कैसे बन सकते हैं सुनीता विलियम्स की तरह एस्ट्रोनॉट? जानिए NASA में काम करने लिए चाहिए कौन-कौन से स्किल
Sunita Williams: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर करीब नौ महीने बाद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से धरती पर लौट गए हैं। भारतीय मूल की सुनीता हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने अब तक 322 दिन अंतरिक्ष में बिताकर एक मिसाल कायम की है।
अगर आपका भी सपना है कि आप सुनीता विलियम्स की तरह अंतरिक्ष यात्री (एस्ट्रोनॉट) बनें और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से लेकर चांद और मंगल तक की यात्रा करें, तो आपको सही रास्ता अपनाना होगा। आइए जानते हैं एस्ट्रोनॉट बनने के लिए क्या जरूरी है...

एस्ट्रोनॉट बनने के लिए क्या पढ़ाई करें?
अगर आप अंतरिक्ष में जाने का सपना देखते हैं, तो आपको मैथ्स और फिजिक्स पर मजबूत पकड़ बनानी होगी। इसके बाद इंजीनियरिंग (खासतौर पर एयरोस्पेस), साइंस या मैथ्स में बैचलर डिग्री लेनी होगी। सुनीता विलियम्स ने फिजिकल साइंस में बैचलर और इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर डिग्री हासिल की थी। अगर आप साइंस या टेक्नोलॉजी में मास्टर्स या पीएचडी कर सकते हैं, तो यह नासा जैसी संस्थाओं में चयन के लिए फायदे का सौदा होगा।
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एक्सपीरियंस और ट्रेनिंग भी जरूरी
- मास्टर डिग्री के साथ पायलट बनने की ट्रेनिंग लेनी होगी या किसी टेक्निकल फील्ड में काम करना होगा।
- सुनीता विलियम्स ने यूएस नेवी में हेलिकॉप्टर पायलट की ट्रेनिंग ली थी और 30 से अधिक एयरक्राफ्ट उड़ाए थे।
- टेस्ट पायलट बनना भी एक अच्छा विकल्प है, क्योंकि नासा ऐसे लोगों को अधिक पसंद करता है।
- सुनीता के पास प्लेन उड़ाने का 2,770 घंटे से ज्यादा का अनुभव था।
शारीरिक फिटनेस भी है जरूरी
अंतरिक्ष में शरीर को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। बिना गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) के शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। इसलिए फिटनेस बहुत जरूरी है।
- रोजाना दौड़ना, स्विमिंग और वेट ट्रेनिंग करना चाहिए।
- सुनीता ने तो अंतरिक्ष में रहते हुए बोस्टन मैराथन भी पूरी की थी!
NASA में ऐसे बन सकते हैं एस्ट्रोनॉट
अगर आप नासा के एस्ट्रोनॉट बनना चाहते हैं, तो आपके पास अमेरिकी नागरिकता होनी चाहिए। इसके अलावा-
- कम से कम 2 साल का प्रोफेशनल अनुभव होना चाहिए।
- 1,000 घंटे जेट एयरक्राफ्ट उड़ाने का अनुभव ज़रूरी है।
- नासा का चयन बहुत कठिन होता है-लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, मेडिकल टेस्ट और फिर ट्रेनिंग।
- सुनीता 1998 में चुनी गईं और ट्रेनिंग के बाद अंतरिक्ष मिशन पर गईं।
एस्ट्रोनॉट बनने के लिए कौन-सी स्किल चाहिए?
- प्रॉब्लम सॉल्विंग, टीम वर्क और लीडरशिप स्किल बेहद जरूरी हैं।
- सुनीता ने Expedition 33 की कमांड भी की थी।
- एस्ट्रोनॉट को सर्वाइवल ट्रेनिंग (जंगल और पानी में), रोबोटिक्स और स्पेस स्टेशन सिस्टम की ट्रेनिंग लेनी पड़ती है।
भारत में कैसे बन सकते हैं एस्ट्रोनॉट?
अगर आप भारत में रहकर एस्ट्रोनॉट बनना चाहते हैं, तो ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) से जुड़ सकते हैं। हालांकि, भारत में अभी क्रू मिशन कम हैं, लेकिन भविष्य में स्पेस मिशन बढ़ने की उम्मीद है।
भारत में एस्ट्रोनॉट बनने के दो मुख्य रास्ते:
ISRO के स्पेस प्रोग्राम में साइंटिस्ट या इंजीनियर बनकर शुरुआत करें।
- गगनयान जैसे मिशन में मौका मिल सकता है।
- साइंस/इंजीनियरिंग की डिग्री और फिजिकल फिटनेस जरूरी है।
भारतीय वायुसेना या नौसेना में पायलट बनें।
- भारतीय वायुसेना से भी स्पेस मिशन के लिए चयन किया जाता है।
- भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा वायुसेना में विंग कमांडर थे।
- इसरो के गगनयान मिशन के लिए चुने गए अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला भी भारतीय वायुसेना के अधिकारी हैं।
सपने को हकीकत में बदलें!
सुनीता विलियम्स पहले वेटेरिनेरियन (पशु चिकित्सक) बनना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने नेवी जॉइन की, फिर नासा तक पहुंच गईं। उनका सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अगर आप भी अंतरिक्ष में जाने का सपना देखते हैं, तो मेहनत और धैर्य से अपना रास्ता खुद बनाइए!
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