में ट्विटर पर गंभीर सवाल
अमेरिका में सवाल पूछा जा रहा है कि अगर दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी संगठन ट्विटर पर एक्टिव हो सकता है, वो ट्विटर पर अमेरिका का अपमान कर सकता है और अगर ये तमाम बातें फ्रीडम ऑफ स्पीच के तहत सही हैं, तो फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अकाउंट क्यों प्रतिबंधित है। तालिबान की क्रूरता और बेईमानी के बावजूद, तालिबान के दो प्रवक्ताओं के ट्विटर अकाउंट हैं, जिनमें जबीहुल्लाह मुजाहिद भी शामिल है, जिसके लगभग तीन लाख 20 हजार फॉलोवर्स हैं। मुजाहिद ने दर्जनों वीडियो पोस्ट किए हैं जिन्हें लाखों बार देखा जा चुका है। तालिबान के लिए ट्विटर अपने आप में काफी बड़ा मंच है, और इसके लिए उसे एक पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ता है।

ट्विटर से आतंक का प्रसार क्यों ?
अमेरिका में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब दुनियाभर के आतंकी संगठन लगातार अपने संगठन और अपनी नफरती इस्लामिक आतंकी विचारधारा का प्रसान ट्विटर के जरिए कर रहे हैं, तो फिर निष्पक्षता का दावा करने वाला ट्विटर ऐसे अकाउंट्स पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रहा है। अमेरिकी लोग कह रहे हैं कि ट्विटर का चेहरा अजीब और परेशान करने वाला है। आपको बता दें कि ट्विटर ने कहा है कि वो आतंकवादी संगठन तालिबान के प्रवक्ताओं के ट्विटर अकाउंट पर बैन नहीं लगाएगा। यानि, ट्विटर ने इस आतंकवादी संगठन को अपने शक्तिशाली मंच के इस्तेमाल करने की पूरी इजाजत दे रखी है, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप पर ट्विटर ने आजीवन बैन लगा रखा है। ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा कि, "अफगानिस्तान में स्थिति तेजी से बदल रही हैं और हम देश में लोगों को मदद और सहायता लेने के लिए ट्विटर का उपयोग करते हुए देख रहे हैं। ट्विटर की सर्वोच्च प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना है, और हम सतर्क रहते हैं।"

ट्रंप की पार्टी ने उठाया सवाल
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के नेता मेडिसन ने ट्वीट कर ये सवाल उठाया है कि पूछा है कि ऐसा क्या है कि तालिबान के प्रवक्ता ट्विटर अकाउंट चला रहे हैं और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्विटर नहीं चला रहे हैं? अमेरिका की ये शक्तिशाली टेक्नोलॉजी कंपनी किसकी तरफ है। मेडिसन के अलावा भी कई नेताओं ने ट्रंप की बैन करने और तालिबान को ट्विटर चलाने की इजाजत देने को लेकर सवाल उठाए हैं। आपको बता दें कि ट्विटर ने ये दोहरा रवैया तब अपनाया हुआ है, जब उसने तालिबान को एक आतंकवादी संगठन ही माना था, लिहाजा ट्विटर को फौरन तालिबानी प्रवक्ताओं के साथ साथ तमाम नेताओं के ट्विटर अकाउंट को बंद कर देना चाहिए था, लेकिन ट्विटर ने ऐसा नहीं किया।

ट्रंप पर कब लगा प्रतिबंध?
आपको बता दें कि इसी साल अमेरिका की संसद, जिसे कैपिटल हिल कहा जाता है, वहां डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने 6 जनवरी को दंगा किया था और संसद को बंधक बनाने की कोशिश की थी। आरोप है कि ट्रंप के एक भाषण के बाद उनके समर्थकों ने कैपिटल हिल को बंधक बनाने की कोशिश की थी। उस दंगे में कम से कम 6 पुलिसवाले मारे गये थे। संसद भवन पर हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लाया गया था, हालांकि वो अमेरिकी सीनेट में पास नहीं हो पाया। लेकिन, कैपिटल हिल हिंसा के बाद कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने डोनाल्ड ट्रंप को स्थाई तौर पर प्रतिबंधित कर दिया। जिसमें फेसबुक के अलावा ट्विटर और यूट्यूब भी शामिल हैं।

डोनाल्ड ट्रंप का नया प्लेटफॉर्म
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ट्विटर और फेसबुक पर बैन होने के बाद नया सोशल मीडिया बनाया हुआ है। मई महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नये कम्यूनिकेशन चैनल को लॉन्च किया था। डोनाल्ड ट्र्ंप की टीम ने दावा किया था कि उनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर और फेसबुक को टक्कर देगा और वहां पर बिना किसी रूकावट के डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रशंसकों से संवाद कर पाएंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नये प्लेटफॉर्म का नाम 'From the desk of donald j. trump'रखा है।












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