Honeybees के झुंड आंधी-तूफान की तरह बिजली पैदा कर सकते हैं, क्या मधुमक्खियों के बारे में ये बातें जानते हैं ?
Swarming honeybees: यूनाइटेड किंगडम के ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मधुमक्खियों के झुंड के बारे में एक शोध किया है, जिससे इसके बारे में एक बहुत ही बड़ी जानकारी उजागर हुई है। शोध में बताया गया है कि मधुमक्खियों के झुंड इतनी बिजली पैदा करने में सक्षम हैं, जितने की आंधी-तूफान के दौरान बादल गरजने से पैदा होती हैं। यह रिसर्च जर्नल iScience में प्रकाशित हुई है। मधुमक्खियों से जुड़ी बहुत सी और ऐसी जानकारियां हैं, जिसके बारे में शायद बहुत से लोगों को पता नहीं होगा। क्योंकि, ये स्मार्ट कीट मानी जाती हैं।

मधुमक्खियां और वायुमंडलीय इलेक्ट्रिक फिल्ड
मधुमक्खियों के झुंड पर हुई नई रिसर्च के बारे में इस शोध के फर्स्ट ऑथर जीवविज्ञानी एलार्ड हंटिंग ने सीएनएन को बताया है कि ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी की टीम इस रिसर्च में जुटी थी कि विभिन्न तरह के जीव वायुमंडल में हर जगह मौजूद स्थिर इलेक्ट्रिक फिल्ड का इस्तेमाल किस तरह से करते हैं। क्योंकि, वायुमंडलीय बिजली कई तरह से काम करती है, जिसमें मौसम की घटनाओं को निर्धारित करना और जीवों को भोजन खोजने में सहायता करना शामिल है। हंटिंग ने बताया, 'जैसे कि फूलों का अपना एक इलेक्ट्रिक फिल्ड होता है और मधुमक्खियां इस फिल्ड को महसूस कर सकती हैं। और फूलों की यह इलेक्ट्रिक फिल्ड तब बदल सकती है, जब वहां एक मधुमक्खी पहुंच जाती है और बाकी मधुमक्खियां इस सूचना का इस्तेमाल कर सकती हैं कि फूल तक उनमें से कोई पहुंच चुका है। '

मधुमक्खियों के झुंड से विद्युत ऊर्जा
इस शोध के लिए यूनिवर्सिटी के फिल्ड स्टेशन में वायुमंडलीय इलेक्ट्रिक फिल्ड मापने के लिए उपकरण लगाए गए, जहां मधुमक्खियों के कई सारी छत्ते थे। हंटिंग और उनकी टीम ने पाया कि जब भी मधुमक्खियां झुंड में पहुंचती हैं, 'वहां के वायुमंडलीय इलेक्ट्रिक फिल्ड पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है,' चाहे मौसम में कुछ भी बदलाव नहीं हुआ हो। हर कीट के उड़ने के दौरान हवा से उसकी घर्षण की वजह से एक विद्युत चार्ज पैदा होता है, जो कि प्रजातियों के आकार के अनुसार बदल जाता है। एक मधुमक्खी से जितना चार्ज उत्पन्न होता है, वह इतना कम होता है कि शोधकर्ताओं के लिए उसे पकड़ पाना मुश्किल है। लेकिन, हंटिंग ने कहा कि जब 'मधुमक्खियां झुंड मे होती हैं तो यह चौंकाने वाला होता है।'

मधुमक्खियों के झुंड से 1,000 वोल्ट का करंट
शोधकर्ताओं ने शोधपत्र में लिखा है कि फिल्ड स्टेशन में छत्तों की निगरानी के लिए कैमरे और पैदा होने वाले करेंट की जांच के लिए इलेक्ट्रिक फिल्ड मॉनिटर लगाए गए थे, जिससे की मधुमक्खियों के झुंड पर नजर रखा जा रहा था। झुंड की स्थिति तब पैदा हो सकती है, जब छत्ते मधुमक्खियों से बहुत ज्यादा भर जाते हैं और रानी मधुमक्खी करीब 12,000 वर्कर मधुमक्खियों के साथ उससे निकल पड़ती है। इलेक्ट्रिक फिल्ड मॉनिटर ने करेंट का जो स्तर मापा उसके अनुसार जब मधुमक्खियों का झुंड उसके ऊपर से गुजरा तो प्रति मीटर 100 से लेकर 1,000 वोल्ट तक बिजली पैदा हुई। रिसर्च टीम ने यह भी मालूम किया कि जब झुंड में मधुमक्खियां एक दूसरे से बिलकुल सटी थीं या झुंड घना था तो इलेक्ट्रिक फिल्ड और भी ज्यादा बन रहा था। यानि आसमानी बादल की तरह मधुमक्खियों के झुंड का घनत्व जितना अधिक था, उससे उतनी ज्यादा बिजली पैदा हो रही थी।

