Su-57 Vs F-35: भारत में होगी दुनिया के सबसे शक्तिशाली स्टील्थ फाइटर जेट्स की जंग, दिल्ली किसे खरीदेगी?
Su-57 Vs F-35 Fifth-Generation Stealth Fighter Jets: भारत में अगले महीने दुनिया की दो सबसे शक्तिशाली पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स के बीच दिलचस्प मुकाबला होने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर, Su-57 'फेलन' भारत आ रहा है! और ऐसी अटकलें हैं, कि पिछली बार की तरह ही अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट F-35 लाइटनिंग II विमान एयरोइंडिया एयरशो में मौजूद हो सकता है।
अमेरिकी F-35A लड़ाकू विमान ने बैंगलोर में एयरो इंडिया-2023 में शिरकत की थी और उसी के बाद से कयास लगाए जाने लगे, कि आने वाले वक्त में भारत, अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का अधिग्रहण कर सकता है। हालांकि, उसके बाद से बात आगे नहीं बढ़ पाई है। भारत में अमेरिकी दूतावास में रक्षा अताशे रियर एडमिरल माइकल एल. बेकर ने कहा था, कि नई दिल्ली F-35 पर फैसला लेने के "बहुत शुरुआती चरण" में है।

भारत में स्टील्थ फाइटर जेट्स का जमावड़ा (Su-57 Vs F-35 Fighter Jets)
दुनिया में अभी तीन ही देश के पास पांचवी पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स हैं, चीन, अमेरिका और रूस के पास। जिनमें से दो देश भारत में अपने फाइटर जेट भेजने वाले हैं। हालांकि, ये पहली बार होगा, जब रूस अपने Su-57 फाइटर जेट को भारत भेजने वाला है और सबसे दिलचस्प संयोग ये है, कि रूस के राष्ट्रपति भी इन्हीं दिनों भारत की यात्रा पर आने वाले हैं, तो सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या भारत अपनी घटती वायुसेना की ताकत को बढ़ाने के लिए रूस फाइटर जेट पर दांव लगाने वाला है?
भारत बैंगलोर के येलहंका एयरबेस में एयरो इंडिया एयर शो की मेजबानी कर रहा है। यह भारत में Su-57 की पहली उपस्थिति होगी। इससे पहले नवंबर 2024 में रूस ने अपने फाइटर जेट को चीन में झुहाई एयर शो में भेजा था, जो किसी विदेशी देश में इसका पहला एयर शो था।
रूस का सबसे एडवांस फ्रंट-लाइन विमान, Su-57, रूस के सुदूर पूर्व में कोम्सोमोल्स्क-ऑन-अमूर एविएशन प्लांट में बनता है। रूस को उम्मीद है, कि उसका सोफिस्टिकेटेड Su-57 फाइटर जेट, जो अमेरिका के F-35 और चीनी J-20 माइटी ड्रैगन के मुकाबले का ही है, वो इंडियन एयरफोर्स को स्टील्थ विमान पर फिर से विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
हालांकि, इस फाइटर जेट के साथ सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि इसे बनाने में रूस को 20 सालों से ज्यादा का वक्त लगा है और रूस के पास इतनी क्षमता नहीं है, कि वो तेजी से ज्यादा संख्या में इस फाइटर जेट का प्रोडक्शन कर सके।
क्या रूस से को-प्रोडक्शन का ऑफर भारत को मिलेगा?
