अमेरिका के सामने अकड़ पड़ी ढीली, दया की भीख मांग रहे तालिबानी नेता, क्या शुरू हो गये बुरे दिन?

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने भी एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि, तालिबान सरकार सभी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहती है और उसे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कोई समस्या नहीं है।

काबुल/वॉशिंगटन, दिसंबर 14: करीब पांच महीने हुए हैं, जब तालिबान ने बंदूक के दम पर अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। तालिबान ने काबुल पर कब्जा करने के बाद पूरी दुनिया के सामने हनक दिखानी शुरू कर दी और अमेरिका को त्योरियां दिखानी शुरू कर दी। लेकिन, 6 महीने बीतते बीतते तालिबान की अकड़ ढीली पड़ चुकी है और वो अमेरिका से दया की भीख मांग रहा है।

दया की भीख मांग रहा है तालिबान

दया की भीख मांग रहा है तालिबान

अफगानिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और अब तालिबान के खिलाफ देश में विद्रोह होने की आशंका काफी ज्यादा हो चुकी है। लिहाजा तालिबानी नेताओं ने अमेरिका के सामने गिड़गिड़ाना शुरू कर दिया है। तालिबान ने कहा है कि, वो दुनिया से 'दया और करूणा' की भीख मांगते हैं। अफगानिस्तान के नए तालिबान शासक लड़कियों और महिलाओं के लिए शिक्षा और नौकरियों के लिए सैद्धांतिक रूप से प्रतिबद्ध हैं, जो सत्ता में उनके पिछले शासनकाल से अलग है।'' ये बात तालिबान के एक शीर्ष नेता ने एक दुर्लभ इंटरव्यू में कही है।

फंड पर रोक हटाने की अपील

फंड पर रोक हटाने की अपील

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने भी एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि, तालिबान सरकार सभी देशों के साथ अच्छे संबंध चाहती है और उसे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कोई समस्या नहीं है। उन्होंने वाशिंगटन और अन्य देशों से आग्रह किया कि अमेरिकी बैंक में अफगानिस्तान का रखा हुआ 10 अरब डॉलर दया करके रिलीज कर दे। तालिबान ने कहा कि, 15 अगस्त को अमेरिका समर्थत राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर गुप्त तरीके से फरार हो गये और अमेरिका में अफगानिस्तान का 10 अरब डॉलर गुप्त रखा हुआ है, जिसे वो अमेरिकी और पश्चिमी देशों की सरकार से जारी करने की मांग करते हैं।

'प्रतिबंधों का फायदा नहीं'

'प्रतिबंधों का फायदा नहीं'

अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मुत्ताकी ने रविवार को विदेश मंत्रालय के भवन में साक्षात्कार के दौरान कहा कि, "अफगानिस्तान के खिलाफ प्रतिबंधों का कोई फायदा नहीं होगा।" मुत्ताकी ने कहा कि, "अफगानिस्तान को अस्थिर बनाना या कमजोर अफगान सरकार का होना किसी के हित में नहीं है, जिसके सहयोगियों में पिछली सरकार के कर्मचारियों के साथ साथ तालिबान के रैंक से भर्ती किए गए कर्मचारी शामिल हैं।

'दुनिया की नाराजगी स्वीकार'

'दुनिया की नाराजगी स्वीकार'

तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी ने लड़कियों की शिक्षा और कार्यबल में महिलाओं पर तालिबान द्वारा थोपे गये प्रतिबंधों पर दुनिया की नाराजगी को स्वीकार किया है। अफगानिस्तान के कई हिस्सों में, तालिबान के सत्ता में आने के बाद से कक्षा 7 और 12 के बीच की महिला छात्रों को स्कूल जाने की इजाजत नहीं है, और कई महिला सिविल सेवकों को घर पर रहने के लिए कहा गया है। तालिबान अधिकारियों ने कहा है कि, उन्हें इस्लाम की अपनी गंभीर व्याख्या को पूरा करने के लिए स्कूलों और कार्यस्थलों में पुरूष-महिलाओं की अलग अलग व्यवस्था बनाने के लिए समय चाहिए।

'बदल गया तालिबान'

'बदल गया तालिबान'

तालिबान ने 1996 से 2001 के दौरान जब पहली बार अफगानिस्तान पर शासन किया था, उस वक्त देश में महिलाओं और लड़कियों के लिए घर से बाहर निकलने की भी इजाजत नहीं थी। वहीं, देश के अंदर मनोरंजन के तमाम साधनों पर प्रतिबंध लगा हुआ था। वहीं, तालिबान के शासक कभी-कभी खेल स्टेडियमों में बड़ी भीड़ के सामने लोगों को फांसी देकर दुनिया को सकते में डाल दिया करते थे। लेकिन, मुत्ताकी ने कहा कि, इस बार तालिबान पिछले शासन के मुकाबले बदल गया है और इस बार तालिबान लड़कियों को शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

वक्त के साथ सीखेंगे शासन- तालिबान

वक्त के साथ सीखेंगे शासन- तालिबान

तालिबान के वरिष्ठ नेता ने कहा कि, "हमने प्रशासन और राजनीति में ... राष्ट्र और दुनिया के साथ बातचीत में प्रगति की है। प्रत्येक बीतते दिन के साथ हम अधिक अनुभव प्राप्त करेंगे और अधिक प्रगति करेंगे''। मुत्ताकी ने कहा कि, नई तालिबान सरकार के तहत, देश के 34 प्रांतों में से 10 में कक्षा 12 तक की लड़कियां स्कूल जा रही हैं और निजी स्कूल और विश्वविद्यालय बिना किसी रूकावट के चल रहे है। उन्होंने कहा कि, "इससे पता चलता है कि हम सैद्धांतिक रूप से महिलाओं की भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध हैं"। उन्होंने दावा किया कि तालिबान ने सामान्य माफी की घोषणा की है और विरोधियों को निशाना नहीं बनाया है। मुत्ताकी ने कहा कि, पिछली सरकार के नेता भी काबुल में बिना किसी खतरे के रहते हैं, हालांकि उनमें से ज्यादातर भाग गए हैं।

कथनी करनी में भारी अंतर

कथनी करनी में भारी अंतर

तालिबान के विदेश मंत्री ने भले ही कहा कि, पिछले शासन की तुलना में तालिबान बदल गया है, लेकिन असलियत काफी अलग है। पिछले महीने, अंतर्राष्ट्रीय समूह ह्यूमन राइट्स वॉच ने एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, तालिबान ने चार प्रांतों में 100 से अधिक पूर्व पुलिस और खुफिया अधिकारियों को सरसरी तौर पर मार डाला या जबरन गायब कर दिया है। हालांकि, बड़े पैमाने पर प्रतिशोध की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है।

अमेरिका की लल्लो-चप्पो

अमेरिका की लल्लो-चप्पो

इंटरव्यू के आखिर में तालिबान के विदेश मंत्री मुत्ताकी ने कहा कि, ''मेरा लास्ट प्वाइंट ये है कि, मैं अमेरिका से कहना चाहता हूं कि आप एक महान और बड़े राष्ट्र हैं और आपके पास पर्याप्त धैर्य और बड़ा दिल होना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों और निर्वासन के आधार पर अफगानिस्तान पर नीतियां बनाने और समाप्त करने का साहस किया जा सके। मतभेदों को दूर करें और हमारे बीच की दूरियों को कम करें और अफगानिस्तान के साथ अच्छे संबंध चुनें।"

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