Su-57: दुश्मनों के पास 5th जेनरेशन विमान, क्या रूसी स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने में दिलचस्पी दिखाएगा भारत?
Su-57: दुनिया के 19 देशों की वायुसेनाएं पहले से ही पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रही हैं। चीन जहां अपना चेंगदू J-20 'माइटी ड्रैगन' का इस्तेमाल करता है, वहीं रूस अपने सुखोई SU-57 'फेलन' से दुश्मनों में खौफ पैदा करता है।
वहीं, 17 देश अमेरिकी हथियार कंपनी लॉकहीड मार्टिन के सबसे शानदार प्रोडक्ट F-35 लाइटनिंग II को ऑपरेट कर रहे हैं। जबकि, अमेरिका के पास एक और पांचवी पीढ़ी का फाइटर जेचट है F-22 रैप्टर, जिसे अमेरिका ने अभी तक किसी भी देश को नहीं बेचा है।

हालांकि, 19 देशों की सेनाएं भले ही पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान का इस्तेमाल कर रही हों, लेकिन सिर्फ 3 ही ऐसे देश हैं, जो फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट का निर्माण करता है और ये देश हैं, अमेरिका, चीन और रूस। हालांकि, अमेरिकी एफ-35 के निर्माण में कुछ और देश शामिल थे, लेकिन अंतिम अधिकार अमेरिका का है, क्योंकि सबसे ज्यादा निवेश अमेरिका ने ही किया था।
भारत के पास क्यों नहीं है पांचवी पीढ़ी के विमान
भारतीय वायु सेना (IAF) को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे शक्तिशाली वायु सेना माना जाता है। हालांकि, HAL ने रूसी सुखोई के साथ मिलकर पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान (FGCA) के निर्माण की कोशिश की थी, लेकिन कुछ विवादों के बाद भारत इस प्रोजेक्ट से बाहर हट गया था, इसीलिए भारत के पास अभी तक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान नहीं है।
भारत ने FGCA एसयू-57 में कुल 43 सुधार सुझाए थे, जिनमें एडवांस सेसंर, नेटवर्किंग और फाइटर एवियोनिक्स शामिल हैं। भारतीय वेरिएंट, एक पायलट और एक हथियार प्रणाली ऑपरेटर (WSO) के साथ दो सीटों वाला होना था। लेकिन भारत ने 2018 में FGFA कार्यक्रम से खुद को अलग कर लिया, हालांकि फिर से इस प्रोजेक्ट पर विचार करने के लिए एक छोटी सी खिड़की खुली छोड़ी गई।
Su-57 फेलोन की एक छोटी बैच को रूसी वायुसेना में शामिल किया गया, जिसने सीरिया और यूक्रेन में सीमित कार्रवाई की है। दूसरी तरफ, चीन बिजली की रफ्तार से J-20 फाइटर जेट की संख्या बढ़ा रहा है और अभी तक 250 जे-20 फाइटर जेट बूना चुका है और ऐसा दावा है, कि चीन एक हजार जे-20 फाइटर जेट बनाने वाला है। और J-20 को शिनजियां (होटन) और तिब्बत (शिगात्से) में भारत की सीमा LAC के काफी पास के हवाई क्षेत्रों में देखा गया है। जो चीन की आक्रामकता के बारे में बताता है।
हालांकि, भारत ने भी अपने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, लेकिन भारतीय वायुसेना की नजर अभी भी Su-57 पर है। F-35 को फिलहाल भारत के लिए मंजूरी नहीं मिली है, क्योंकि भारत ने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था। लिहाजा, रूस अब भारत को एस-57 बेचने की फिराक में लगा हुआ है।
भारत सरकार ने साल 2018 में, रूस के साथ 8.63 अरब डॉलर के इस फाइटर जेट के समझौते को रोक दिया था। हालांकि, बाद रूस ने अकेले ही इस विशालकाय परियोजना पर कदम आगे बढ़ाने का फैसला किया। लेकिन, बाद में कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावे किए गये, कि भारत, SU-57 के अगले चरण में या तो शामिल हो सकता है या फिर रूसी वायुसेना में शामिल होने के बाद पूरी तरह से विकसित SU-57 फाइटर जेट को खरीद सकता है।

