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Sierra Madre: उस छोटे से जहाज की कहानी, जो चीन को नहीं करने दे रहा दक्षिण चीन सागर पर कब्जा

Sierra Madre: दक्षिण चीन सागर आज की तारीख में दुनिया का सबसे विवादित समुद्र है, क्योंकि चीन का दावा है, कि वो पूरे दक्षिण चीन सागर का मालिक है, और इस समुद्र के किनारे बसे बाकी देश, जैसे फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया, ब्रुनेई दारुस्सलाम का इस जहाज के एक इंच हिस्से पर भी अधिकार नहीं है।

जबकि, इन देशों का कहना है, कि उनका भी दक्षिण चीन सागर पर उतना ही हक है, जितना चीन का है, लेकिन इन देशों को डराने के लिए चीन लगाकार आक्रामक सैन्य कार्रवाइयां करता रहा है। खासकर फिलीपींस, जिसे अमेरिका और भारत का समर्थन हासिल है, वो लगातार दक्षिण चीन सागर में चीन से भिड़ रहा है।

What is Sierra Madre

जिससे लगातार चीन और फिलीपींस के बीच टकराव होने की आशंका बनी रहती है और उसने इसी महीने भारतीय क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की भारत से डिलीवरी ली है, जिसे उसने दक्षिण चीन सागर में चीन के नजदीक तैनात करने का फैसला किया है।

लेकिन, सबसे दिलचस्प कहानी है द्वितीय विश्व युद्ध के समय के जहाज सिएरा माद्रे की, जिसने अभी तक दक्षिण चीन सागर पर चीन का कब्जा नहीं होने दिया है। आइये आज हम उसी जहाज की कहानी जानते हैं।

सिएरा माद्रे जहाज की कहानी

सिएरा माद्रे जहाज दूसरे विश्वयुद्ध के समय की जहाज है, जिसे 1990 के दशक में फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में स्थित एक जलमग्न चट्टान सेकंड थॉमस शोल पर लाने का फैसला किया। इसका मकसद था, दक्षिण चीन सागर में अपना दावा मजबूत करना और जानबूझकर फिलीपींस ने इस जहाज को सेकंड थॉमस शोल पर ले जाने का फैसला किया था, जहां पानी का उथला है, और इस बात को जानते हुए भी, जहाज पानी में फंस सकता है, फिलीपींस ने इसे रवाना कर दिया और फिर ये जहाज दक्षिण चीन सागर में सेकंड थॉमस शोल के पास समुद्र में फंस गया।

इसके बाद से फिलीपींस ने इस जहाज को वहां से बाहर निकालने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि इस जहाज पर हमेशा फिलीपींस के कुछ सैनिक मौजूद रहते हैं, जिन्हें लगातार खानापीना और जरूरत की दूसरी सामग्री भेजने के लिए फिलीपींस दक्षिण चीन सागर में गतिविधियां करता रहता है, जिसको लेकर चीन लगातार एतराज जताता है।

सालों से लगातार पानी में रहने और मरम्मत नहीं होने की वजह से अब इस जहाज में जंग लग चुकी है और ये अब किसी काम का नहीं रहा है।

जब जब फिलीपींस की नेवी नावो में सामान लेकर इस जहाज पर रसद सामानों की आपूर्ति करने जाती है, तब तब चीनी जहाजों के साथ उसकी टक्कर होती है। वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपींस की सिएरा माद्रे जहाज पर रसद की आपूर्ति की चीन ने अब काफी सख्ती से निगरानी शुरू कर दी है। वहीं, हालिया समय में देखा गया है, कि जब फिलीपींस की नावें, इस जहाज पर रसद की आपूर्ति करने जाती है, तो चीन उन नावों पर पानी की बौछार शुरू कर देता है।

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जहाज ने कैसे रोक रखा है समुद्र पर चीन का कब्जा?

सिएरा माद्रे जहाज को दूसरे विश्व युद्ध (1939-45) के लिए अमेरिका में बनाया गया था और साल 1944 में इसे एक लैंडिंग जहाज के तौर पर अमेरिकन नेवी को सौंप दिया गया था। इसके बाद इस जहाज को अमेरिका ने वियतनाम युद्ध (1954-75) में भेजा और फिर साल 1976 में इस जहाज को अमेरिका ने फिलीपींस को दे दिया।

साल 1999 में फिलीपींस ने इसे दक्षिण चीन सागर में थॉमस शोल नाम के एक जगह, जो एक चट्टानी इलाका है, मगर पानी में डूब हुआ है, वहां पर फिलीपींस ने इस जहाज को जान बूझकर फंसा दिया। ये जगह निर्जन स्प्रैटली द्वीपों का एक हिस्सा है। और यही वो समुद्री जगह है, जिसके करीब मिसचीफ रीफ नाम का एक जगह है, जिसपर कुछ साल पहले चीन ने अपना दावा ठोक दिया था।

चीन अब अपने दावों का विस्तार करना चाहता है, लेकिन मिसचीफ रीफ के आगे सेकंड थॉमस शोल में फिलीपींस का जहाज फंसा हुआ है, लिहाजा चीन के लिए नया दावा करते नहीं बन रहा है।

इसके बाद से चीन लगातार फिलीपींस को सिएरा माद्रे जहाज को हटाने के लिए कहता है, लेकिन फिलीपींस, चीन की इस मांग को खारिज कर देता है। अब ये जहाज काफी हद तक जर्जर हो चुका है और इसे जंग खा रहा है, लेकिन अगर फिलीपींस इस जहाज को हटाता है, तो फौरन इस क्षेत्र पर चीन कब्जा कर लेगा।

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स्प्रैटली द्वीप समूह को लेकर क्या है विवाद?

