'लाशों के ढेर में मुर्दा बन 7 घंटे लेटी रही', अमेरिकी महिला ने बयां की हमास की दरिंदगी, Video में देखें आपबीती
Israel hamas war News: 'उन लोगों (हमास के आतंकियों) को 30 से 35 लोगों को मारने में सिर्फ 10 मिनट लगे। मेरे चारों ओर लाशों की ढेर थी। मैं ग्रेनेड से बचने के लिए लाशों के ढेर में मुर्दा बनकर लेट गई....। मैं लाशों के नीचे थी और ऊपर से ग्रेनेड फेंका जा रहा था। मुझे खुद को बचाने के लिए शवों के नीचे 7 घंटे छिपे रहना पड़ा...', ये आपबीती उस अमेरिकी महिला की है, जो हमास के हमले के वक्त इजराइल में फंस गई थीं।
अमेरिका के कैलिफोर्निया की रहने वाली महिला ली सासी (Lee Sasi) ने बताया है कि कैसे वह इजराइल के म्यूजिक फेस्टिवल में हमास के हमले से बचकर निकली हैं। ली सासी ने शवों के ढेर के नीचे छिपने के अपने भयावह अनुभव को याद किया है। (वीडियो खबर के अंत में है)

ली सासी, दक्षिणी इजराइल में नेगेव रेगिस्तान में इजराइल-गाजा सीमा से सिर्फ 3 मील दूर सुपरनोवा में म्यूजिक फेस्टिवल में हिस्सा लेने गई थीं। ली सासी ने कहा कि, 'ये म्यूजिक फेस्टिवल 7 अक्टूबर को शुरू हुआ था, जिसमें हजारों युवा शामिल हुए थे। लेकिन अचानक 8 अक्टूबर को हमास के हमले से हालात बदल गए। रॉकेट फायर की आवाज के बाद म्यूजिक बंद कर दिए गए थे। उसके बाद जो हुआ, वो सोचकर मैं कांप रही हूं।'
'मैं आपको बता भी नहीं सकती कि मैंने क्या देखा...'
ली सासी ने न्यूजनेशन के क्रिस कुओमो को दिए इंटरव्यू में बताया कि, "यह एक बुरा सपना था, मैं आपको बता भी नहीं सकती कि मैंने क्या देखा और हम किस दौर से गुजरे हैं। जब हम पार्टी में थे तो यह बहुत मजेदार था, यह हमारे जीवन के पहले छह घंटे सबसे अच्छे थे और हमारे जीवन के सबसे खराब आखिरी छह घंटे वही थे।"
ली सासी ने कहा, ''हम पार्टी में पहुंचे और हम नाच रहे थे और हम तस्वीरें ले रहे थे और फिर हमने देखा, ऊपर आसमान में आतिशबाजी जैसा लग रहा है और हमें एहसास हुआ कि यह आतिशबाजी नहीं थी। और हम कार की ओर भागे। मैं अपने चचेरे भाई के साथ भाग रही थी लेकिन हम भागते-भागते अलग हो गए। वो एक अलग कार में आया था और हम अलग-अलग रास्ते चले गए। मैं अपने चाचा और अपने दूसरे चचेरे भाई के साथ वहां से निकली।

'बम शेल्टर में पता चला कि 20 मिनट में आतंकी हमला होने वाला है...'
ली सासी ने आगे कहा, ''वहां से निकलने के बाद, मुझे याद आया कि पार्टी के रास्ते में एक बम शेल्टर था और इसलिए मुझे बम शेल्टर का रास्ता याद आ गया। मैंने अपने चाचा को बताया कि कहां जाना है।"
ली सासी ने बताया, 'जब मैं और मेरे चाचा और मेरा एक और चचेरा भाई बम शेल्टर में पहुंचे तो वहां पहले से ही लगभग 35 लोग मौजूद थे। हम सभी घबरा रहे थे। लेकिन मैं घबराने के बजाए सदमे में थी, मुझे नहीं पता था कि क्या हो रहा था। मुझे पता था कि रॉकेट हवा में ऊपर आ-जा रहे हैं, लेकिन मैं चीजों को समझ नहीं पा रही थी आखिर चल क्या रहा है। उस बंकर में हम थोड़े वक्त सुरक्षित थे। मैं सिर्फ प्रार्थना करने की कोशिश कर रही थी और मैं खुद को शांत करने की कोशिश की। बम शेल्टर के अंदर मौजूद में से किसी ने बताया कि 20 मिनट में आतंकवादी हमला होने वाला है।''
'मैंने अपने चाचा को अपने सामने मरते देखा...'
ली सासी आगे कहा कि, 'शेल्टर में थोड़े ही देर में अचानक कुछ आतंकवादी आने लगे। मेरे चचेर भाई एलेक्स जो हमारे साथ आया था, वह उनको रोकने की कोशिश करने लगा। लेकिन उसको गोली मार दी गई। 10 लोग तुरंत मेरे सामने एक-एक कर मार दिए गए। उन्होंने हम पर उसके बाद हथगोले फेंकना शुरू कर दिया। जब हथगोला गिरा तो उसने मेरे चाचा मेरे आंखों के सामने मर गए। वो मुझे बचा रहे थे लेकिन वो हथगोला उनको लग गया।''
ली सासी ने आगे कहा, 'यह 8 अक्टूबर सुबह 8 बजे हुआ, यह तो बस शुरुआत थी। हम दोपहर 2 बजे तक वहां थे। जब मेरे चाचा का निधन हुआ तो मैं पूरी तरह से सदमे में थी, मैं वहां थी लेकिन मैं वहां नहीं थी। आतंकियों ने बम शेल्टर के ऊपर एक पत्थर फेंका। इतना शोर था कि मुझे अपने बाएं कान में बहरापन महसूस हुआ, लेकिन मैं जिंदा रही।'

'वो लोगों को मार कर खुश हो रहे थे...'
ली सासी ने बताया कि शेल्टर में मदद के लिए उसने सात घंटे तक इंतजार किया। ली साली ने कहा, "मुझे वो सात घंटे अनंत काल जैसा महसूस हुआ। हर बार जब वे रॉकेट फेंक रहे थे और वे गोलीबारी कर रहे थे, तो वे हंस रहे थे। वे उत्साहित थे। उनकी आवाज बहुत उत्साहित थी और यह उनके लिए खुशी के पल जैसा था। जैसे कि वे हमें मारने का इंतजार कर रहे थे।"
'मैं लाशों के अंदर जान बचाने के लिए छिप गई...'
ली सासी ने कहा कि, 'जान बचाने का मुझे कोई और रास्ता नहीं दिखा, इसलिए मैंने फैसला किया कि जिंदा रहने के लिए मैं मरने का ढोंग करूं और लाशों में शव बनकर छिप जाऊं। हर कोई मेरे सामने मर रहा था, 30 से 35 लोग अंदर थे। उनमें से 80 प्रतिशत को मारने में लगभग 10 मिनट का समय उन लोगों को लगा था। मेरे चारों तरफ मरे हुए लोग थे। मैं उन लाशों के बीच जाकर छिप गई। मैं वहां लेटी रही...।'
ली सासी ने बताया, 'आखिरकार बचने के लिए मैंने अपने कजिन को व्हाट्सएप लोकेशन भेजी। इसके साथ ही मैंने अपना फोन एसओएस इमरजेंसी पर रखा। जिसके बाद वो मुझे खोजते हुए वहां आए।'
यहां देखें वीडियो
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