तालिबान की जीत के बीच काबुल से अपने दूतावासों को ख़ाली करने में लगे कई देश

अफ़ग़ानिस्तान में राजनयिक और कर्मचारियों को देश से बाहर ले जाने के लिए अमेरिकी सेना की टुकड़ियां वहाँ पहुंच रही हैं.

दूसरे कई देश भी अपने दूतावास में मौजूद कर्मचारियों को लेकर चिंतित हैं और उन्हें वहां से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में हैं.

taliban in afghanistan countries engaged in evacuating their embassy from Kabul

इसी बीच तालिबान अपनी बढ़त बना रहा है और कई देशों को अपने कर्मचारियों को वापस लाने में दिक्क़तें भी हो रही हैं.

तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े शहरों पर शुक्रवार को कब्ज़ा कर लिया. सरकारी सुरक्षाबल तालिबान के लड़ाकों का मुकाबला नहीं कर पाए और अब क़यास लगाए जा रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर भी जल्द ही तालिबान कब्ज़ा कर लेगा.

एक सरकारी अधिकारी ने शुक्रवार को पुष्टि की कि दक्षिण के आर्थिक केंद्र कंधार पर तालिबान का कंट्रोल हो गया है.

तालिबान लड़ाके काबुल की सीमा से लगी लोगार की प्रांतीय राजधानी फूल-ए-आलम में भी घुस गए हैं.

लोगार से काबुल सिर्फ़ 50 किलोमीटर दूर है और यहाँ से काबुल केवल दो घंटे में पहुंचा जा सकता है.

राजनयिकों और कर्मचारियों को बाहर निकालने की कोशिश

ये दूसरे देशों के लिए चिंता की बात है क्योंकि देश की राजधानी में कई देशों के दूतावास होते हैं और कई राजनयिक और कर्मचारी वहाँ काम करते हैं.

अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि ये चिंता की बात है कि तालिबान, जिसे 2001 में 11 सितंबर के हमले के बाद हटा दिया गया था, वो कुछ ही दिनों में काबुल में दाख़िल हो सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को कहा कि अमेरिकी राजनयिक स्टाफ़ को निकालने के लिए 3000 सुरक्षाबल भेजे जाएंगे. पेंटागन ने कहा है कि हफ़्ते के अंत तक वो वहाँ पहुँच जाएंगे.

https://twitter.com/DeptofDefense/status/1426275888195325956

पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने शुक्रवार को कहा, "काबुल पर अभी तुरंत ख़तरा नहीं है, लेकिन ये साफ़ है...आप अगर तालिबान को देखें, तो समझ में आएगा कि वो काबुल को अलग-थलग करना चाहते हैं."

वाइट हाउस ने कहा कि बाइडन अमेरिकी नागरिकों को वहां से निकालने की कोशिशों पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं.

ब्रिटेन ने भी अपने अधिकारियों को निकालने और उनकी मदद के लिए सैन्य ऑपरेशन की पुष्टि की है.

रॉयटर्स के मुताबिक उन्होंने एक एडवाइज़री देखी है, जिसमें अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों से कहा कि दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नष्ट करने की सुविधाएं मौजूद हैं ताकि, "वहां मौजूद संवेदनशील सामग्री को नष्ट किया जा सके."

अमेरिका ने कहा कि वो अफ़ग़ानिस्तान में "मौजूदगी कम करने के लिए" तय नियमों का पालन कर रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत पिछले एक महीने में दो वाणिज्यिक दूतावास समेट चुका है

काबुल में भारतीय दूतावास ने अफ़ग़ानिस्तान में सभी भारतीयों से आग्रह किया है कि बढ़ते संघर्ष के बीच व्यावसायिक उड़ानें बंद होने से पहले वे तत्काल वहाँ से निकलने की व्यवस्था कर लें.

https://twitter.com/IndianEmbKabul/status/1425051973619957761

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि वो अपने अधिकारियों को देश से नहीं निकाल रहा है लेकिन दूसरे शहरों में मौजूद लोगों को काबुल भेजा जा रहा है. कई दूसरे पश्चिमी देश भी अपने दूतावास के कर्मचारियों को वापस बुला रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने चेतावनी दी है कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं और सभी पक्षों से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है."

गुटरेस ने न्यूयॉर्क में पत्रकारों से कहा, "ये वक़्त है लड़ाई रोकने का. ये समय है गंभीर बातचीत शुरू करने का. ये अफ़गानिस्तान में गृह युद्ध को रोकने और उस देश को अकेला छोड़ देने से बचने का समय है."

उन्होंने एक ट्विट में लिखा, "अफगानिस्तान नियंत्रण से बाहर हो रहा है. हर दिन का संघर्ष नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों पर भारी पड़ रहा है. मैं सभी पक्षों को नागरिकों की रक्षा करने के उनके दायित्व की याद दिलाता हूँ और मैं तालिबान से आह्वान करता हूँ कि वह इस हमले को तुरंत समाप्त करें और शांति के लिए बातचीत पर लौटें."

https://twitter.com/antonioguterres/status/1426272154140692493

संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी देशों से भी अपनी सीमाएं खुली रखने का आग्रह किया है.

कई दूसरे इलाक़ों पर कब्ज़ा

पश्चिम में हेरात पर भी तालिबान ने कब्ज़ा कर लिया है. प्रांत के एक अधिकारी ग़ुलाम हबीबी हाशमी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "शहर किसी युद्ध के मैदान की तरह लग रहा है, एक भूतिया शहर."

"परिवार या तो भाग गए हैं, या कहीं छिपे हुए हैं."

तालिबान के लड़ाकों ने कंधार के नज़दीकी शहर लश्कर गाह पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है. इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान की कुल प्रांतीय राजधानियों में से एक तिहाई पर तालिबान लड़ाकों का कब्जा हो गया है.

अफ़ग़ानिस्तान के उप राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी द्वारा सैन्य बलों के साथ आयोजित एक मीटिंग के बाद कहा कि उन्हें सेना पर गर्व है और सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि वो तालिबान से लड़ सके.

उधर ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने चेतावनी दी कि तालिबान के तेज़ी से बढ़ने के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान "गृह युद्ध की ओर बढ़ रहा है." अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल ने एक बयान में वहां की स्थिति की तुलना वियतनाम में हुई हार से की.

2,50,000 लोगों को छोड़ना पड़ा घर

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, बीते एक महीने में एक हज़ार से ज़्यादा आम लोगों की मौत हुई है. तालिबान ने पिछले कुछ दिनों में मीडिया चीफ़ समेत कई राजनीतिक हत्याओं को भी अंजाम दिया है.

अभी तक 2,50,000 लोग अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं. अमेरिकी सेना की 20 साल बाद देश छोड़कर जा रही है, जिसके कारण तालिबान का दबदबा बढ़ रहा है और आशंका जताई जा रही है कि साल 2001 में सेना के आने के बाद मानवाधिकारो को लेकर जो सुधार हुए थे, वो सब ख़त्म हो जाएंगे.

1990 में तालिबान के शासन के दौरान, महिलाओं को खुद को पूरी तरह से बुरक़े से ढकना पड़ता था, 10 साल से अधिक उम्र की लड़कियों को शिक्षा पर पाबंदी थी और नियमों का उल्लंघन का करने पर कड़ी सज़ा दी जाती थी, जिसमें सार्वजनिक फांसी जैसी सज़ा शामिल थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+