समुद्र को लेकर जो अंतर्राष्ट्रीय कानून हैं, उसके मुताबिक समुद्र की सीमा से लगे देशों को समुद्री संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए कुछ अधिकार दिए गये हैं। जिसे स्पेशल इकोनॉमिक जोन कहा जाता है। स्पेशल इकोनॉमिक जोन, किसी देश के समुद्री तट से 200 समुद्री मील तक फैला होता है, जिसके भीतर आने वाले समुद्री हिस्से पर उस देश का हक होता है।

दक्षिण चीन सागर में स्थिति स्प्रैटली द्वीप समूह पर दशकों से इस क्षेत्र में आने वाले देशों ने अपना दावा किया है। चूंकी ये क्षेत्र तेल-गैस संसाधनों और मछलियों से भरपूर है, लिहाजा कोई भी देश इसपर अपना हक छोड़ने को तैयार नहीं है।

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, स्प्रैटली द्वीप समूह को लेकर विवाद "फिलीपींस के पूर्व राष्ट्रपति बेनिग्नो एक्विनो III के शासनकाल में बढ़ने लगी और 2012 में विवाद चरम पर पहुंच गया, जब चीन ने तनावपूर्ण गतिरोध के बाद विवादित स्कारबोरो शोल पर प्रभावी नियंत्रण हासिल कर लिया।"

अगले साल शी जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बन गये और उन्होंने दक्षिण चीन सागर के 99 प्रतिशत क्षेत्र पर चीन के का दावा ठोक दिया।

साल 2016 में इंटरनेशल ट्रिब्यूनल ने स्प्रैटली द्वीप को लेकर फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाया। हालांकि, ट्रिब्यूनल के फैसले में किसी देश को संप्रभु दावा नहीं किया गया, लेकिन ये कहा गया, कि कुछ समुद्री क्षेत्र फिलीपींस के स्पेशल इकोनॉमिक जोन में आते हैं, क्योंकि इस क्षेत्र का कोई भी हिस्सा, चीन के स्पेशल इकोनॉमिक जोन से कहीं भी नहीं मिलता है।

लेकिन, चीन ने ट्रिब्यूनल के फैसले को खारिज कर दिया।

ट्रिब्यूनल ने ये भी कहा, कि इस क्षेत्र में चीन जो हेलीपैड और कृत्रिम द्वीपों का निर्माण कर रहा है, उससे समुद्र के पर्यावरण को खतरनाक नुकसान पहुंचा है। और चीन ने दक्षिण चीन सागर में उन विशेषताओं की प्राकृतिक स्थिति के सबूत नष्ट कर दिए जो पार्टियों के विवाद का हिस्सा थे।"

फिलीपींस को अमेरिका और भारत से मदद

रिपोर्टों के मुताबिक, दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की आक्रामक कार्रवाइयों का विरोध करने के लिए को लेकर अमेरिका और फिलीपींस ने इसी साल मार्च में मनीला में वरिष्ठ रक्षा और राजनयिक अधिकारियों के एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी।

अमेरिका और फिलीपींस, 1951 की पारस्परिक डिफेंस पैक्ट में जुड़े हैं और मौजूदा राष्ट्रपति बाइडेन ने मनीला के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए इसी साल कहा था, कि "मैं स्पष्ट होना चाहता हूं, कि फिलीपींस के प्रति संयुक्त राज्य अमेरिका की रक्षा प्रतिबद्धता दृढ़ है।" यानि, अगर फिलीपींस पर चीन हमला करता है, तो फिलीपींस की मदद करने के लिए अमेरिका आगे बढ़ेगा।

इसके अलावा, भारत ने भी फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल सौंपना शुरू कर दिया है। 2022 में फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए समझौता किया था। फिलीपींस के तत्कालीन रक्षा सचिव डेल्फ़िन लोरेंजाना ने कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर के दौरान कहा था, कि "दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के रूप में, ब्रह्मोस मिसाइलें हमारी संप्रभुता और संप्रभु अधिकारों को कमजोर करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ प्रतिरोध प्रदान करेंगी, खासकर पश्चिमी फिलीपींस सागर में।"

माना जा रहा है, कि अगर चीन आक्रामकता दिखाता है, तो फिलीपींस ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे दक्षिण चीन सागर युद्ध का मैदान बन जाएगा और फिलहाल चीन, ऐसा करके अपनी बर्बाद होती अर्थव्यवस्था के लिए और जोखिम मोल लेना नहीं चाहेगा।

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