Syria Civil War: सीरिया बंदरबांट का अंतिम विजेता तुर्की? अर्दोआन ने क्यों लगाई गृहयुद्ध की आग, ये रहे 5 वजह
Syria Civil War: सीरिया में फिर से गृहयुद्ध शुरू हो चुका है, जिसमें सरकारी सेना और विद्रोहियों की लड़ाई में 300 से ज्यादा लोग अभी तक मारे जा चुके हैं और हजारों लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा है। सीरिया की लड़ाई में दुनिया की कई शक्तियां शामिल हो चुकी हैं।
और तु्र्की को एक बड़ा खिलाड़ी माना जा रहा है। पिछले हफ्ते एक हल्के हमले में सीरियाई विपक्षी बलों ने अलेप्पो के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा कर लिया, जो कभी देश का सबसे बड़ा शहर था।

सीरिया गृहयुद्ध पटकथा का लेखक तुर्की?
यह हमला सीरियाई तानाशाह बशर अल-असद की देश पर पकड़ के लिए एक बड़ा झटका है, जो पिछले चार सालों से सुरक्षा के घेरे में हैं, और दशक भर से चल रहा सीरियाई गृह युद्ध लगभग रुका हुआ था। रूस, ईरान और क्षेत्र में ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के समर्थन से, असद के शासन ने युद्ध के पहले भाग में गंभीर झटके झेलने के बाद देश के ज्यादातर हिस्से पर नियंत्रण हासिल कर लिया था।
लेकिन अब, जबकि रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उलझा हुआ है और ईरान और उसके प्रॉक्सी इजरायल के साथ वर्षों से चल रहे युद्ध के घावों को चाट रहे हैं, तो सीरियाई विपक्षी ताकतों को सिर उठाने का मौका मिल गया है।
हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेतृत्व वाली सीरियाई विपक्षी ताकतें, जिसके एक वक्त अलकायदा के साथ मजबूत संबंध रहे हैं, उसने असद के शासन में सुरक्षा के बुलबुले को फोड़ दिया है, और सारे संकेत तुर्की की तरफ इशारे कर रहे हैं।
सीरिया में चल रहे जटिल छद्म युद्ध में, रूस-ईरान ब्लॉक राष्ट्रपति असद का समर्थन करता है, और तुर्की ने लंबे समय से असद विरोधी ताकतों का समर्थन किया है। हालांकि, दोनों पक्षों ने कई बार कुर्दों के साथ टकराव किया है, जो एक अमेरिकी समर्थित जातीय समूह है, जो उत्तरपूर्वी सीरिया में कुछ बड़े क्षेत्रों को कंट्रोल करता है।
लेकिन, असल सवाल ये हैं, कि आखिरी तुर्की की तरफ शक का घेरा क्यों बनता जा रहा है, आइये पांच वजहों से समझते हैं।
1- इजराइल ने हिज्बुल्लाह को कुचला
ईरान का प्रॉक्सी संगठन हिज्बुल्लाह, सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद का प्रमुख सहयोगी रहा है। हिज्बुल्लाह ने असद के शासन के लिए लड़ाई लड़ी है और समूह ने सीरिया के असद-नियंत्रित क्षेत्रों में भी अपने अड्डे बनाए हैं। हिज्बुल्लाह, जो अपने आप में काफी ताकतवर रहा है, वो असद का एक प्रमुख समर्थक रहा है।
हालांकि, पिछले एक साल में हिज्बुल्लाह को इजराइल ने बुरी तरह से कुचल दिया है, और इसके टॉप लीडरशिप का सफाया हो गया है, जिससे इस संगठन की युद्ध लड़ने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ा है। लिहाजा, अब चूंकी खुद हिज्बुल्लाह, लेबनान में अपना अस्तित्व बचा रहा है, इसलिए इसकी इतनी औकात नहीं बची है, कि ये सीरिया में राष्ट्रपति असद की मदद कर सके।
इसका मतलब यह हुआ, कि असद ने अपने सबसे शक्तिशाली सहयोगियों में से एक को खो दिया, जिसने न केवल विपक्षी ताकतों के खिलाफ लड़ाके उपलब्ध कराए, बल्कि शासन को सलाह देने वाले कमांडर भी प्रदान किए। यानि, हिज्बुल्लाह के कमजोर होने के बाद तुर्की के लिए सीरिया फ्रंट खोलना काफी आसान हो गया था और गृहयुद्ध को हवा देने का ये एक बेहतरीन समय था।
2- अपने ही घाव को चाट रहा ईरान
इसी तरह, ईरान भी इजराइल के साथ युद्ध में अपने घावों को चाटने में व्यस्त है। इजराइल के साथ युद्ध में ईरान के सहयोगी हमास और हिज्बुल्लाह को तो भारी नुकसान उठाना ही पड़ा है, युद्ध में ईरान को भी काफी नुकसान हुआ है।
इजराइल के साथ हवाई युद्ध के दो दौर में, ईरान ने अपनी अधिकांश हवाई सुरक्षा खो दी है और अमेरिका और इजराइल के अधिकारियों के शब्दों में वह "नग्न" रह गया है। यह भी बताया गया है, कि इजराइल के हवाई हमलों ने ईरानी परमाणु कार्यक्रम के एक प्रमुख घटक को भी नुकसान पहुंचाया है, जिससे ईरान के परमाणु हथियार विकसित करने के विचार को बड़ा झटका लगा है।
ईरान ने इस संघर्ष में कई प्रमुख कमांडरों को भी खो दिया है, जिसमें इस साल की शुरुआत में सीरिया की राजधानी दमिश्क में इजराइली हमले में मारे गए कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इन सबका मतलब यह है, कि ईरान भी असद की किसी भी सार्थक तरीके से सीधे मदद करने की स्थिति में नहीं है - भले ही वह संकट को रोकने के लिए संघर्ष कर रहा हो।
और ईरान की कमजोर भी तुर्की के लिए सीरिया में विद्रोहियों की मदद करने के लिए उपयुक्त माहौल तैयार करता है।

