Sunita Williams News: धरती पर लौटने के बाद सुनीता के साथ क्या-क्या होगा? कौन-कौन सी दिक्कतें सामने?

Sunita Williams News: भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) और उनके साथी बुच विलमोर 286 दिनों के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से धरती पर लौट रहे हैं। वे नासा के क्रू-9 मिशन का हिस्सा थे, लेकिन उनके बोइंग स्टारलाइनर यान (Boeing Starliner Spacecraft) में तकनीकी खराबी आ गई, जिससे उनकी वापसी में 9 महीने की देरी हो गई। अब उन्हें SpaceX के Dragon कैप्सूल के जरिए फ्लोरिडा के तट पर लैंड कराया जाएगा।

NASA से जारी अपडेट के अनुसार, भारतीय समयानुसार 19 मार्च को तड़के 3:27 बजे फ्लोरिडा तट पर उतरने की योजना है। SpaceX का Dragon कैप्सूल पैराशूट की मदद से धीरे-धीरे उतरकर समुद्र में स्प्लैशडाउन करेगा। राहत टीमें तुरंत पहुंचेंगी और अंतरिक्ष यात्रियों को कैप्सूल से निकालेंगी।

Sunita Williams Returns to Earth

धरती पर लौटने के बाद क्या होगा?

1️⃣ तत्काल चिकित्सा सहायता

उतरते ही सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को स्ट्रेचर पर रखा जाएगा। मांसपेशियों की कमजोरी, चक्कर आना और संतुलन की समस्या को देखते हुए डॉक्टर उनकी जांच करेंगे। अंतरिक्ष में 9 महीने रहने से हड्डियों और रक्त प्रवाह पर असर पड़ता है, इसलिए ब्लड टेस्ट और अन्य मेडिकल परीक्षण किए जाएंगे।

2️⃣ ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर में ट्रांसफर

  • शुरुआती मेडिकल चेकअप के बाद उन्हें NASA के जॉनसन स्पेस सेंटर (ह्यूस्टन) ले जाया जाएगा।
  • यहां वे कई दिनों तक निगरानी में रहेंगे, जब तक कि डॉक्टर उन्हें सामान्य घोषित नहीं कर देते।

3️⃣ मिशन डीब्रीफिंग

  • अंतरिक्ष मिशन के अनुभवों को रिकॉर्ड करने के लिए NASA वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के साथ एक विशेष बैठक होगी।
  • इसमें तकनीकी समस्याओं, ISS में रहने के अनुभव, और स्वास्थ्य पर असर की रिपोर्ट ली जाएगी।

4️⃣ परिवार से मुलाकात और मानसिक रिकवरी

  • लंबी अवधि के मिशन के बाद मानसिक और भावनात्मक रूप से रिकवरी भी ज़रूरी होती है।
  • सुनीता विलियम्स ने पहले ही कहा था कि वह अपने कुत्तों और परिवार से मिलने के लिए उत्साहित हैं।

अंतरिक्ष से लौटने के बाद किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है?

  • चक्कर आना और संतुलन की समस्या: गुरुत्वाकर्षण के अभाव में रहने के कारण वेस्टिबुलर सिस्टम (जो शरीर का संतुलन बनाए रखता है) प्रभावित होता है।
  • हड्डियों का कमजोर होना: NASA के अनुसार, हर महीने भार सहने वाली हड्डियाँ 1% घनी बनावट खो सकती हैं। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
  • ब्लड फ्लो और दिल की धड़कन में बदलाव: अंतरिक्ष में रक्त का प्रवाह ऊपर की ओर चला जाता है, जिससे अंतरिक्ष यात्री सूजे हुए चेहरे और सिरदर्द की समस्या झेलते हैं।
  • 'बेबी फीट' सिंड्रोम: ISS में जूते कम पहने जाते हैं, जिससे तलवों की मोटी त्वचा निकल जाती है और वे शिशु के पैरों जैसे कोमल हो जाते हैं।
  • मांसपेशियों की कमजोरी: महीनों तक शरीर का वजन कम महसूस होने से मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। धरती पर लौटने के बाद, चलने और सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत हो सकती है।

अंतरिक्ष से लौटने के बाद सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को मेडिकल निगरानी, डीब्रीफिंग और रिकवरी प्रक्रिया से गुजरना होगा। हालांकि, उनका मिशन चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन वे SpaceX के Dragon कैप्सूल की मदद से सुरक्षित वापसी कर रहे हैं। अब यह देखना होगा कि उनके शरीर और स्वास्थ्य पर 9 महीने की माइक्रोग्रैविटी का कितना असर पड़ा है।

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