व्हाइट हाउस ने कहा, वर्क वीजा रद्द होने से अमेरिका में खाली होंगी 5.25 लाख नौकरियां
नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार ने ने H1-B और L1 समेत अन्य तरह के वर्क वीजा का सस्पेंशन इस साल के अंत तक के लिए बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा के एक्जक्यूटिव फाइल पर हस्ताक्षर करने के बाद 24 जून से यह आदेश लागू होगा और किसी को यह वीजा नहीं मिलेगा। यह वीजा अमेरिकी कंपनियों को विदेशियों को अपने यहां नियुक्त करने की अनुमति देता है। व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि इस फैसले से अमेरिका में करीब 5.25 लाख नौकरियां खाली हो जाएंगी और अपनी नौकरी गंवा चुके अमेरिकियों को रोजगार मिलेगा।

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कोरोना संकट के बीच ट्रंप सरकार के इस फैसले से अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीयों समेत दुनिया के तमाम आईटी प्रोफेशनल्स को बड़ा झटका लगा है। वहीं ट्रंप प्रशासन के मुताबिक यह फैसला अमेरिकी बेरोजगारों के हित के लिए लिया गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि यह कदम उन अमेरिकियों की मदद करने के लिए जरूरी था, जिनकी मौजूदा आर्थिक संकट के कारण नौकरी चली गई है।
भारतीयों के बीच H1B वीजा काफी लोकप्रिय है। वर्क परमिट के लिए H-1B वीजा पाने वाले सबसे अधिक भारतीय आईटी पेशेवर होते हैं। खासकर आईटी के पेशेवरों के बीच यह वीजा बेहद अहम है। ऐसे में ट्रंप के फैसले को भारतीयों के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले से दुनियाभर के 2.4 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं। जिसमें भारत से सबसे अधिक 1.70 लाख लोग प्रभावित होंगे।
राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का अमेरिका के कई नेताओं ने विरोध किया है। अमेरिकी सीनेटर डिक डर्बिन का कहना है कि यह गलत तरीका है। H1B में बदलाव करने हैं ना कि इसे खत्म करना है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का कहना है कि इमिग्रेशन की वजह से अमेरिका को इतना फायदा हुआ है। इसकी वजह से वह ग्लोबल टेक लीडर बना है। ये फैसला निराश करता है।H-1B वीजा पर लगी रोक के चलते IT शेयरों में बड़ी गिरावट, TCS को भारी नुकसान












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