3- यूक्रेन और यूरोप की तरफ रूस का ध्यान
भले ही ईरान और हिज्बुल्लाह असद के प्रमुख सहयोगी रहे हों, लेकिन सबसे बड़ा सहयोगी रूस रहा है, लेकिन यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस अभी सबसे ज्यादा विचलित है। 2015 में रूस के प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप ने ही सीरियाई गृहयुद्ध का रुख असद के पक्ष में मोड़ दिया था।
हालांकि, अब रूस यूक्रेन में फंसा हुआ है। चूंकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अभी-अभी, अब तक के सबसे बड़े रक्षा बजट को मंजूरी दी है, इसलिए यह स्पष्ट है, कि रूस यूक्रेन के अंदर निर्णायक कदम उठाने वाला है, ताकि जब युद्धविराम पर बातचीत शुरू हो, तो उसके हाथ में ज्यादा ताकत रहे और ऐसे हालात में, रूस के लिए सीरिया में अपनी ताकत लगाना शायद संभव नहीं है।
4- सीरिया में फिर से ताकतवर हुईं विपक्षी ताकतें
2020 में युद्ध विराम के बाद से सीरियाई गृह युद्ध करीब करीब खत्म हो चुका था, लेकिन युद्धविराम ने विपक्षी ताकतों को फिर से हथियारबंद होने और फिर से संगठित होने का समय दिया। इसका मतलब यह हुआ, कि जैसे ही रूस, ईरान और हिज्बुल्लाह का ध्यान सीरिया से हटा, विपक्षी ताकतों ने अलेप्पो की ओर धावा बोल दिया।
द डेली टेलीग्राफ के लिए एक लेख में, ब्रिटिश सैन्य विशेषज्ञ हैमिश डी ब्रेटन-गॉर्डन ने लिखा है, कि "ऐसा प्रतीत होता है कि विभिन्न विद्रोही गुट, विशेष रूप से फ्री सीरियन आर्मी और एचटीएस, हाल के वर्षों में फिर से संगठित हो रहे हैं, फिर से हथियारबंद हो रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात प्रशिक्षण ले रहे हैं"।
ब्रेटन-गॉर्डन ने कहा, "आज हम अलेप्पो में जो विद्रोही देख रहे हैं, वे, वे उग्रवादी लड़ाके नहीं हैं जिन्हें मैंने 2013 से 2020 के बीच इदलिब प्रांत में देखा था, बल्कि वे अच्छी तरह से सुसज्जित संगठन हैं, जो जानते हैं कि उन्हें क्या करना है। ऐसी अफवाहें हैं कि सीरियाई विपक्ष के पुनरुत्थान के पीछे तुर्की का हाथ है, लेकिन शायद दूसरों ने भी इसमें मदद की है।"
5- सीरिया में सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी है तुर्की
रूस, ईरान और हिज्बुल्लाह की गैर-मौजूदगी में, तुर्की सीरिया में सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरा है।
चूंकि तुर्की विपक्षी ताकतों का समर्थन करता है, इसलिए यह स्पष्ट है कि तुर्की की ओर से विद्रोहियों के हमले के लिए कम से कम मौन स्वीकृति मिली हुई थी, भले ही प्रत्यक्ष समर्थन न हो।
अटलांटिक काउंसिल के एक विशेषज्ञ ओमर ओज़किज़िलिक ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, कि तुर्की का एचटीएस के साथ "जटिल और कठिन संबंध" है और "हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि (आक्रामक हमले के लिए) अप्रत्यक्ष तुर्की समर्थन था, लेकिन तुर्की की कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं थी"। ओज़किज़िलिक ने कहा, कि भले ही तुर्की ने 2011 में असद के शासन के साथ संबंध तोड़ लिए थे और तब से उनके खिलाफ युद्ध का समर्थन कर रहा है, लेकिन हाल ही में उसने हमलों की निंदा भी की है।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट में सीरिया कार्यक्रम के डायरेक्टर चार्ल्स लिस्टर ने कहा, "अलेप्पो पर हमला शुरू में अक्टूबर के मध्य में करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन तुर्की ने इसे रोक दिया।"
ओजकिज़िलिक ने आगे कहा, "अब जमीन पर बदलती स्थिति के साथ, सीरिया में शक्ति का संतुलन बदल गया है। तुर्की इस समय सीरिया के अंदर सबसे शक्तिशाली अभिनेता है, और ईरान और रूस, संभवतः तुर्की के साथ बातचीत करने की कोशिश करेंगे।" तुर्की ने कुर्दों के खिलाफ भी बढ़त हासिल की है, जिनमें से एक वर्ग तुर्की के अंदर विद्रोह कर रहा है, जिससे इस क्षेत्र में उसकी स्थिति और मजबूत हो गई है।












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