इजिप्टियन किंग की सोच से निकली स्वेज नहर कैसे विश्व व्यापार की लाइफलाइन बन गई?
स्वेज नहर का वो इतिहास जिससे आप अनजान हैं। कैसे इजिप्टियन किंग की सोच में स्वेज नहर आई थी और स्वेज नहर के साथ कैसा इतिहास जुड़ा है, आईये जानते हैं।
नई दिल्ली: तेज हवा का तेज झोंका और स्वेज नहर में 400 मीटर का एक जहाज फंस गया। इसके साथ ही एक झटके में सामने आ गया वो इतिहास, जिसे स्वेज नहर ने पानी की बहती धाराओं के साथ देखा है। तेज हवा के एक झोंके ने पूर्वी और पश्चिमी देशों के बीच होने वाले व्यापार को पूरी तरह से रोक रखा है और दुनिया की सारी इंजीनियरिंग का इस्तेमाल स्वेज नहर से 400 मीटर लंबे जहाज को बाहर निकालने के लिए हो रहा है। नहर में जहाज फंसा है और उसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है। ऐस में जानना जरूरी है कि आखिर स्वेज नहर का इतिहास क्या रहा है और कैसे ये रास्ता विश्व व्यापार के लिए सेंटर बना हुआ है, आईये जानने की कोशिश करते हैं।

बेहद महत्वपूर्ण समुन्द्री रास्ता
यूरोप और एशिया के व्यापारिक मार्ग को जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है स्वेज नहर। 193 किलोमीटर लंबा ये जलमार्ग यूरोप को एशिया से जोड़ता है, जो इजिप्ट के पास स्थिति है। लेकिन, इसके निर्माण का इतिहास सदियों पुराना है। क्या आप यकीन करेंगे कि 193 किलोमीटर लंबे इस नहर का निर्माण इंसानों ने करवाया था। स्वेज नहर का इतिहास शुरू होता है ईसा पूर्न 1859 साल पहले से। मानव निर्मित स्वेज नहर का निर्माण 1859 से 1869 ईस्वी के बीच मेडिटेरियन सी और रेड सी को जोड़ने के लिया किया गया था। जो आगे चलकर विश्व व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया। ये समुन्द्री मार्ग अटलांटिक महासागर से हिंद महासागर और वेस्टर्न पैसिफिक ओसियन को जोड़ने वाला सबसे छोटा समुन्द्री रास्ता है, जिसकी वजह से स्वेज नहर विश्व का सबसे व्यस्त समुन्द्री रास्ता माना जाता है। और ये भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण समुन्द्री रास्ता बन जाता है। पिछले 150 सालों से लगातार स्वेज नहर के जरिए व्यापार होता रहा है लेकिन कई दफे कई वजहों से स्वेज नहर से होना वाला व्यापार रूका भी है। कई बार राजनीतिक वजहों से व्यापार को रोका गया तो फाइनेंसियल और टेक्निकल वजहों से भी स्वेज नहर से होने वाला व्यापार प्रभावित हुआ है। इससे पहले 1975 में आखिरी बार स्वेज नहर से होने वाला व्यापार प्रभावित हुआ था।

स्वेज नहर का लंबा इतिहास
स्वेज नहर किसी ना किसी रूप में सैकड़ों सालों से व्यापार का प्रमुख रास्ता बना रहा है। माना जाता है कि स्वेज नहर का निर्माण 1887 से 1849 ईशा पूर्व इजिप्ट के राजा सेनुस्रेप्ट-3 के शासनकाल में स्वेज नहर का निर्माण करवाया गया। सेनुस्रेप्ट के बाद इजिप्ट पर शासन करने आये कई राजाओं ने स्वेज नहर में वक्त के हिसाब से बदलाव करते रहे। लेकिन, स्वेज निर्माण का असली निर्माण आज से करीब 300 साल पहले उस वक्त शुरू हुआ जब व्यापारिक नजरिए से एशियन और यूरोपीय देश बेहद करीब आ गये। 1799 ईस्वी में नेपोलियन ने स्वेज नहर का निर्माण और विकास वैज्ञानिक पद्धति से कराना शुरू किया लेकिन इसकी लंबाई में गिनती गलत होने की वजह से काम अधूरा रह गया। बाद में 1800 इस्वी में फ्रांस के डिप्लोमेट और इंजीनियर फर्डानेंड की देखरेख में स्वेज नहर का काम फिर से शुरू हुआ।

