कानून व्यवस्था संभालने में नाकाम साबित हुआ तालिबान, अफगानिस्तान में चारों तरफ अराजकता

अफगानिस्तान की कानून और अफगानिस्तान की कानून और सुरक्षा व्यवस्था संभालने में तालिबान नाकाम हो गया है।

काबुल, नवंबर 26: अफगनिस्तान में कानून व्यवस्था संभालने से लेकर देश चलाने में तालिबान बुरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है, जिसकी वजह से अफगानिस्तान की स्थिति काफी ज्यादा खराब होती नजर आ रही है। घटती अर्थव्यवस्था, व्यापारियों और नागरिकों के लिए अनिश्चित सुरक्षा स्थिति के साथ, नए तालिबान शासन के तहत पूरे अफगानिस्तान में कानून और व्यवस्था नाजुक बनी हुई है। ऐस में आम अफगानों पर समस्याओं का अंबार गिर गया है।

शासन चलाने में नाकाम तालिबान

शासन चलाने में नाकाम तालिबान

तालिबान शासन में देश के अंदर सुरक्षा कितनी खराब हो गई है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, तालिबान ने व्यापारियों की सुरक्षा करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। अफगानिस्तान के अंदर अब व्यापारियों को अपनी सुरक्षा करने के लिए हथियार रखने की इजाजत दे दी गई है। खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसान अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने घोषणा की है, कि वे तकनीकी मुद्दों को हल करने के बाद अफगान व्यापारियों को हथियार ले जाने की अनुमति देंगे। 15 अगस्त को तालिबान ने देश की राजधानी काबुल पर कब्जा कर लिया था और तालिबानी लड़ाकों के अलावा देश में किसी भी शख्स के हथियार रखने पर पाबंदी लगा दी थी, लेकिन अब एक बार फिर से व्यापारियों को अपने साथ हथियार रखने की इजाजत दी गई है।

कौन करेगा किसकी सुरक्षा?

कौन करेगा किसकी सुरक्षा?

खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खोस्तई ने एक बयान में कहा कि, अफगानिस्तान का इस्लामी अमीरात अफगान व्यापारियों और निवेशकों की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करने और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इनके अलावा तालिबान शासन देश के आम नागरिकों, खासकर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में बुरी तरह से फेल साबित हुआ है। जिओपोलिटिका डॉट इंफो में लिखते हुए, डि वैलेरियो फैब्री ने कहा कि तालिबान अब देश के शासन के प्रबंधन को लेकर सबसे बड़ी परीक्षा का सामना कर रहा है। इसके साथ ही तालिबान एक 'बदनाम शासन' होने के टैग के साथ संघर्ष कर रहा है, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने बहिष्कार कर रखा है।

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    आईएसआईएस से गंभीर चुनौती

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    रिपोर्ट में कहा गया है कि, "इसके अलावा, इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) द्वारा बढ़ते आतंकवादी हमलों ने तालिबान की क्षमता और धार्मिक अल्पसंख्यकों और अफगान नागरिकों की रक्षा करने की इच्छा पर सवाल उठाए हैं। जब तक तालिबान इन चुनौतियों से निपटने के लिए कदम नहीं उठाता, अफगानिस्तान की स्थिति बदतर होगी और देश गृहयुद्ध की आग में जलने लगेगा।"
    अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था, जो तालिबान के काबुल के अधिग्रहण के बाद से पहले से ही बद से बदतर होती जा रही है, आने वाले महीनों में 30 प्रतिशत या उससे अधिक तक सिकुड़ सकती है, जिसको लेकर आईएमएफ ने चेतावनी जारी की है।

    पतन के कगार पर अफगानिस्तान

    पतन के कगार पर अफगानिस्तान

    एशिया टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, जब से तालिबान ने अफगानिस्तान में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को उखाड़ फेंका है, उसके बाद से देश की वित्तीय स्थिति लगातार पूर्ण आर्थिक पतन की ओर बढ़ रही है। एशिया टाइम्स ने आईएमएफ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि, संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी के मुताबिक, अफगानिस्तान में भयावह अकाल की स्थिति हो सकती है।

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