...तो क्या मंगल के चंद्रमा पृथ्वी जैसे खूबसूरत नहीं डरावने हैं! देखो तो होती है घबराहट और डर का अनुभव
स्पेस में कई ऐसी संरचनाए हैं, जिस पर साइंटिस्ट्स रिसर्च कर रहे हैं। इन ऐसे तथ्य मिल रहे हैं, जो पृथ्वी के खगोलीय डेटा से बिल्कुल अलग हैं। स्पेस साइंटिस्ट्स ऐसे ही एक डेटा का अध्ययन किया है।
Phobos and Deimos: स्पेस में कई ऐसी संरचनाए हैं, जिस पर साइंटिस्ट्स रिसर्च कर रहे हैं। इन ऐसे तथ्य मिल रहे हैं, जो पृथ्वी के खगोलीय डेटा से बिल्कुल अलग हैं। एक बार तो इन पर विश्वास करना भी मुश्किल हो जाता है। स्पेस साइंटिस्ट्स ऐसे ही एक डेटा का अध्ययन किया है। जिसमें मंगल पर दिखने वाले 2 चंद्रमाओं को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। लाल ग्रह यानी मार्श पर फोबोस और डीमोस नाम के दो चंद्रमा ऐसे हैं, जो नेचर में पृथ्वी की चंद्रमा से काफी अलग हैं।

मंगल के डरावने चांद
दुनिया में खूबसूरती की तुलाना चांद यानी चंद्रमा से की जाती है। धरती से दिखने वाले चांद को प्यार और शीतलता का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है कि चंद्रमा को देखने से डर भी लग सकता है। शायद नहीं। लेकिन ये सिर्फ धरती के लिए है। साइंटिस्ट्स ने दो ऐसे चंद्रमाओं की खोज की, जिन्हें देखने से दहशत और घबराहट का अनुभव होता है। ये मंगल के चंद्रमा(Mars moon) हैं। जिनका नाम फोबोस और डीमोस (Phobos and Deimos) है।

1877 में पहली खोज
अमेरिकी स्पेस साइंटिस्ट आसफ हॉल ने यह 1877 पर मंगल ग्रह का चक्कर लगाने वाली दो चमकीली वस्तुओं की खोज की थी। जिनका फोबोस और डीमोस रखा गया। ये ग्रीक भाषा के शब्द हैं। जिनका हिंद में अर्थ होता है डर और घबराहट। हालांकि इनकी उत्पत्ति अभी रहस्य बनी हुई है। मंगल के इन चंद्रमाओं का पता यूरोपीय स्पेस मिशन मार्स एक्सप्रेस ने लगया था। मिशन के तहत फोबोस के अंदर की ऐसी संरचाओं की तस्वीर दिखी जो विचित्र थीं। किसी की ग्रह की ऐसी संरचना साइंटिस्ट्स ने इससे पहले कभी नहीं देखी थी।

फोबोस के बेहद करीब पहुंचा अंतरिक्षयान
फोबोस और डीमोस के नाम से इनके प्रभाव का अंदाजा हो जाता है। इन ग्रीक शब्दों के अर्थ भय और घबराहट होता हैं। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ने हाल ही में MARSIS उपकरण को अपग्रेड किया है। जिससे मंगल के चंद्रमा फोबोस की रहस्यमय उत्पत्ति के बारे में जानकारी मिलने में आसानी होगी। मिशन के तहत मंगल पर भेजा गया अंतरिक्ष यान फोबोस के काफी करीब पहुंच गया। अंतरिक्ष यान ने मंगल के फोबोस की जो तस्वीरें भेजी वो महज 83 किलोमीटर की दूरी से ली गई।

फोबोस और डीमोस से डर क्यों?
मार्सिस मंगल या फोबोस की ओर कम-आवृत्ति वाली रेडियो तरंगें भेजता है। इसकी सहायता से वैज्ञानिक मंगल की सतह के नीचे की संरचना का नक्शा बना सकते हैं। इसके साथ ही मंगल के आसपास मौजूद किस भी खगोलीय घटना या वस्तु की स्तिथि का अध्ययन किया जा सकता है। मिशन के मार्स एक्सप्रेस के फ्लाईबाई के दौरान अंतरिक्ष यान ने फोबोस पर रेडियो सिग्नलों की बीम छोड़ी। इसका प्रभाव ये हुआ कि बीम (Beam) वापस यान की ओर रिफ्लेक्ट हो रही है। इस दौरान मंगल की चंद्रमा की जो तस्वीर दिखी वो पृथ्वी के चंद्रमा से काफी अलग थी। तस्वीर एक एस्टेरॉयड जैसी थी। जिसको देखकर ये लगा कि मंगल जहां हम जीवन की तलाश कर रहे हैं। कहीं उसके ये विनाश का कारण ना बन जाए।

फोबोस और डीमोस पर रिसर्च
मंगल की ताजा तस्वीरों को लेकर स्पेस एजेंसी ने कहा कि टीम मंगल एक्सप्रेस के साथ फोबोस की खोज के शुरुआती चरण में है। एजेंसी ने कहा, "हमने पहले से ही चंद्रमा की सतह के नीचे कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जो बिल्कुल नए हैं। फोबोस की उत्पत्ति और उसके रहस्य को सुलझाने के लिए हम MARSIS द्वारा भेजे गए महत्वपूर्ण डेटा को लेकर अध्ययन किया जा रहा है"। वहीं एसए मार्स एक्सप्रेस के वैज्ञानिक कॉलिन विल्सन ने कहा "क्या मंगल के दो छोटे चंद्रमा क्षुद्रग्रहों (Moon Asteroids) तक हम पहुंच गए हैं। संभवत: ये मंगल के ही अंश हैं। लेकिन अब तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। उनकी उपस्थिति से पता चलता है कि वे एस्टरॉयड हैं, लेकिन वे जिस तरह से मंगल ग्रह की परिक्रमा करते हैं उसको लेकर सवाल खड़े होते हैं।












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