तालिबान बोला, भारत के साथ रिश्ते अहम, हम पहले की तरह ही संबंध को बनाए रखना चाहते हैं
नई दिल्ली, 30 अगस्त। अफगानिस्तान में अपना राज स्थापित करने के बाद तालिबान ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। तालिबान की ओर से कतर में कहा गया है कि भारत के साथ इस उपमहाद्वीप में संबंध काफी अहम हैं, हम भारत के साथ सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक, व्यापारिक रिश्ते पहले की तरह बरकरार रखना चाहते हैं। दोहा में तालिबान के डेप्युटी हेड शेर मोहम्मद अब्बास स्तानकजई ने भारत के साथ रिश्तों को लेकर अहम बयान दिया है। 46 मिनट के वीडियो में मोहम्मद अब्बास ने पश्तो भाषा में यह भाषण शनिवार को दिया, जिसके सोशल मीडिया और मिलि टीवी पर प्रसारित किया गया।
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दिलचस्प बात यह है कि शेर मोहम्मद अब्बास ने देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी में अफगान आर्मी कैडेट टीम का हिस्सा थे। 1996 में भी उन्होंने इसी तरह का बयान दिया था जब अफगानिस्तान में तालिबान का राज आया था और इस दौरान वह कार्यकारी सरकार के उप विदेश मंत्री थे। इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने अपने सभी राजनयिक दस्ते को काबुल दूतावास से वापस बुला लिया है। अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने के बाद तालिबान की ओर से यह पहला बयान भारत के लिए आया है, लेकिन भारत सरकार अभी भी इंतजार करके स्थिति पर नजर बनाने पर ज्यादा फोकस करेगी।
भारत के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते की तालिबान की कवायद की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि फिलहाल भारत यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की अध्यक्षता कर रहा है। लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और तालिबान के बीच रिश्तों में अमेरिका की भूमिका काफी अहम रहने वाली है। 16 अगस्त को यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से जो बयान जारी किया गया था उसमे तालिबान से अपील की गई थी कि वह आतंकवाद को अपनी जमीन पर फलने-फूलने ना दे। लेकिन 27 अगस्त को जो बयान जारी किया गया उमसे कहा गया कि किसी अफगान ग्रुप या व्यक्ति को आतंकवादियों का साथ नहीं देना चाहिए।












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