ट्रंप राष्ट्रपति का चुनाव लड़ेंगे या नहीं, सुप्रीम कोर्ट करेगी फैसला, टकटकी लगाए देख रहे रामास्वामी
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को डोनाल्ड ट्रंप की कोलोराडो की अदालत के फैसले की अपील पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो इस ऐतिहासिक केस की सुनवाई करेगा कि क्या डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति पद की होड़ में शामिल हो सकते हैं या नहीं।
इस केस की सुनवाई फरवरी में होगी और इसका फैसला पूरे देश में लागू होगा। दरअसल कुछ समय पहले कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ट्रंप को प्राइमरी चुनाव लड़ने से रोकने के लिए 2024 के बैलेट से हटा दिया था। इसके कुछ दिन के बाद मेन राज्य में भी कोर्ट ने ऐसा ही किया।

2024 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए सबसे आगे चल रहे ट्रम्प के वकीलों ने इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से मामले की सुनवाई करने और दो राज्यों के फैसेल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
दरअसल अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन के हाथों हुई हार के बाद ट्रंप समर्थकों ने आज से ठीक तीन साल पहले यानी कि 6 जनवरी, 2021 को कैपिटल हिल में दंगे किए थे। इस दंगे के बाद ट्रंप और उनके समर्थकों के खिलाफ कई राज्यों में मामले दर्ज किए गए थे। इस दौरान ये भी मांग की गई थी कि ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराया जाए।
इसी क्रम में पहले कोलोराडो और फिर मेन राज्य ने ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाया था और उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए अयोग्य बताते हुए मतदान करने से रोक दिया था। कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट और मेन सेक्रेटरी ऑफ स्टेट दोनों ने फैसला सुनाया कि अमेरिकी संविधान में 14वें संशोधन के कारण ट्रम्प प्राथमिक मतदान में शामिल होने के लिए अयोग्य हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट को ये तय करना है कि क्या गृहयुद्ध के समय (1861-65) हुआ संवैधानिक संशोधन ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव का उम्मीदवार बनने से रोकता है या नहीं। दरअसल अमेरिकी संविधान का 14वां संशोधन 'विद्रोह या विद्रोह में शामिल' किसी भी व्यक्ति को फेडरल ऑफिस का पद संभालने से प्रतिबंधित करता है।
SC में पहली बार होगा विचार
हालांकि ट्रंप के वकीलों का तर्क है कि यह संशोधन राष्ट्रपति पर लागू नहीं होता। वैसे ये पहली बार होगा जब अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि इस प्रावधान की व्याख्या कैसे की जाए।
ट्रंप के वकीलों का तर्क है कि "यदि कोलोराडो के फैसले को, कायम रहने दिया गया, तो यह अमेरिका के इतिहास में पहली बार होगा कि न्यायपालिका, मतदाताओं को प्रमुख पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए जनता के मतदान करने से अधिकार से वंचित कर देगा।"
ट्रंप के वकीलों का तर्क है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में सेवा करने की पात्रता का प्रश्न उचित रूप से संसद के लिए आरक्षित है। ये राज्य की अदालते तय नहीं कर सकती हैं कि अमेरिका का राष्ट्रपति कौन बनेगा!
ट्रंप के पक्ष में क्या है?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान में रूढ़िवादी विचारधारा वाले न्यायधीशों का बहुमत है। इसमें 3 ऐसे न्यायधीश हैं जिन्हें ट्रंप द्वारा नियुक्त किया गया था। ऐसे में ये माना जा सकता है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के खिलाफ नहीं होगा।
चमकेगी रामास्वामी की किस्मत?
हालांकि इसकी उम्मीद कम है मगर फिर भी यदि डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ फैसला सुनाया जाता है तो भारतीय मूल के रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी की तकदीर खुल सकती है। कई सर्वे में विवेक रामास्वामी रिपब्लिकन पार्टी के अन्य उम्मीदवारों की तुलना में बहुत पीछे चल रहे हैं। यहां तक कि निक्की हेली और रॉन डिसैंटिस भी रामास्वामी से मामूली अंतर से आगे चल रहे हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के बाकी उम्मीदवारों की तुलना में विवेक रामास्वामी ही हैं जो ट्रंप की विचारधारा के बेहद नजदीक खड़े नजर आते हैं। विवेक रामास्वामी तो खुलकर ट्रंप के खिलाफ फैसले के प्रति नाराजगी जता चुके हैं और कोलोराडो और मेन राज्यों में चुनाव का बहिष्कार करने की अपील कर चुके हैं।
दोनों नेताओं का प्रेम एकतरफा नहीं है। ट्रंप भी रामास्वामी के लिए अच्छे विचार रखते हैं। ऐसे में यदि ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिए जाते हैं तो मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा रामास्वामी के पक्ष में चला जाएगा। ऐसे में आसानी से वे राष्ट्रपति चुनाव जीत सकते हैं।












Click it and Unblock the Notifications