स्वेज नहर की मरम्मत और शासन
1858 में यूनिवर्सल स्वेज शिप कैनाल कंपनी को 99 सालों तक स्वेज नहर की मरम्मत और ऑपरेशन का काम सौंपा गया लेकिन बाद में स्वेज नहर का अधिकार इजिप्ट सरकार के हाथों में चला गया। बावजूद इसके कि स्वेज नहर की मरम्मतीकरण को कई बार रोका गया, आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, ब्रिटिश और तुर्कों ने स्वेज नहर के मरम्मत में कई बार हस्तक्षेप करने की कोशिश की, फिर भी 1869 में स्वेज नगर इंटरनेशनल नेविगेशन के लिए खुल गया। स्वेज नहर का प्रबंध करने वाली कंपनी में ब्रिटेन और फ्रांस ज्यादा हिस्सा रखते थे। वहीं, मिस्र और तुर्की की भी हिस्सेदारी होती थी। लेकिन, बाद में मिस्र और तुर्की के शेयर भी ब्रिटेन ने खरीद लिए। 1888 में एक अंतर्राष्ट्रीय उपसंधि के मुताबिक इस नहर को युद्ध और शांति, दोनों कालों के लिए सभी देशों के जहाजों के लिए बिना रोकटोक खोल दिया गया था लेकिन, 1904 में अग्रेजों ने इस संधि को तोड़कर नगर के दोनों तरफ अपने सैनिक बिठा दिए। बाद में 1947 में स्वेज कैनाल कंपनी और मिस्र की सरकार के बीच समझौता हुआ और कंपनी के साथ 99 सालों का पट्टा खत्म होने केबाद स्वेज नहर का मालिकाना हक मिस्र की सरकार के हाथ में आ गया।

स्वेज नहर और आधुनिक संकट
1956 में इजिप्ट के राष्ट्रपति जमाल अब्देल नासेर ने स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया और और नील नदी पर बांध बनाने का काम शुरू कर दिया। जिससे गुस्साए ब्रिटेन, फ्रांस और इजरायल ने मिस्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नौबत लड़ाई की बनने लगी थी लेकिन 1957 में यूनाइटेड नेशंस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। वहीं, इजरायल और इजिप्ट के बीच शांति बहाल रखने के लिए यूनाइटेड नेशंस की पीस कीपिंग फोर्स की भी सनाई नामक जगह पर तैनाती की गई। 1967 में फिर से तनाव उस वक्त बढ़ गया जब फिर से मिस्र के राष्ट्रपति नासेर ने यूएन की पीस फोर्स को सनाई से निकलने को कहा, जिसके बाद इजरायल और इजिप्ट के बीच का विवाद फिर से काफी ज्यादा बढ़ गया था। इजरायल ने सनाई पर कब्जा कर लिया जिसके जबाव में इजिप्ट ने स्वेज नहर को बंद कर दिया। करीब 8 सालों के बाद फिर से 1975 में स्वेज नहर को फिर से व्यापार के लिए खोला गया, जब इजरायल और इजिप्ट ने शांति समझौते पर दस्तखत किए। 1973 में स्वेज नहर इजरायल-इजिप्ट लड़ाई का मुख्य प्वाइंट बन गई थी जब इजरायल के खिलाफ इजिप्ट और अरब देशों की सेनाओं ने गठबंधन बना लिया था।

अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन नहर
आधुनिक दौर में स्वेज नहर का महत्व और बढ़ गया है। यूरोप और एशियाई देशों के बीच होने वाले वैश्विक व्यापार का 10 प्रतिशत व्यापार स्वेज नहर के जरिए ही की जाती है। वहीं, हर दिन करीब 50 जहाज स्वेज नहर के रास्ते से गुजरते हैं, जिसमें करीब हर दिन 9.5 बिलियन डॉलर के सामानों की सप्लाई एक देश से दूसरे देश तक की जाती है। लेकिन, 23 मार्च को बेहद खराब मौसम होने की वजह से 400 मीटर लंबा और 59 मीटर चौड़ा एक जहाज स्वेज नहर में फंस गया है। जिसके बाद नहर के दोनों तरफ जहाजों का लंबा जाम लग गया है। हालांकि, स्वेज नहर में फंसे इस जहाज का जल्द निकलना बेहद मुश्किल लग रहा है, ये जहाज चीन से सामान लेकर नीदरलैंड जा रहा था।












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