आगे की रिसर्च के लिए खुला बड़ा रास्ता
शोधकर्ताओं ने मधुमक्खियों को लेकर जो विद्युत मॉडल विकसित की है, उनके अनुसार यह कीड़ों की दूसरी प्रजातियों जैसे कि टिड्डियों के दलों के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कीड़ों के ये दल भी बिना मौसमी बदलावों के वायुमंडलीय इलेक्ट्रिक फिल्ड को बहुत ज्यादा चार्ज कर सकते हैं। टीम को लगता है कि यह शोध प्राकृतिक दुनिया और वायुमंडलीय बिजली के बीच संबंधों को तलाशने के लिए शोध का एक नया द्वार खोल सकता है।

क्या मधुमक्खियों के बारे में ये सारी बातें जानते हैं ?
मधुमक्खियां नृत्य के सहारे एक-दूसरे से संवाद कर सकती हैं और फैसले ले सकती हैं। जब भी मधुमक्खियां को नए ठिकाने की तलाश करनी होती है और उसपर फैसला लेना होता है तो वह इसके लिए waggle dance करती हैं। लोकेशन जितना ही बेहतर और शानदार होता है, वह उतना ही जोरदार और देर तक नृत्य करती हैं। यदि कोई मधुमक्खी नृत्य कर रही मधुमक्खी से टकराती है तो वह भी जगह की पड़ताल करने निकल जाती है और अगर उसे भी पसंद आता है तो वह भी नृत्य करना शुरू कर देती है। जब, 25-50 मधुमक्खियां इसी तरह से आश्वस्त हो जाती हैं तो पूरा झुंड बहुत ही तेज आवाज के साथ पंख फड़फड़ाते हुए फैसले पर मुहर लगा देता है।

मधुमक्खियां 'अन्य चीजों' का इस्तेमाल कर सकती हैं
वियतनाम और एशिया के दूसरे हिस्सों में मधुमक्खियों की कॉलोनियों को वर्र की एक शिकारी प्रजाति से खतरा पैदा हुआ था। वह उनके छत्तों को कुछ ही घटों में तबाह कर देने में सक्षम हैं। पिछले साल एक शोध टीम ने पाया कि ऐसी शिकारी प्रजाति के कीट-पतंगों से अपने झुंड को बचाने के लिए मधुमक्खियों ने अपने छत्तों के द्वार पर पशुओं के ताजा मल को इकट्ठा किया, ताकि वर्र उनके छत्तों से दूर रहें। यही नहीं मधुमक्खियां किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए बहुत ही चेतावनी भरी आवाज निकालकर झुंड को सतर्क करती हैं।

शीत युद्ध के दौरान मधुमक्खियों की वजह विवाद बढ़ा
1980 के दशक में लाओस और कंबोडिया के जंगलों में अप्रत्याशित रूप से पीले रंग के धब्बे पाए गए। आरोप लगे कि रसायनिक हथियार का इस्तेमाल किया गया है। शरणार्थियों ने इसकी वजह से मौत और बीमारी तक के संदेह जताए। अमेरिका ने फौरन इसके लिए पूर्व के सोवियत संघ पर आरोप लगा दिया। लेकिन, बाद में मधुमक्खी विशेषज्ञों ने पाया कि यह जंगली मधुमक्खियों के बहुत बड़े झुंड का मल था।

हजारों वर्षों से मधुमक्खियों के पीछे पड़े हैं इंसान
स्पेन में करीब 8,000 साल पुराना गुफा चित्र मिला है, जिसमें मानव की भीड़ सीढ़ी के सहारे शहद इकट्ठा कर रही है। मिट्टी के बर्तनों पर पाए गए मोम के अंश से पता चलता है कि 9,000 साल पहले से किसान मधुमक्की पालन करने लगे थे। मिस्र की प्रचीन कब्रों में भी शहद की उपस्थिति मिली है।

कुछ मधुमक्खियां मांस खाती हैं
मधुमक्खियों तो फुलों से पराग कण खाने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन, फूलों के मैदानों की घासों में मृत पड़े जानवरों के शवों से भी उनके आहार प्राप्त करने के प्रमाण पाए गए हैं। कोस्टा रिका की गिद्ध मधुमक्खी ऐसी ही प्रजाति है। वैज्ञानिकों को इनमें उसी तरह के एसिड वाली बैक्टीरिया मिली है, जो हाइना और दूसरे जानवरों में पाए जाते हैं।












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