तालिबान ने बहुविवाह पर लगाया प्रतिबंध, क्या भारत में भी एक से ज्यादा शादियों पर लगेगी रोक?
तालिबान के सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने एक आदेश जारी करते हुए संगठन के सदस्यों के एक से ज्यादा शादी करने पर रोक लगा दिया है। सुप्रीम लीडर ने बहुविवाह को गैरजरूरी और फिजूलखर्च बताया है।
काबुल, 22 मईः अफगानिस्तान में लंबे समय से बहुविवाह प्रथा प्रचलित है, लेकिन इससे उलट तालिबान ने इसे प्रतिबंधित कर दिया है। तालिबान के सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा ने एक आदेश जारी करते हुए संगठन के सदस्यों के एक से ज्यादा शादी करने पर रोक लगा दिया है। सुप्रीम लीडर ने बहुविवाह को गैरजरूरी और फिजूलखर्च बताया है।

तालिबान के सदस्यों पर लागू होगा नियम
हालांकि अब अखुंदजाता का ये आदेश फिलहाल तालिबान के सदस्यों पर ही लागू होगा। तालिबान के आदेश में आगे कहा गया है कि अम्र अल मरुफ मंत्रालय इसकी लगातार जांच करेगा और नियम का उल्लंघन करने वालों की पहचान करेगा। कानून की तौहीन करने वाले लोगों की सूचना संगठन के नेतृत्व तक पहुंचाएगा। तालिबान के इस फैसले के पीछे की वजह संगठन में बढ़ते भ्रष्टाचार को भी माना जा रहा है।

भ्रष्टाचार है बड़ी वजह
तालिबानी सदस्य शादी करने के लिए लड़की के परिवार को दहेज देने या अपनी सभी पत्नियों और बच्चों का खर्च उठाने के लिए भ्रष्टाचार करने पाए गए हैं, इस कारण यह फैसला लिया गया है। तालिबानी नेतृत्व का मानना है कि शादी समारोह में बड़े स्तर पर पैसा खर्च करने से विपक्षी समूहों को आलोचना करने का मौका मिल जाता है। बतादें कि अफगानिस्तान के समाज में बहुविवाह आम बता है। तालिबान के कई वरिष्ठ सदस्यों की एक से अधिक पत्नियां हैं। संगठन के संस्थापक मुल्लाह मोहम्मद ओमर की कथित तौर पर तीन बीवियां हैं। इनमें से एक आतंकवादी ओसामा बिन लादेन की बेटी भी है।

भारत में बहुविवाह की प्रथा
बतादें कि भारत में भी मुसलमानों और कुछ आदिवासी समूहों में बहुविवाह की प्रथा प्रचलित है। कई संगठन बहुविवाह पर रोक लगाने की मांग करते रहे हैं। बहुविवाह को रोकने के पक्ष में महिलाओं पर अत्याचार ओर लगातार जनसंख्या में वृद्धि की दलील दी जाती है। लेकिन ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड सहित भारत के रूढ़िवादी मुसलमानों का मानना कि इस पर रोक लगाना उनके धर्म में हस्तक्षेप करना है। गौरतलब है तुर्की और ट्यूनीशिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में बहुविवाह पर रोक लगा हुआ है।

भारत में सात दशकों से चल रहा विवाद
संयुक्त राष्ट्र ने भी बहुविवाह प्रथा को महिलाओं के विरूद्ध स्वीकार न किया जाने वाला भेदभाव बताया है। भारत में बहुविवाह से जुड़ा विवाद बीते सात दशकों से चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी ने पूरे देश में समान नागरिक संहिता यानी कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का वादा किया है। इस कानून के अनुसार विवाह, तलाक और संपत्ति के उत्तराधिकार के नियम अलग अलग धर्मों के कानूनों द्वारा तय होने के बजाय एक ही कानून से तय होंगे। ऐसे में बहुविवाह प्रथा भी कानूनी रूप से प्रतिबंधित माना जाएगा।

बहुविवाह की इजाजत देता है कुरान
वहीं, बहुविवाह कानून पर इस्लाम से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि मुसलमान मर्दों को चार महिलाओं से शादी करने की इजाजत उनके कुरान ने दी है। हालांकि बहुविवाह करना इतना आसान भी नहीं हैं। बहुविवाह के लिए कुरान में कड़ी शर्तें और प्रतिबंध शामिल किए गए हैं। कुरान के मुताबिक एक पुरूष सिर्फ अनाथ और विधवा महिला से ही शादी कर सकता है। एक सामान्य मुसलमान पुरूष द्वारा एक से अधिक शादियां करना और उनके बच्चों के खर्चे उठाना संभव ही नहीं है। अगर मुसलमानों में बहुविवाह इतना प्रचलित होता तो इसके कई मामले दिखते। मगर मुसलमानों द्वारा एक से अधिक शादियां करना दुर्लभ ही है।












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