एयर शो में Su-57 की शुरुआत का समय राष्ट्रपति पुतिन की भारत की बहुप्रतीक्षित यात्रा के साथ होने की संभावना है। ऐसी अटकलें हैं, कि राष्ट्रपति पुतिन भारत को Su-57 देने के लिए एक नया प्रस्ताव दे सकते हैं, जिसमें "मेक इन इंडिया" पहल के तहत सह-उत्पादन की संभावना भी शामिल है।
Su-57 के लिए रूस की नई पेशकश में स्टेल्थ, एवियोनिक्स और लड़ाकू क्षमताओं में सुधार की पेशकश शामिल है, जिसमें हाइपरसोनिक हथियारों को शामिल करना भी शामिल है। रूस ने विमान की कीमत कम कर दी है और नई दिल्ली को लुभाने के लिए भारतीय रुपये में एक अनूठी भुगतान प्रणाली को स्वीकार कर सकता है।
रूसी लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की रीढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में एक सहजीवी संबंध रहा है, क्योंकि भारतीय धन ने रूसी रक्षा क्षेत्र की मदद की जबकि रूसी उत्पाद ने भारतीय सेना को आधुनिक बनाने में मदद की है।
Su-57 का उत्पादन सीमित रहा है। 2010 में इसकी पहली उड़ान के बाद से 14 साल हो चुके हैं और 40 से भी कम विमान डिलीवर किए गए हैं। यह मुख्य रूप से डिजाइन और विकास में देरी और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण है। वास्तविक उत्पादन 2019 तक शुरू भी नहीं हुआ, जो रूस की परेशानियों को दिखाता है। भारत पहले से ही 250 से ज्यादा Su-30MKI का संचालन करता है और भारतीय विमान निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के पास रूसी लड़ाकू विमानों के लाइसेंस-उत्पादन का अनुभव है। यदि Su-57 का निर्माण हो जाता है, तो यह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।
Su-57 पर सहयोग 2007 में शुरू हुए सहयोग को ही आगे बढ़ाएगा, जब दोनों देशों ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान विकसित करने के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे बाद में भारत बाहर निकल आया था।
समझौते के तहत, यह कल्पना की गई थी, कि भारतीय एयरोस्पेस निर्माता हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) रूसी सुखोई डिजाइन ब्यूरो के साथ मिलकर Su-57 स्टील्थ फाइटर का बेहतर संस्करण विकसित करेगा।
भारत Su-57 प्रोजेक्ट से बाहर क्यों आया?
2018 में, भारत सरकार ने अपने रूसी समकक्ष को अपना फैसला बताने के बाद, 8.63 बिलियन अमेरिकी डॉलर के इस सौदे को औपचारिक रूप से रोक दिया था। रूसियों को इस विशाल परियोजना के साथ अकेले आगे बढ़ने के लिए कहा गया था। भारत ने कहा था, कि वो या तो बाद में इस परियोजना में शामिल हो सकता है, या रूसी वायु सेना में शामिल होने के बाद पूरी तरह से विकसित लड़ाकू जेट खरीद सकता है।
T-50 या PAK FA के नाम से भी जाने जाने वाले स्टील्थ फाइटर को भारतीय जेट का आधार माना जाता था। हालांकि, लागत और तकनीकी मुद्दों ने इस सौदे को नाकाम बना दिया। अब, भारत के पास Su-57 के विकास में ज्यादा मात्रा में टेक्नोलॉजी हासिल करने की उम्मीद हो सकती है।
अगर ये यह साझेदारी होती है, तो ये न सिर्फ हल्के लड़ाकू विमान (LCA) एमके-2 के विकास में कमी को पूरा करेगा, बल्कि एडवांस मीडियम फाइटर एयरक्राफ्ट (AMCA) के विकास में भी इसी प्रकार की योजना बनाई गई है।
'फेलन' को पहली बार 2010 में दुनिया के सामने पेश किया गया था और इसे एक ऐसा विमान बताया गया था, जो दुश्मनों के रडार से बचते हुए हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के मिशनों में सक्षम है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि ये फाइटर जेट अभी भी पूरी तरह से चालू होने से दूर है, भले ही इसे 2018 और 2019 में सीरिया भेजा गया हो, लेकिन कथित तौर पर इसने कोई लड़ाकू मिशन को अंजाम नहीं दिया।
सुखोई Su-57 को सभी प्रकार के हवाई, जमीनी और नौसैनिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। मिश्रित सामग्रियों के व्यापक उपयोग के कारण इसकी स्टेल्थ क्षमता बढ़ गई है और यह सुपरसोनिक क्रूज़िंग गति तक पहुंचने में सक्षम है। ऐसा कहा जाता है, कि यह सबसे एडवांस ऑनबोर्ड रेडियो-इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से लैस है, जिसमें एक शक्तिशाली ऑनबोर्ड कंप्यूटर (तथाकथित इलेक्ट्रॉनिक सेकंड पायलट) शामिल है। इसका रडार सिस्टम इसके पूरे शरीर में फैला हुआ है, और इसके हथियार इसके धड़ के अंदर रखे गए हैं।
रूस स्टील्थ फाइटर जेट के लिए एक 'वफादार विंगमैन' के रूप में Su-57 के साथ S-70 ओखोटनिक (हंटर-बी) स्ट्राइक ड्रोन को भी तैनात करने की सोच रहा है। UAC के सीईओ यूरी स्लीसर ने पहले कहा था, कि Su-57 पांचवीं पीढ़ी का जेट छठी पीढ़ी के विमान की ओर एक कदम है और इसका उपयोग परिवार को विकसित करने के लिए किया जाएगा।
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