चीन ने किया तालिबान के समर्थन का ऐलान, ग्लोबल टाइम्स ने कहा- तालिबान को दुश्मन बनाना हित में नहीं

चीन की सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में कहा है कि तालिबान को दुश्मन बनाना चीन के हित में नहीं है।

बीजिंग, जुलाई 19: तालिबान को विश्व की दूसरी सबसे बड़ी शक्ति और अफगानिस्तान के पड़ोसी देश चीन का साथ मिल गया है। चीन ने साफ कर दिया है कि तालिबान से दुश्मनी करना चीन के राष्ट्रीय हक में नहीं है, लिहाजा वो तालिबान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध कायम करेगा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के जरिए चीन ने एक तरह से तालिबान को लेकर अपनी विदेश नीति का इजहार किया है, जिसमें चीन के राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए तालिबान से दोस्ती करने की बात कही गई है।

तालिबान से दोस्ती करेगा चीन

तालिबान से दोस्ती करेगा चीन

पाकिस्तान पहले से ही खुलेआम तालिबान की मदद कर रहा है और जब चीन ने तालिबान को खुला समर्थन दे दिया है, ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में तालिबान और ज्यादा आक्रामक हो जाएगा। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने अपनी संपादकीय में लिखा है कि 'कुछ लोगों ने तालिबान को चीन के दुश्मन के तौर पर देखते हैं और चीन के राष्ट्रीय हित के खिलाफ बताते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि ऐसी सोच सिर्फ इमोशनल सोच है, जिसकी मेरी सोच में दूर-दूर तक कोई स्थान नहीं है।'

ग्लोबल टाइम्स की संपादकीय

ग्लोबल टाइम्स की संपादकीय

ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने अपने संपादकीय में लिखा है कि 'वास्तविक स्थिति ये है कि अब अमेरिका ने भी तालिबान को एक आतंकी संगठन कहना बंद कर दिया है और उससे बातचीत में शामिल है। ब्रिटिश रक्षा मंत्री बेन वालेस ने हाल ही में कहा था कि अगर अफगानिस्तान में तालिबान सत्ता में आता है तो ब्रिटेन तालिबान के साथ काम करेगा। ऐसे में अगर चीन इस समय तालिबान के खिलाफ हो जाता है, तो यह चीन के लिए अपने आप में एक कूटनीतिक जाल बनाने के समान होगा और तालिबान को दुश्मन कहने वाली नीति पर मुझे विश्वास नहीं है'।

चीन के लोग मुंह रखे बंद

चीन के लोग मुंह रखे बंद

ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने लिखा है कि ''चीन के कुछ लोग अफगानिस्तान की स्थिति को नहीं समझते हैं और उन्होंने तालिबान के खिलाफ घृणा पाल लिया है। उन्होंने बामियान बुद्ध के विनाश के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया है। इसके साथ ही पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मुवमेंट (ईटीआईएम) के लिए भी वो तालिबान को जिम्मेदार ठहराते हुए तालिबान से नफरत करते हैं, ऐसी बातें समझ में तो आती हैं, लेकिन जहां तक मैं जानता हूं, तालिबान और ईटीआईएम के बीच संबंध को इस तरह परिभाषित नहीं किया जा सकता है, कि तालिबान शिनजियांग में आतंकवादी हमले शुरू करने वाले ईटीआईएम का समर्थन करता है।'' ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि '' तालिबान धार्मिक आधार पर चरमपंथ की तरफ तो जाता है और आतंकी विचारधारा को भी समर्थन करता है, लेकिन उसकी विचारधारा किस हद तक आतंकी है, इसपर विश्लेषण होना जरूरी है''

चीन से तालिबान के संपर्क

चीन से तालिबान के संपर्क

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि, हाल के सालों में चीन में कुछ सरकारी विभागों के तालिबान के साथ औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह के संपर्क रहे हैं, और चीनी सरकार ने कभी भी तालिबान को लेकर एक खुला और औपचारिक निष्कर्ष नहीं निकाला है, और जब अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश तालिबान को आतंकी संगठन करार नहीं दे रहे हैं, तो भला चीन, तालिबान को आतंकी संगठन क्यों कहे?

''आंतरिक मामलों में दखल नहीं''

''आंतरिक मामलों में दखल नहीं''

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि '' चीन अफ़ग़ानिस्तान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देता है और शांतिपूर्ण अंदाज में अफगानिस्तान की समस्याओं का समाधान का समर्थन करता है, लेकिन ये जानना जरूरी है कि अफगानिस्तान सरकार और तालिबान दो अलग अलग संगठन हैं, और दोनों का एक दूसरे से संबंध नहीं है। पाकिस्तान एक तरफ तालिबान का विरोध करता है, जबकि पाकिस्तान पूर्व अफगान तालिबान को आधिकारिक तौर पर मान्यता दे रहा था और आशंका इस बात की है कि उत्तरी पाकिस्तान में जो चीन के 9 इंजीनियर आतंकी हमले में मारे गये हैं, उसके पीछे पाकिस्तानी तालिबान समूह है।'' संपादयीक में लिखा गया है कि ''अफगानिस्तान के आसपास की स्थिति काफी जटिल है, लेकिन चीन स्पष्ट रूप से जानता है कि उसके राष्ट्रीय हित क्या हैं। इस संकट की घड़ी में हमें अपने लिए दुश्मन नहीं बनाने चाहिए। विशेष रूप से हमें तालिबान से दुश्मनी मोल नहीं लेनी चाहिए, जिसका अफगानिस्तान में अत्यधिक प्रभाव बन रहा है और जो शिनजियांग में मुसीबत पैदा कर सकता है।''

बदल रही है अंतर्राष्ट्रीय स्थिति

बदल रही है अंतर्राष्ट्रीय स्थिति

ग्लोबल टाइम्स के संपादक ने लिखा है कि ''विश्व में अंतर्राष्ट्रीय संबंध हर समय बदल रहे हैं और फायदाजनक कूटनीति का तभी इस्तेमाल किया जा सकता है, जब वो राष्ट्रीय हित के साथ हो। कुछ लोग चीन को तालिबान का दुश्मन बनाने की वकालत करते हैं, जो अमेरिका के हितों के पक्ष में है और उससे चीन को कोई फायदा नहीं है।'' संपादक ने लिखा है कि ''चीन की माहिर राजनीतिक टीम इंटरनेट पर प्रसारित कुछ चरमपंथी आवाजों से प्रभावित नहीं होने वाली और वो अफगानिस्तान में चीन के फायदे को देखेंगे और अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए काम करेंगे।''

ग्लोबल टाइम्स के लेख का मतलब

ग्लोबल टाइम्स के लेख का मतलब

ग्लोबल टाइम्स की संपादकीय मतलब चीन की सरकार का विचार होता, जिसमें साफ तौर पर तालिबान को अफगानिस्तान का अगला नेता बना दिया गया है और चीन ने साफ कर दिया है कि तालिबान चीन का दुश्मन नहीं है और तालिबान शिनजियांग में चीन को परेशान ना करे। इसके साथ ही चीन में तालिबान का विरोध करने वाले लोगों को भी इस संपादकीय के जरिए मुंह बंद रखने का संदेश दिया गया है और साफ कर दिया गया है की चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तालिबान के साथ मिलकर काम करेगी। ऐसे में मान लेना चाहिए कि आने वाले वक्त में अफगानिस्तान में तालिबान और ज्यादा आक्रामक होगा और इस बात से भी इनकार नहीं किया जाना चाहिए कि पाकिस्तान के जरिए तालिबान तक चीन हथियार और पैसे दोनों पहुंचाए।

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