कितना खतरनाक है SU-57 फाइटर जेट
सुखोई Su-57 एक डबल-इंजन स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसका प्रारंभिक विकास 1999 में किया गया था और यह रूसी सेना में शामिल होने वाला पहला स्टील्थ विमान था। साल 2009 में, विमान के डिजाइन को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी गई थी। और इसकी पहली उड़ान 29 जनवरी 2010 को हुई थी। जुलाई 2017 में T-50 को Su-57 नाम दिया गया था। और 2020 तक रूस ने 32 फाइटर जेट बना लिए थे।
मल्टी-रोल वाला लड़ाकू विमान हवाई सतह और समुद्री लक्ष्यों पर निशाना लगा सकता है। ये स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस है, लिहाजा इसे रडार के लिए ट्रैक करना काफी मुश्किल है। इसके अलावा ये फाइटर जेट सुपर-पैंतरेबाजी, सुपर-क्रूज, एकीकृत एवियोनिक्स और बड़ी पेलोड क्षमता शामिल है। यह विमान रूसी सेना में मिग-29 और एसयू-27 का उत्तराधिकारी बनने के लिए है और इसे निर्यात के लिए बेचा जा रहा है।
ऐसा कहा जाता है, कि यह सबसे एडवांस ऑनबोर्ड रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक उपकरण से लैस है, जिसमें एक शक्तिशाली ऑनबोर्ड कंप्यूटर (तथाकथित इलेक्ट्रॉनिक सेकंड पायलट) भी शामिल है। इसकी रडार प्रणाली इसके पूरे बॉडी में फैली हुई है, और मिसाइलों के साथ साथ बमों को इसकी बॉडी के अंदर रखने के लिए डिजाइन किया गया है। यानि, हथियार इसकी बॉडी के साथ बाहर नहीं लटकेंगे, जैसा दूसरे फाइटर जेट्स में होता है।
ज़मीन पर हमला करने की क्षमता के लिए, Su-57 में Kh-38 सामरिक हवा से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइल और KAB परिवार के सटीक-निर्देशित बमों की एक सीरिज लगी हुई है। वे जमीन-आधारित राडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेड बम और एंटी-शिप मिसाइलों को लक्षित करने के लिए विकिरण-रोधी मिसाइलें भी ले जा सकते हैं।

Fifth Generation Fighter Aircraft (FGFA)
इसी साल मार्च में रूसी राजधानी मॉस्को से चलने वाले रूसी समाचार एजेंसी स्पुतनिक ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा था, कि "SU-57 क्षमताओं में घातक वृद्धि भारतीय वायुसेना को फिर से इस फाइटर जेट को लेकर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकती है।"
हालांकि, भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन, दुनियाभर की हथियार कंपनियां भारत को ऑफर दे रही हैं, क्योंकि दुनिया जानती है, कि भारत के राफेल खरीदने से पहले तक उसे किसी ने नहीं खरीदा, लेकिन जैसे ही भारत ने राफेल खरीदा, इस फाइटर जेट की किस्मत बदल गई।
भारत सरकार ने इसी साल AMCA प्रोजेक्ट के डिजाइन को मंजूरी दी है और इसके निर्माण में कम से कम 8 से 10 सालो का वक्त लगेगा, लेकिन चीन के पास पहले से ही J-20 फाइटर जेट है और पाकिस्तान ने चीन से FC-31 फाइटर जेट खरीदने की घोषणा कर रखी है, लिहाजा भारत को भी एक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की जरूरत महसूस हो रही है। ऐसे में भारत किसी फाइटर जेट पर अपनी ऊंगली रखेगा, ये देखने वाली बात होगी।












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