Space से कैसा दिखता है भारत? सुनीता विलियम्स ने दिया दिल छूने वाला जवाब, लोगों को याद आए राकेश शर्मा
Sunita Williams: अंतरिक्ष से भारत का नजारा हर किसी के लिए एक सपना होता है, लेकिन भारतीय मूल की NASA अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स ने इसे हकीकत में देखा और महसूस किया। 1984 में, जब भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष से अपनी मातृभूमि को देखा था, तो उन्होंने उस अनुभव को सिर्फ एक पंक्ति में बयां कर दिया था।
राकेश शर्मा भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री हैं। जब वो स्पेस में गए थे उसके बाद भारत की मौजूदा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे पूछा था, "अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?" इसपर राकेश शर्मा ने इकबाल की पंक्तियां दोहराई थी। उनके जवाब ने पीएम सहित सभी भारतवासियों का दिल जीत लिया था।

क्या कहा था राकेश शर्मा ने?
1984 में जब भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने सोवियत अंतरिक्ष यान सोयुज टी-11 से अंतरिक्ष यात्रा की, तब भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनसे एक ऐतिहासिक सवाल पूछा, "भारत अंतरिक्ष से कैसा दिखता है?" इस सवाल के जवाब में राकेश शर्मा ने पूरि भारत को गर्व महसूस कराते हुए कहा था, "सारे जहां से अच्छा"।
यह पंक्ति प्रसिद्ध उर्दू कवि मोहम्मद इकबाल की मशहूर कविता "सारे जहां से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा" से ली गई थी, जो आज भी भारतीयों के दिलों में गूंजती है। राकेश शर्मा का यह जवाब न केवल उनके साहस और कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है, बल्कि यह भारत के प्रति उनके अटूट प्यार और गर्व का प्रतीक बन चुका है।
सुनीता विलियम्स ने बयान किया अंतरिक्ष से कैसा है भारत का नजारा
अब, चार दशक बाद, एक और भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री, सुनिता विलियम्स, ने कुछ ऐसा ही अनुभव किया। हाल ही में, उन्होंने 286 दिन अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में बिताने के बाद धरती पर वापसी की है। जब उनसे अंतरिक्ष से भारत को देखने का अनुभव पूछा गया, तो उनका जवाब जितना सादा था, उतना ही खूबसूरत भी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक पत्रकार ने सवाल किया कि, "अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है?" तो सुनिता विलियम्स ने बिना झिझक कहा, "भारत अद्भुत है, बस अद्भुत।"
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लेकिन, सुनिता ने सिर्फ इतना कहकर बात नहीं छोड़ी। उन्होंने उस नजारे को इतने दिलचस्प और अनोखे अंदाज में बयान किया कि सुनने वाले भी उसकी कल्पना में खो जाएं। उन्होंने खासतौर पर हिमालय के नजारों का जिक्र किया। सुनिता ने कहा, "हर बार जब हम हिमालय के ऊपर से गुजरे, तो हमें अद्भुत तस्वीरें मिलीं। यह ऐसा था मानो जैसे कोई लहर नीचे की ओर बह रही हो और भारत में समा जाती हो।"
अलग-अलग रंगों में दिखा भारत
सुनिता ने कहा, "मैंने इसे पहले भी इस तरह बताया है कि जब टेक्टोनिक प्लेट्स टकराई थीं, तो एक लहर जैसी बन गई थी, जो भारत में बहती हुई अलग-अलग रंगों में दिखती है। जब आप पूर्व से गुजरात और मुंबई की ओर बढ़ते हैं और वहां की मछली पकड़ने वाली नौकाओं को देखते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई बीकन दिखा रहा हो - 'यहां हम आ गए।'"
उन्होंने आगे बताया, "भारत में बड़ी-बड़ी रोशनियों का नेटवर्क, बड़े शहरों से छोटे शहरों तक फैला हुआ, रात में देखने में बेहद शानदार लगता है। और दिन के समय तो हिमालय की सुंदरता और भी बढ़ जाती है।"
ISRO के साथ काम करने की इच्छा
जब सुनिता विलियम्स से पूछा गया कि क्या वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के फ्लाइट प्रोग्राम में मदद करना चाहेंगी, तो उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि हम किसी वक्त मिलेंगे और भारत में ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। भारत एक बेहतरीन देश है और एक और शानदार लोकतंत्र है। जो अंतरिक्ष की दुनिया में कदम रख रहा है और मैं जरूर चाहूंगी कि मैं उनकी मदद कर पाऊं।"
साथी अंतरिक्ष यात्री भी करना चाहते हैं भारत का दौरा
विलियम्स के साथ बैठे बुच विल्मोर ने मजाकिया अंदाज में पूछा, "क्या तुम अपने क्रू मेंबर्स को भी इस यात्रा पर ले जाना चाहोगी?" इस पर सुनिता ने हंसते हुए जवाब दिया, "बिलकुल।"
स्पेस से लौटने के बाद की जिंदगी
NASA के Crew-9 अंतरिक्ष यात्री सुनिता विलियम्स, निक हेग, बुच विल्मोर और रूसी कॉस्मोनॉट एलेक्ज़ेंडर गॉरबुनोव, 18 मार्च को स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल की सफल लैंडिंग के बाद धरती पर लौटे। वापस लौटने के बाद सुनिता और बुच ने जॉनसन स्पेस सेंटर में फिजिकल थेरेपी शुरू की, ताकि उनके शरीर दोबारा धरती की गुरुत्वाकर्षण के हिसाब से एडजस्ट हो सकें। यह प्रक्रिया सभी अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जरूरी होती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों ही अंतरिक्ष यात्री खुश और स्वस्थ नजर आ रहे थे। सुनिता ने यहां तक बताया कि उन्होंने रविवार को तीन मील की दौड़ भी लगाई। सुनिता विलियम्स और उनकी टीम ने अंतरिक्ष में लंबा समय बिताया और अब वे धीरे-धीरे धरती की जिंदगी में वापसी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में उनके अनुभव और भी रोचक हो सकते हैं, खासकर अगर वे ISRO के साथ काम करने का मौका पाती हैं।
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