Suez Canal Video: ‘चंद्रमा के चमत्कार’ से स्वेज नहर में फंसा विशालकाय जहाज निकला, भारतीय क्रू होंगे गिरफ्तार?
स्वेज नहर में फंसा जहाज कैसे सुपरमून की वजह से जाम से निकल गया। जानिए क्यों जहाज के भारतीय क्रू पर गिरफ्तारी और कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
मिस्र/नई दिल्ली: करीब 6 दिनों तक संघर्ष चलता रहा। दिन रात सैकड़ों इंजीनियर अपना दिमाग लगाते रहे और फिर जाकर 400 मीटर का विशालकाय जहाज स्वेज नहर से बाहर निकल पाया। लेकिन, स्वेज नहर में फंसे जहाज के निकलने की कहानी बस इतनी भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे है वो सुपरमून, जिसने एक पल में जहाज को जाम से बाहर निकाल लिया। आईये कैसे एन वक्त पर चंद्रमा ने चमत्कार किया और पानी में फंसा जहाज जाम से निकलने में कामयाब हो गया।
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जाम से बाहर निकला जहाज
6 दिनों तक स्वेज नहर में फंसने के बाद 4 फूटबॉल मैदान जितना बड़ा मालवाहक जहाज फिर से अपनी मंजिल के लिए रवाना हो चुका है। और इसके लिए सभी सुपरमून को धन्यवाद दे रहे हैं। मंगलवार को एमवी गीवन नाम का जहाज तिरछा होकर स्वेज नहर में फंस गया था, जिसे निकालने के लिए कई तरकीबों का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन एक भी तरीका कामयाब नहीं हो पाया था। जाम से करोड़ों का नुकसान हो रहा था और सैटेलाइट तस्वीरों से पता चल रहा था कि जहाज के दोनों तरफ 120 से ज्यादा और जहाज जाम में फंस गये हैं लेकिन किसी भी जहाज को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिल रहा था। लेकिन, जैसे ही ये जहाज जाम से बाहर निकला, हर किसी की सांस में सांस आ गई ।

भारतीय क्रू के खिलाफ कानूनी कार्रवाई?
इस कार्गो शिप को 25 सदस्यीय भारतीय क्रू चला रहा था और रिपोर्ट के मुताबिक सभी भारतीय क्रू पूरी तरह से सुरक्षित हैं लेकिन अब सभी भारतीय क्रू पर जांच की तलवार लटक रही है। अब सवाल ये उठ रहे हैं कि सभी भारतीय क्रू के खिलाफ स्वेज नहर प्रशासन क्या कार्रवाई करने वाला है। भारत सरकार के साथ साथ नाविक संगठन को भी चिंता है, कि सभी भारतीय क्रू के खिलाफ कार्रवाई होने के साथ साथ उनके ऊपर क्रिमिनल चार्जेज लग सकता है। शिपिंग इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, इस कार्गो जहाज को चलाने वाले कैप्टन समेत कुछ क्रू मेंबर्स को आगे समुन्द्री यात्रा करने पर बैन लगाया जा सकता है। और जांच होने तक उनके हिरासत में रखा जा सकता है। हालांकि, अभी तक शिप मैनेजमेंट के तरफ ने लीगल एक्शन और कानूनी तौर-तरीकों को लेकर कुछ खास बात नहीं की है। वहीं, शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े एक सूत्र ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया है कि 'भारतीय क्रू मेंबर्स को बलि का बकरा बनाए जाने की पूरी उम्मीद है'

सुपरमून ने निकाला फंसा जहाज
रिपोर्ट के मुताबिक, स्वेज नहर में फंसे जहाज को निकालने के लिए कई कोशिशें की जा रहीं थीं, लेकिन एक भी कोशिश कामयाब नहीं हो पा रही थी। 400 मीटर लंबे और 59 मीटर चौड़े इस जहाज ने स्वेज नहर को पूरी तरह से ब्लॉक करके रखा हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वेज में जहाज फंसने की वजह से करोड़ों का नुकसान तो हो ही रहा था, साथ ही साथ इस रास्ते से दुनिया के करीब 30 फीसदी शिपिंग कंटेनर भी गुजरते हैं। लिहाजा, इस रास्ते को फ्री करना बेहद जरूरी हो गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच अचानक सुपरमून रेस्क्यू टीम के लिए वरदान बनकर आया और समुन्द्र में अचानक ज्वार आ गया। ज्वार आने के साथ ही स्वेज नहर में अचानक पानी बढ़ने लगा और एवर गिवेन जहाज को बाहर निकलने का रास्ता मिल गया। इसके साथ ही पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है।

निकाली गई लाखों क्यूबिक मीटर बालू
रिपोर्ट के मुताबिक इस विशालकाय जहाज को निकालने के पीछे सुपरमून का योगदान तो है ही इसके साथ साथ मशरूर की भी बहुत बड़ी भूमिका रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वेज नहर से फंसे जहाज को निकालने के लिए दैत्याकार जहाज मशरूर को बुलाया गया था। मशरूर ने स्वेज नहर से हर घंटे 70 हजार क्यूबिक मीटर की दर से बालू को हटाया। मशरूर जहाज को गुरुवार से ही बालू निकालने के काम पर लगा दिया गया था।

फंसे जहाज को खींचा गया
स्वेज नहर प्राधिकरण के मुताबिक, मशरूर के जरिए फंसे जहाज के नीचे से बालू को हटाया गया। जब फंसे जहाज के नीचे से काफी ज्यादा बालू हटा लिया गया उसके बाद जहाजों को खींचने वाले टगबोट को काम पर लगाया गया। प्राधिकरण के मुताबिक, फंसे जहाज के नीचे से बालू निकलने के साथ ही सुपरमून आया और ज्वार की वजह से पानी बढ़ गया। जिसके चलते टगबोट को फंसे जहाज को खींचने के लिए काफी वक्त मिल गया। रिपोर्ट के मुताबित, करीब 27 हजार क्यूबिक मीटर बालू और कीचड़ को फंसे हुए जहाज के नीचे और आसपास से हटाया गया और इस काम के लिए कई छोटे छोटे जहाजों को और लगाया गया था।












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