तालिबान ने पाकिस्तानी काउंसिल जनरल को डंडों से पीटा, अफगानिस्तान-पाकिस्तान में बढ़ सकता है तनाव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध हाल के दिनों में तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को पत्र लिखकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को गिरफ्तार करने की मांग की थी।
काबुल, सितंबर 23: अफगानिस्तान की नई सरकार तालिबान और पाकिस्तान के बीच संबंध तो पिछले कई महीने से खराब चल रहे हैं, लेकिन राजनयिक की पिटाई के बाद माना जा रहा है, कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान आमने- सामने आ सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने फर्जी पासपोर्ट बेचने के कथित आरोप में संलिप्तता के लिए जलालाबाद में पाकिस्तान के महावाणिज्य दूतावास के काउंसिल जनरल एबादुल्लाह की पिटाई की है और उन्हें हिरासत में ले लिया है।

राजनयिक की तालिबान ने की पिटाई
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान काउंसिल जनरल एबीदुल्लाह रात के खाने के लिए अफगानिस्तान के जलालाबाद प्रांत के नंगरहार चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख गुल मुराद की मेजबानी कर रहे थे और उसी वक्त तालिबान के अधिकारियों ने वहां पर छापा मारा और फर्जी पासपोर्ट बेचते हुए पाकिस्तानी राजनयिक को रंगे हाथों पकड़ लिया और फिर कमरे में बंद कर उनकी पिटाई की गई। तालिबान के सूत्रों ने कहा कि, "अफगान तालिबान ने जलालाबाद में गुल मुराद के वाहन पर छापा मारा और कथित तौर पर नकली पाकिस्तानी और अफगानिस्तान के पासपोर्ट बरामद किए।" सूत्रों ने कहा कि मुराद को महावाणिज्य दूतावास के बाहर जाते समय गिरफ्तार किया गया। वहीं, अफगानिस्तान के पत्रकार बिलाल सरवरी ने तालिबान सूत्रों से हवाले से दावा किया है, कि पाकिस्तानी राजनयिक की डंडों से पिटाई की गई है।

फर्जी पासपोर्ट बेचने का आरोप
सूत्रों ने कहा कि, तालिबान ने दावा किया कि मुराद ने पाकिस्तानी राजनयिक एबादुल्लाह की मदद से अफगान नागरिकों को पासपोर्ट बेचे। तालिबान ने दावा किया है कि, "एबादुल्लाह ने जलालाबाद में पाकिस्तानी महावाणिज्य दूतावास में अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग किया।" वहीं, अफगान पत्रकार बिलाल सरवरी ने कहा कि, तालिबान ने पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम का गठन किया है, जो काबुल से जलालाबाद पहुंचकर मामले की जांच कर रही है और पाकिस्तानी राजनयिक को गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान काउंसिल जनरल एबादुल्लाह के ड्राइवर को भी तालिबान ने अधिकारियों ने पिटाई की है। वहीं, रिपोर्ट ये भी है, कि पाकिस्तानी राजनयिक ने मारपीट के बाद तालिबान सरकार के पास अपना विरोध दर्ज कराया है, जिसमें कहा गया है, कि एक देश किसी दूसरे देश के राजनयिक के साथ अभद्रता नहीं कर सकते हैं।
तनावपूर्ण होते दोनों देशों में संबंध
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध हाल के दिनों में तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को पत्र लिखकर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर को गिरफ्तार करने की मांग की थी, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी है। जवाब में, तालिबान के प्रवक्ता और तालिबान के चेहरे सुहैल शाहीन ने पाकिस्तान को "बिना सबूत के दावा न करने" की चेतावनी दी थी। शाहीन ने कहा कि, "हमारी प्रतिबद्धता है कि हम किसी को भी किसी अन्य देश के खिलाफ अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल नहीं करने देंगे।" हम पाकिस्तान को चेतावनी देते हैं कि वह बिना किसी सबूत के कोई दावा न करे, क्योंकि इससे द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बिना किसी सबूत के दावे किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करते...हमारे पास अजहर की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं है।

शारजाह में भी हुई थी मारपीट
शारजाह में क्रिकेट मैच के दौरान एक और तनावपूर्ण प्रकरण देखा गया, जिसमें अफगानिस्तान एशिया कप टूर्नामेंट में बने रहने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा था और जब अफगानिस्तान मैच हार गया, तो अफगानिस्तान के दर्शकों ने पाकिस्तानी दर्शकों की स्टैंड में ही पिटाई कर दी थी। लेकिन, मामला यहीं शांत नहीं हुआ और तालिबान ने इसके लिए पाकिस्तान सरकार को लिखित में जवाब मांगा था। पाकिस्तानी सरकारी मीडिया ने दिखाया कि कैसे अफगानी भीड़ ने अपनी हार के बाद स्टेडियम में तोड़फोड़ करते हुए हिंसक रूप से तोड़-फोड़ की और कुर्सियों और बोतलों को फेंक दिया। वहीं, पाकिस्तान में ट्विटर पर अफगानिस्तान के खिलाफ #NamakHaram जैसे अपमानजनक ट्रेंड चलाए गये और पाकिस्तानी मीडिया ने तब अफगानों के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर दिया।

जवाहिरी की मौत पर पाकिस्तान का हाथ
वहीं, पिछले महीने तालिबान ने अमेरिकी मिसाइल हमले में मारे गये अलकायदा प्रमुख अयमान अल जवाहिरी की मौत को लेकर पाकिस्तान पर बड़ा आरोप लगाया था। तालिबान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा था कि, पाकिस्तान ने अमेरिकी ड्रोन को अफगानिस्तान तक पहुंचने के लिए अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति दी थी, जिसकी वजह से अमेरिका अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हमला करने में कामयाब हुआ है। हालांकि, पाकिस्तान ने पिछले हफ्ते काबुल में अमेरिकी हवाई हमले के बाद अपने हवाई क्षेत्र से अमेरिकी ड्रोन भेजने की बात से इनकार कर दिया था।












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